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Chitrakoot News: 3.26 करोड़ की जीएसटी चोरी में पुलिस ने राज्य कर से मांगा ब्योरा
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Fri, 30 Jan 2026 12:04 AM IST
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चित्रकूट। फर्जी नौ फर्मों के जरिए करीब 3.26 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी के मामले में पुलिस ने राज्य कर विभाग से फर्मों के 11 प्रकार के महत्वपूर्ण दस्तावेज मांगे हैं। इन दस्तावेजों में फर्मों के पंजीकरण से धनराशि के भुगतान तक की पूरी जानकारी शामिल है। विभाग से रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस जांच को आगे बढ़ाएगी। इस मामले में विभाग ने पहले ही सदर कोतवाली में फर्जी फर्मों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी है।
जांच में खुलासा हुआ है कि गुजरात की कुरैशी नईम भाई हनीफ भाई फर्म के नाम पर रॉयल इंटरप्राइजेज सहित नौ फर्मों ने फर्जी कागजात लगाकर राज्य कर विभाग में पंजीकरण कराया था। इन फर्मों ने बिना कोई सामान बेचे ही फर्जी बिलों के आधार पर 18.68 करोड़ रुपये का भुगतान प्राप्त कर लिया, जिसमें 3.26 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की गई। इस पूरे मामले के खुलासे के बाद विभाग ने संबंधित फर्मों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
शासन स्तर से इस मामले की जांच के लिए एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन भी किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, जिले की पुलिस भी सक्रिय रूप से इस मामले की जांच में जुटी हुई है। जांच को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए पुलिस ने राज्य कर विभाग से 11 प्रकार की सूचनाएं मांगी हैं। इनमें फर्मों ने किन कागजातों के आधार पर पंजीकरण कराया, भुगतान के लिए कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, आधार कार्ड, पैन कार्ड, ईमेल आईडी और अन्य आवश्यक विवरण शामिल हैं।
उधर, सीओ अरविंद कुमार वर्मा ने बताया कि पुलिस ने फर्मों द्वारा भुगतान की गई धनराशि के तरीके के अलावा सभी जरूरी कागजात मांगे हैं। विभाग से ये दस्तावेज प्राप्त होने के बाद ही जांच को और गति दी जा सकेगी और मामले की तह तक पहुंचा जा सकेगा।
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क्या था मामला
कुरैशी नईम भाई हनीफ भाई फर्म में रायल इंटर प्राइजेज ने गुजरात के अमरेली के काजींवाड पानी दरवाजा, स्वामी नारायण मंदिर के पते के नाम से फर्म बनाई थी। इस पर करोड़ों का व्यापार किया। इसी तरह मे. पीवीजे इंटरप्राइजेज ने 1.63 करोड़, मार्क्स क्लोथिंग प्राइवेट ने 83.74 लाख, श्रीराम इंटरप्राइजेज ने 2.33 करोड़, श्रीजी इंटरप्राइजेज ने 3.93 करोड़, निवा इंटरप्राइजेज ने 1.37 करोड़, राजेश इंटरप्राइजेज ने 2.36 करोड़, टीए इंटरप्राइजेज ने 7.98 करोड़, शिव इंटरप्राइजेज ने 5.85 करोड़ का कारोबार किया। जबकि इन फर्मों की राज्य कर विभाग ने जांच की तो तय पते पर न तो फर्मे और न ही कारोबार संचालित होते पाया। जबकि इन फर्मों ने दिसंबर 2024 में जीएसटीआर रिटर्न दाखिल कर 18.68 करोड़ की आउटवर्ड सप्लाई घोषित करते हुए आईजीएसटी में तीन करोड़ 26 लाख 57251 रुपये की फर्जी आईटीसी दिया था। ऐसे में इन फर्मों ने सरकारी राजस्व की चोरी की।
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जांच में खुलासा हुआ है कि गुजरात की कुरैशी नईम भाई हनीफ भाई फर्म के नाम पर रॉयल इंटरप्राइजेज सहित नौ फर्मों ने फर्जी कागजात लगाकर राज्य कर विभाग में पंजीकरण कराया था। इन फर्मों ने बिना कोई सामान बेचे ही फर्जी बिलों के आधार पर 18.68 करोड़ रुपये का भुगतान प्राप्त कर लिया, जिसमें 3.26 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की गई। इस पूरे मामले के खुलासे के बाद विभाग ने संबंधित फर्मों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
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शासन स्तर से इस मामले की जांच के लिए एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन भी किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, जिले की पुलिस भी सक्रिय रूप से इस मामले की जांच में जुटी हुई है। जांच को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए पुलिस ने राज्य कर विभाग से 11 प्रकार की सूचनाएं मांगी हैं। इनमें फर्मों ने किन कागजातों के आधार पर पंजीकरण कराया, भुगतान के लिए कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, आधार कार्ड, पैन कार्ड, ईमेल आईडी और अन्य आवश्यक विवरण शामिल हैं।
उधर, सीओ अरविंद कुमार वर्मा ने बताया कि पुलिस ने फर्मों द्वारा भुगतान की गई धनराशि के तरीके के अलावा सभी जरूरी कागजात मांगे हैं। विभाग से ये दस्तावेज प्राप्त होने के बाद ही जांच को और गति दी जा सकेगी और मामले की तह तक पहुंचा जा सकेगा।
क्या था मामला
कुरैशी नईम भाई हनीफ भाई फर्म में रायल इंटर प्राइजेज ने गुजरात के अमरेली के काजींवाड पानी दरवाजा, स्वामी नारायण मंदिर के पते के नाम से फर्म बनाई थी। इस पर करोड़ों का व्यापार किया। इसी तरह मे. पीवीजे इंटरप्राइजेज ने 1.63 करोड़, मार्क्स क्लोथिंग प्राइवेट ने 83.74 लाख, श्रीराम इंटरप्राइजेज ने 2.33 करोड़, श्रीजी इंटरप्राइजेज ने 3.93 करोड़, निवा इंटरप्राइजेज ने 1.37 करोड़, राजेश इंटरप्राइजेज ने 2.36 करोड़, टीए इंटरप्राइजेज ने 7.98 करोड़, शिव इंटरप्राइजेज ने 5.85 करोड़ का कारोबार किया। जबकि इन फर्मों की राज्य कर विभाग ने जांच की तो तय पते पर न तो फर्मे और न ही कारोबार संचालित होते पाया। जबकि इन फर्मों ने दिसंबर 2024 में जीएसटीआर रिटर्न दाखिल कर 18.68 करोड़ की आउटवर्ड सप्लाई घोषित करते हुए आईजीएसटी में तीन करोड़ 26 लाख 57251 रुपये की फर्जी आईटीसी दिया था। ऐसे में इन फर्मों ने सरकारी राजस्व की चोरी की।