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Chitrakoot News: पेट्रोल पंप के इंतजार में रोडवेज का बेड़ा ठप, यात्री परेशान

संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट Updated Mon, 09 Feb 2026 12:22 AM IST
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Roadways fleet stalled waiting for petrol pump, passengers upset
08 सीकेटीपी03 रोडवेज बस स्टॉप।
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चित्रकूट। धर्मनगरी में रोडवेज डिपो की स्थापना वर्षों बाद भी अधर में लटकी हुई है। बेड़ी पुलिया क्षेत्र में करोड़ों की लागत से भव्य भवन बनने के बाद भी डिपो में वर्कशॉप और पेट्रोल पंप का निर्माण न होने से अब तक एक भी बस आवंटित नहीं की जा सकी है। इसका सीधा असर यात्रियों पर पड़ रहा है, जिन्हें आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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शासन ने जमीन खरीदने से लेकर दो मंजिला भवन के निर्माण तक करीब 20 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए लेकिन डिपो के संचालन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा आज भी अधूरा है। पिछले वर्ष पेट्रोल पंप और वर्कशॉप निर्माण के लिए तीन से चार करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ है। बस स्टॉप परिसर में स्थान भी चिह्नित कर लिया गया था लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। स्थानीय लोगों ने बताया कि बीते वर्ष पेट्रोल पंप निर्माण के लिए भूमिगत टैंक लगाए गए थे। कुछ समय बाद बाहर निकाल कर रख दिए गए। तब से मशीनें और उपकरण धूल फांक रहे हैं।
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डिपो भवन में एआरएम कार्यालय, बाबुओं व कर्मचारियों के कक्ष, यात्रियों के लिए सुविधायुक्त हॉल और दुकानें बनाई गई हैं। फिलहाल प्रयागराज व बांदा डिपो से आने वाली बसें केवल परिसर में प्रवेश कर चक्कर लगाकर वापस लौट जाती हैं। कार्यशाला के लगभग 10 कर्मचारी यहां एक माह की ड्यूटी कर लौट गए, लेकिन इसके बाद कोई प्रगति नहीं हुई। डिपो शुरू होने पर चित्रकूट का सीधा जुड़ाव प्रमुख महानगरों के साथ-साथ मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और गुजरात से हो सकेगा।
एआरएम प्रेमलाल ने बताया कि रोडवेज बस स्टॉप में पेट्रोल पंप न होने कारण डिपो के बेड़े में अब तक बसें शामिल नहीं हुई है। अनुबंधित बसों से काम हो रहा है। जल्द ही काम शुरू होने की संभावना है।
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कर्मचारियों को ड्यूटी के लिए होना पड़ रहा परेशान
डिपो बनने के साथ चालक व परिचालक भर्ती की गई। इस समय डिपो के पास 80 संविदा कर्मचारी है। इसमें 40 चालक व 40 परिचालक हैं लेकिन डिपो के पास बस न होने से उन्हें दूसरे डिपो के भरोसे ड्यूटी करना पड़ता है। दूसरे डिपो में पहले से भर्ती होने के कारण उन्हें कई कई दिनों तक घर में बैठना पड़ता है, वहीं कुछ न तो दूसरा काम भी तलाशना शुरू कर दिया है।
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