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Chitrakoot News: मानसून की सुस्ती से सूखे के आसार, सिंचाई खर्च से किसान चिंतित
Mon, 13 Jul 2026 01:24 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Mon, 13 Jul 2026 01:24 AM IST
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चित्रकूट। जिले में इस बार मानसून की चाल बेहद सुस्त है। इससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है। पिछले वर्ष जून और जुलाई में करीब 250 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई थी। इस वर्ष अब तक दोनों महीनों में मिलाकर केवल 60 से 70 मिलीमीटर बारिश हुई है। सामान्य से काफी कम वर्षा होने के कारण जिले में सूखे जैसे हालात बनने की आशंका गहरा गई है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष जून में 136 मिलीमीटर वर्षा हुई थी। इस बार जून में महज आठ से नौ मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। जून में सामान्य वर्षा का औसत 100 मिलीमीटर से अधिक रहता है। इसी तरह पिछले वर्ष जुलाई में 150 से 200 मिलीमीटर तक बारिश हुई थी। इस बार अब तक करीब 70 मिलीमीटर वर्षा ही रिकॉर्ड की गई है।
मौसम वैज्ञानिक अंकुर त्रिपाठी ने बताया कि अगले पांच से छह दिनों के दौरान जिले में हल्की बारिश की संभावना है। हालांकि फिलहाल अच्छी या तेज बारिश के आसार नहीं हैं। इसका सबसे अधिक असर खरीफ की फसलों विशेषकर धान की खेती पर पड़ रहा है।
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निजी संसाधनों से करनी पड़ रही सिंचाई
सोनेपुर निवासी किसान राजेश सोनकर ने बताया कि पिछले वर्ष अधिक बारिश से खेतों में पानी भर गया था लेकिन इस बार बारिश नहीं होने से सिंचाई के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने पड़ रहे हैं। 12 जुलाई बीतने के बाद भी पर्याप्त वर्षा नहीं हुई। इससे मजबूरी में अधिक खर्च कर खेतों की सिंचाई करनी पड़ रही है।
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राजापुर के किसान रमेश ने बताया कि जुलाई की शुरुआत में हुई बारिश से अच्छी फसल की उम्मीद जगी थी लेकिन उसके बाद बारिश थम गई। बादलों के बीच निकल रही तेज धूप से खेतों की नमी तेजी से खत्म हो रही है। ऐसे में धान की फसल बचाने के लिए निजी संसाधनों से सिंचाई करनी पड़ रही है। इससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष जून में 136 मिलीमीटर वर्षा हुई थी। इस बार जून में महज आठ से नौ मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। जून में सामान्य वर्षा का औसत 100 मिलीमीटर से अधिक रहता है। इसी तरह पिछले वर्ष जुलाई में 150 से 200 मिलीमीटर तक बारिश हुई थी। इस बार अब तक करीब 70 मिलीमीटर वर्षा ही रिकॉर्ड की गई है।
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मौसम वैज्ञानिक अंकुर त्रिपाठी ने बताया कि अगले पांच से छह दिनों के दौरान जिले में हल्की बारिश की संभावना है। हालांकि फिलहाल अच्छी या तेज बारिश के आसार नहीं हैं। इसका सबसे अधिक असर खरीफ की फसलों विशेषकर धान की खेती पर पड़ रहा है।
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निजी संसाधनों से करनी पड़ रही सिंचाई
सोनेपुर निवासी किसान राजेश सोनकर ने बताया कि पिछले वर्ष अधिक बारिश से खेतों में पानी भर गया था लेकिन इस बार बारिश नहीं होने से सिंचाई के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने पड़ रहे हैं। 12 जुलाई बीतने के बाद भी पर्याप्त वर्षा नहीं हुई। इससे मजबूरी में अधिक खर्च कर खेतों की सिंचाई करनी पड़ रही है।
राजापुर के किसान रमेश ने बताया कि जुलाई की शुरुआत में हुई बारिश से अच्छी फसल की उम्मीद जगी थी लेकिन उसके बाद बारिश थम गई। बादलों के बीच निकल रही तेज धूप से खेतों की नमी तेजी से खत्म हो रही है। ऐसे में धान की फसल बचाने के लिए निजी संसाधनों से सिंचाई करनी पड़ रही है। इससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है।