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Chitrakoot News: बदला सिस्टम, अब नहीं हड़प सकेंगे पेंशन
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चित्रकूट। कोषागार में हुए 43.41 करोड़ रुपये के बहुचर्चित पेंशन घोटाले ने सरकारी तंत्र और बिचौलियों के गठजोड़ की कलई खोल दी थी। इस घोटाले के बाद अब पेंशन खातों में मुख्य कोषाधिकारी (सीटीओ) किसी भी तरह का खातों में बदलाव नहीं कर सकेंगे। इससे करीब पांच हजार से ज्यादा पेंशनरों को राहत मिली है।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन बुढ़ापे का सहारा होती है लेकिन चित्रकूट में इसी सहारे पर डाका डाला गया। सरकारी खजाने से 43.41 करोड़ रुपये की रकम हड़पने के लिए पेंशन पोर्टल के साथ खिलवाड़ किया गया। इसकी पुष्टि खुद एसआईटी टीम ने की। जांच टीम के अनुसार कोषागार से पेंशनर माया के खाते में पेंशन जाती थी। उनके निधन के बाद बेटे गौरेंद्र ने कोषागार में उनका मृत्यु प्रमाण पत्र पेश नहीं किया। विभागीय अफसर-कर्मचारियों से सांठगांठ कर मां माया के पेंशन खाते में बेटे गौरेंद्र ने अपना बैंक खाता दर्ज करा लिया और अपने खाते में करोड़ों रकम डकार ली। इसी प्रकार बिचौलिया पंचू भी पेंशनर पिता की मौत के पांच साल तक उनका खाता संचालित करता रहा है। उसने भी अपने मृत पिता के पेंशन खाते में अपना नाम बैंक खाता जुड़वा लिया था। उसके खाते में करीब साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा रकम आई थी।
राजापुर के अर्जुनपुर निवासी पेंशनर मोहन लाल और उनकी पत्नी दोनों सरकारी सरकारी सेवा में थे। सेवानिवृत्त होने के बाद दोनों को पेंशन मिलती थी। पत्नी के निधन के बाद पति मोहन लाल ने कोषागार में पत्नी के निधन का प्रमाण पत्र जमा नहीं किया। पत्नी की माैत के बाद भी मोहन लाल उनके खाते से लेनदेन करता रहा। एसआईटी टीम की जांच रिपोर्ट के अनुसार घोटाले में करीब 10 पेंशनर खातों में छेड़छाड़ कर दूसरे नाम के खाते दर्ज कर दिए गए। इसके बाद इन खातों में पेंशन की राशि ट्रांसफर कर दी गई। मामला सामने आने के बाद प्रशासन की ओर से कार्रवाई की गई। अब तक इस घोटाले में 93 पेंशनरों, चार सरकारी कर्मचारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। विवेचना में 25 बिचौलियों के नाम सामने आए थे। इस मामले में बिचौलिया समेत अब तक 41 आरोपी गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजे जा चुके हैं। शेष की तलाश में टीम जुटी है।
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खातों में बदलाव नहीं कर सकेंगे सीटीओ
चित्रकूट। कोषागार में हुए 43.41 करोड़ के पेंशन घोटाले के बाद अब कोषागार निदेशालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। निदेशालय ने अब पेंशन खातों में किसी भी प्रकार के मुख्य कोषाधिकारी (सीटीओ) के बदलाव पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है। इस निर्णय से जनपद के पांच हजार से अधिक पेंशनरों को बड़ी राहत मिली है जिनके खातों में अब अनधिकृत बदलाव नहीं किए जा सकेंगे।
कोषागार से इन्हें मिलती पेंशन
सिविल पेंशन राज्य- 2529, विधायकों को पेंशन- 8, राज्य न्यायिक सेवाएं- 1, एनपीएस पारिवारिक पेंशन- 45, एनपीएस कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का भुगतान- 16, उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम- 1, उत्तर प्रदेश दक्षिणांचल पावर कॉर्पोरेशन- 98, इंटरमीडिएट कॉलेज - 583, डिग्री कॉलेज- 17, संस्कृत विद्यालय -16, संस्कृत महाविद्यालय-18, सिविल जूनियर हाई स्कूल- 20, बेसिक शिक्षा परिषद -1567, एनपीएस पारिवारिक पेंशन बेसिक शिक्षा- 44, रक्षा मंत्रालय पेंशन-एसएए-1, एफएए-1, श्रेणी पंचम- 1 व श्रेणी द्वितीय- 1 को पेंशन मिलती है। इसके अलावा अन्य राज्य पेंशन-गुजरात, बिहार, ओडिशा, महाराष्ट्र, पंजाब- 1-1, हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश-3- 3, मध्य प्रदेश -114, उत्तराखंड- 5, छत्तीसगढ़- 26 व राजनीतिक पेंशन-राज्य-2 पेंशन जारी होती है।
नई व्यवस्था के तहत अब पेंशनरों को खाते में बदलाव के लिए बांदा में अपर निदेशक कोषागार के यहां आवेदन के साथ उपस्थित होना पड़ेगा। अनुमति मिलने के बाद ही कोई बदलाव हो सकेगा।- रमेश सिंह, वरिष्ठ कोषाधिकारी।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन बुढ़ापे का सहारा होती है लेकिन चित्रकूट में इसी सहारे पर डाका डाला गया। सरकारी खजाने से 43.41 करोड़ रुपये की रकम हड़पने के लिए पेंशन पोर्टल के साथ खिलवाड़ किया गया। इसकी पुष्टि खुद एसआईटी टीम ने की। जांच टीम के अनुसार कोषागार से पेंशनर माया के खाते में पेंशन जाती थी। उनके निधन के बाद बेटे गौरेंद्र ने कोषागार में उनका मृत्यु प्रमाण पत्र पेश नहीं किया। विभागीय अफसर-कर्मचारियों से सांठगांठ कर मां माया के पेंशन खाते में बेटे गौरेंद्र ने अपना बैंक खाता दर्ज करा लिया और अपने खाते में करोड़ों रकम डकार ली। इसी प्रकार बिचौलिया पंचू भी पेंशनर पिता की मौत के पांच साल तक उनका खाता संचालित करता रहा है। उसने भी अपने मृत पिता के पेंशन खाते में अपना नाम बैंक खाता जुड़वा लिया था। उसके खाते में करीब साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा रकम आई थी।
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राजापुर के अर्जुनपुर निवासी पेंशनर मोहन लाल और उनकी पत्नी दोनों सरकारी सरकारी सेवा में थे। सेवानिवृत्त होने के बाद दोनों को पेंशन मिलती थी। पत्नी के निधन के बाद पति मोहन लाल ने कोषागार में पत्नी के निधन का प्रमाण पत्र जमा नहीं किया। पत्नी की माैत के बाद भी मोहन लाल उनके खाते से लेनदेन करता रहा। एसआईटी टीम की जांच रिपोर्ट के अनुसार घोटाले में करीब 10 पेंशनर खातों में छेड़छाड़ कर दूसरे नाम के खाते दर्ज कर दिए गए। इसके बाद इन खातों में पेंशन की राशि ट्रांसफर कर दी गई। मामला सामने आने के बाद प्रशासन की ओर से कार्रवाई की गई। अब तक इस घोटाले में 93 पेंशनरों, चार सरकारी कर्मचारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। विवेचना में 25 बिचौलियों के नाम सामने आए थे। इस मामले में बिचौलिया समेत अब तक 41 आरोपी गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजे जा चुके हैं। शेष की तलाश में टीम जुटी है।
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खातों में बदलाव नहीं कर सकेंगे सीटीओ
चित्रकूट। कोषागार में हुए 43.41 करोड़ के पेंशन घोटाले के बाद अब कोषागार निदेशालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। निदेशालय ने अब पेंशन खातों में किसी भी प्रकार के मुख्य कोषाधिकारी (सीटीओ) के बदलाव पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है। इस निर्णय से जनपद के पांच हजार से अधिक पेंशनरों को बड़ी राहत मिली है जिनके खातों में अब अनधिकृत बदलाव नहीं किए जा सकेंगे।
कोषागार से इन्हें मिलती पेंशन
सिविल पेंशन राज्य- 2529, विधायकों को पेंशन- 8, राज्य न्यायिक सेवाएं- 1, एनपीएस पारिवारिक पेंशन- 45, एनपीएस कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का भुगतान- 16, उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम- 1, उत्तर प्रदेश दक्षिणांचल पावर कॉर्पोरेशन- 98, इंटरमीडिएट कॉलेज - 583, डिग्री कॉलेज- 17, संस्कृत विद्यालय -16, संस्कृत महाविद्यालय-18, सिविल जूनियर हाई स्कूल- 20, बेसिक शिक्षा परिषद -1567, एनपीएस पारिवारिक पेंशन बेसिक शिक्षा- 44, रक्षा मंत्रालय पेंशन-एसएए-1, एफएए-1, श्रेणी पंचम- 1 व श्रेणी द्वितीय- 1 को पेंशन मिलती है। इसके अलावा अन्य राज्य पेंशन-गुजरात, बिहार, ओडिशा, महाराष्ट्र, पंजाब- 1-1, हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश-3- 3, मध्य प्रदेश -114, उत्तराखंड- 5, छत्तीसगढ़- 26 व राजनीतिक पेंशन-राज्य-2 पेंशन जारी होती है।
नई व्यवस्था के तहत अब पेंशनरों को खाते में बदलाव के लिए बांदा में अपर निदेशक कोषागार के यहां आवेदन के साथ उपस्थित होना पड़ेगा। अनुमति मिलने के बाद ही कोई बदलाव हो सकेगा।- रमेश सिंह, वरिष्ठ कोषाधिकारी।