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Chitrakoot News: जंगलों से निकल सड़कों पर घूम रहे बाघ, ग्रामीण दहशत में
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Thu, 02 Apr 2026 11:51 PM IST
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फोटो न-02सीकेटीपी 08 मझगवां क्षेत्र के डेगरहट गांव के पास सड़क किनारे बैठा बाघ। संवाद
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चित्रकूट। मध्य प्रदेश के मझगवां रेंज के जंगलों से निकलकर बाघ सड़कों पर आ रहे हैं, जिससे आसपास के ग्रामीण दहशत में हैं। वन विभाग के अनुसार, मझगवां रेंज में वर्तमान में करीब बीस बाघ मौजूद हैं। हाल ही में एक नर बाघ को सड़क की पुलिया के पास दिखा था, जिसने कुछ समय पहले एक बैल का शिकार किया था।
एक बाघ मझगवां रेंज के डेगरहट के जंगल में सड़क की पुलिया के पास बैठा देखा गया था। इसी तरह धारकुंडी के जंगल से भी तेंदुए अक्सर सड़क पर आ जाऐ हैं। स्थानीय निवासियों की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, जिसके बाद तेंदुआ झाड़ियों में चला गया। डीएफओ मयंक चांदीवाल ने बताया कि यह करीब चार से पांच वर्ष का नर बाघ है, जिसने हाल ही में एक बैल का शिकार किया था।
उन्होंने बताया कि बाघ अपने निर्धारित क्षेत्र की ओर लौटने का प्रयास कर रहा था, लेकिन सड़क पर वाहनों की आवाजाही से असहज महसूस कर रहा था। वन विभाग के अधिकारियों के निर्देश पर कुछ देर के लिए बैरियर लगाकर रास्ता बंद कर दिया गया, और बाघ के जंगल में जाने के बाद बैरियर हटा दिया गया। धारकुंडी निवासी रामनाथ और शिवकुमार ने बताया कि आए दिन जंगलों से निकलकर तेंदुए सड़कों पर घूमते रहते हैं, जिससे ग्रामीण इस क्षेत्र में जाने से डरते हैं।
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डीएफओ मयंक चांदीवाल ने बताया कि मझगवां रेंज में वर्तमान में लगभग बीस बाघ मौजूद हैं। वर्ष 2016 से इस क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने का प्रयास जारी है। यह जंगल उत्तर प्रदेश के रानीपुर टाइगर क्षेत्र और पन्ना राष्ट्रीय उद्यान से जुड़ा हुआ है, जिससे जंगली जानवर यहां घूमते रहते हैं।
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एक बाघ मझगवां रेंज के डेगरहट के जंगल में सड़क की पुलिया के पास बैठा देखा गया था। इसी तरह धारकुंडी के जंगल से भी तेंदुए अक्सर सड़क पर आ जाऐ हैं। स्थानीय निवासियों की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, जिसके बाद तेंदुआ झाड़ियों में चला गया। डीएफओ मयंक चांदीवाल ने बताया कि यह करीब चार से पांच वर्ष का नर बाघ है, जिसने हाल ही में एक बैल का शिकार किया था।
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उन्होंने बताया कि बाघ अपने निर्धारित क्षेत्र की ओर लौटने का प्रयास कर रहा था, लेकिन सड़क पर वाहनों की आवाजाही से असहज महसूस कर रहा था। वन विभाग के अधिकारियों के निर्देश पर कुछ देर के लिए बैरियर लगाकर रास्ता बंद कर दिया गया, और बाघ के जंगल में जाने के बाद बैरियर हटा दिया गया। धारकुंडी निवासी रामनाथ और शिवकुमार ने बताया कि आए दिन जंगलों से निकलकर तेंदुए सड़कों पर घूमते रहते हैं, जिससे ग्रामीण इस क्षेत्र में जाने से डरते हैं।
डीएफओ मयंक चांदीवाल ने बताया कि मझगवां रेंज में वर्तमान में लगभग बीस बाघ मौजूद हैं। वर्ष 2016 से इस क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने का प्रयास जारी है। यह जंगल उत्तर प्रदेश के रानीपुर टाइगर क्षेत्र और पन्ना राष्ट्रीय उद्यान से जुड़ा हुआ है, जिससे जंगली जानवर यहां घूमते रहते हैं।