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Chitrakoot: वन कर्मचारी की मौत के बाद सुसाइड नोट मिला, विसरा सुरक्षित, जांच शुरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
Published by: Shikha Pandey
Updated Wed, 08 Apr 2026 10:46 PM IST
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मौके पर लगी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
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वन विभाग के वन रक्षक की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार से पहले जेब से एक सुसाइड नोट मिला। इसमें विभाग में भ्रष्टाचार और उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और शव का पोस्टमार्टम कराया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका, इसलिए विसरा सुरक्षित रखा गया है।
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कर्वी थाना क्षेत्र के भीकमपुर निवासी सोनू सिंह ने बताया कि उनके पिता चंद्रशेखर सिंह हमीरपुर के धनौरी डिपो में वन रक्षक पद पर थे। मंगलवार को उनके पिता की तबीयत खराब हो गई थी। जिस पर उन्हें पहले उरई के मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, फिर कानपुर ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। परिवारजन अंतिम संस्कार के लिए शव को चित्रकूट स्थित अपने घर ले आए थे। बुधवार सुबह अंतिम क्रिया करने की तैयारी कर रहे थे। स्नान के समय उनकी जेब से एक सुसाइड नोट मिला। सुसाइड नोट देख परिजन आक्रोशित हो गए, इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी। उप निरीक्षक अमरेंद्र प्रताप सिंह ने मौके पर पहुंचकर पंचायतनामा भरा और शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेजा। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। सदर कोतवाल दुर्गविजय सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत कारण साफ नहीं हो सका। इसलिए विसरा को सुरक्षित रख लिया गया है।
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सुसाइड नोट में भ्रष्टाचार और उत्पीड़न का आरोप
हमीरपुर में वन रक्षक चंद्रशेखर की मौत प्रकरण में बुधवार को अंतिम संस्कार से ठीक पहले उनकी जेब से मिले एक सुसाइड नोट में भ्रष्टाचार व उत्पीड़न का जिक्र किया है। जिसे देख सभी लोग स्तब्ध रह गए। सुसाइड नोट में वन निगम के पांच अधिकारियों/कर्मचारियों पर फर्जी तरीके से 2.65 लाख रुपये के लकड़ी गबन के आरोप में फंसाने और पैसे जमा न करने पर जेल भेजने की धमकी देने का भी जिक्र है। पत्र में जिस अवधि का गबन बताया जा रहा है, उस समय वो अपनी बेटी की शादी के लिए अवकाश पर थे। उन्होंने यह भी लिखा है कि दो बार आंखों का ऑपरेशन होने के बावजूद उन पर लगातार अनावश्यक काम का दबाव बनाया जा रहा था। इससे परेशान होकर उसने यह कदम उठाया।