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Chitrakoot News: करोड़ों की हर घर जल परियोजनाएं अधूरी, गहराया पेयजल संकट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Sat, 07 Mar 2026 01:00 AM IST
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फोटो न-06 सीकेटीपी 10 चांदी बांगर गांव में बनी पानी टंकी। संवाद
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चित्रकूट। गर्मी शुरू होते ही मानिकपुर और पहाड़ी क्षेत्रों सहित जिले के कई गांवों में पेयजल संकट गहरा गया है। चार साल पहले हर घर जल योजना में करोड़ों की लागत से पाइप लाइनें बिछाई गईं और टंकियां बनीं। पर जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी, जिससे निवासियों में रोष है।
जिले में हर घर पानी पहुंचाने के लिए दो प्रमुख योजनाएं चल रही हैं। इनमें 213.59 करोड़ रुपये की सिलौटा मुस्तकिल और 303.32 करोड़ रुपये की चांदी बांगर योजनाएं शामिल हैं। इनका लक्ष्य क्रमशः 77 और 300 गांवों में पानी पहुंचाना है। शुरुआती दौर में काम शुरू हुआ, टंकियां बनीं, पाइप लाइनें बिछाई गईं। घरों में कनेक्शन भी लिए गए, पर नलों में पानी नहीं आया। मानिकपुर क्षेत्र के कई गांवों में पानी का संकट गहराने लगा है। हैंडपंप भी सूखने लगे हैं, जिससे समस्या बढ़ गई है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पेयजल संकट बरकरार है।
ग्रामीणों की शिकायतें
समाजसेवी रामपाल त्रिपाठी ने बताया कि मानिकपुर क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाने का कार्य चार साल से अधूरा है। पानी की आपूर्ति नहीं हो रही और टंकियां शोपीस बनकर रह गई हैं। पहाड़ी क्षेत्र के बाबूपुर जैसे गांवों में टंकियां बनीं, पर आपूर्ति शुरू नहीं हुई। ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी शुरू होने पर भी पाइपलाइन से पानी नहीं मिल रहा है। शिवरामपुर कस्बे के निवासियों ने भी यही समस्या बताई।
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जल निगम के अधिशाषी अभियंता आशीष कुमार भारती ने बताया कि गांवों में जलापूर्ति करने के लिए तेजी से कार्य किया जा रहा है। चयनित गांवों में पाइप लाइन बिछाने वाली कंपनियों के अधिकारियों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि दोनों ही परियोजनाओं में काम पूरा करने का समय सितंबर 2027 में निर्धारित है।
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जिले में हर घर पानी पहुंचाने के लिए दो प्रमुख योजनाएं चल रही हैं। इनमें 213.59 करोड़ रुपये की सिलौटा मुस्तकिल और 303.32 करोड़ रुपये की चांदी बांगर योजनाएं शामिल हैं। इनका लक्ष्य क्रमशः 77 और 300 गांवों में पानी पहुंचाना है। शुरुआती दौर में काम शुरू हुआ, टंकियां बनीं, पाइप लाइनें बिछाई गईं। घरों में कनेक्शन भी लिए गए, पर नलों में पानी नहीं आया। मानिकपुर क्षेत्र के कई गांवों में पानी का संकट गहराने लगा है। हैंडपंप भी सूखने लगे हैं, जिससे समस्या बढ़ गई है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पेयजल संकट बरकरार है।
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ग्रामीणों की शिकायतें
समाजसेवी रामपाल त्रिपाठी ने बताया कि मानिकपुर क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाने का कार्य चार साल से अधूरा है। पानी की आपूर्ति नहीं हो रही और टंकियां शोपीस बनकर रह गई हैं। पहाड़ी क्षेत्र के बाबूपुर जैसे गांवों में टंकियां बनीं, पर आपूर्ति शुरू नहीं हुई। ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी शुरू होने पर भी पाइपलाइन से पानी नहीं मिल रहा है। शिवरामपुर कस्बे के निवासियों ने भी यही समस्या बताई।
जल निगम के अधिशाषी अभियंता आशीष कुमार भारती ने बताया कि गांवों में जलापूर्ति करने के लिए तेजी से कार्य किया जा रहा है। चयनित गांवों में पाइप लाइन बिछाने वाली कंपनियों के अधिकारियों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि दोनों ही परियोजनाओं में काम पूरा करने का समय सितंबर 2027 में निर्धारित है।

फोटो न-06 सीकेटीपी 10 चांदी बांगर गांव में बनी पानी टंकी। संवाद
