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Deoria News: आस्था पर मिलावट की चोट... व्रत का सामान भी नहीं रहा शुद्ध
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Wed, 25 Mar 2026 01:53 AM IST
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सिद्धार्थनगर। आस्था और शुद्धता के प्रतीक नवरात्र के बीच भी बाजार में मिलावट का खेल थमता नजर नहीं आ रहा। व्रत-पूजा के लिए खरीदे जा रहे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। 2025 में लिए गए नमूनों की रिपोर्ट बताती है कि हर पांच में एक नमूना फेल मिला। ऐसे में श्रद्धालुओं की थाली तक पहुंच रही चीजों की शुद्धता चिंता का विषय बन गई है।
नवरात्र के दौरान फलाहार, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, दूध, मिठाई और ड्राई फ्रूट्स की मांग अचानक बढ़ जाती है। इसी बढ़ती मांग का फायदा उठाकर मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग के 2025 के आंकड़े इस आशंका को और मजबूत करते हैं। विभाग ने 2025 में सालभर में कुल 299 नमूने जांच के लिए लिए, जिनमें से 129 नमूने फेल पाए गए। यानी करीब 43 फीसदी खाद्य पदार्थ तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसमें 51 नमूने सबस्टैंडर्ड, 17 असुरक्षित और 61 मिस ब्रांड श्रेणी में पाए गए। यह स्थिति बताती है कि बाजार में बिक रहे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
जानकार बताते हैं कि नवरात्र के समय खासतौर पर व्रत में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों की जांच जरूरी मानी जाती है, क्योंकि लोग इन्हें शुद्ध मानकर बिना ज्यादा जांचे-परखे खरीद लेते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि कुट्टू और सिंघाड़े के आटे में मिलावट, नकली घी, मिलावटी दूध और रंग मिलाए गए मिठाई जैसे मामले हर साल सामने आते हैं।
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें नवरात्र को देखते हुए विशेष अभियान भी चलाती हैं। दुकानों और गोदामों पर छापेमारी कर नमूने लिए जाते हैं और गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई भी होती है। बावजूद इसके, बाजार में मिलावटी सामान की मौजूदगी यह सवाल खड़ा करती है कि कार्रवाई का असर कितना प्रभावी है। स्थानीय व्यापारी संतोष का कहना है कि त्योहारों के समय मांग बढ़ने से सप्लाई पर दबाव आता है, जिसका फायदा कुछ असामाजिक तत्व उठाते हैं। वहीं उपभोक्ता भी सस्ते और आकर्षक दिखने वाले उत्पादों की ओर जल्दी आकर्षित हो जाते हैं, जिससे जोखिम बढ़ जाता है।
फिजीशियन डॉ. गौरव दुबे के मुताबिक, व्रत के दौरान लोग सीमित और खास प्रकार का भोजन करते हैं। ऐसे में अगर वही भोजन मिलावटी हो तो उसका असर शरीर पर ज्यादा गंभीर हो सकता है। पेट संबंधी दिक्कतों से लेकर फूड प्वाइजनिंग तक के मामले बढ़ सकते हैं।
नवरात्र को देखते हुए विभाग की टीमें लगातार बाजार में जांच कर रही हैं। मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। उपभोक्ताओं से अपील है कि वे केवल भरोसेमंद दुकानों से ही खाद्य पदार्थ खरीदें और किसी भी संदिग्ध उत्पाद की सूचना तुरंत विभाग को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
- आरएल यादव, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा
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नवरात्र के दौरान फलाहार, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, दूध, मिठाई और ड्राई फ्रूट्स की मांग अचानक बढ़ जाती है। इसी बढ़ती मांग का फायदा उठाकर मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग के 2025 के आंकड़े इस आशंका को और मजबूत करते हैं। विभाग ने 2025 में सालभर में कुल 299 नमूने जांच के लिए लिए, जिनमें से 129 नमूने फेल पाए गए। यानी करीब 43 फीसदी खाद्य पदार्थ तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसमें 51 नमूने सबस्टैंडर्ड, 17 असुरक्षित और 61 मिस ब्रांड श्रेणी में पाए गए। यह स्थिति बताती है कि बाजार में बिक रहे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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जानकार बताते हैं कि नवरात्र के समय खासतौर पर व्रत में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों की जांच जरूरी मानी जाती है, क्योंकि लोग इन्हें शुद्ध मानकर बिना ज्यादा जांचे-परखे खरीद लेते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि कुट्टू और सिंघाड़े के आटे में मिलावट, नकली घी, मिलावटी दूध और रंग मिलाए गए मिठाई जैसे मामले हर साल सामने आते हैं।
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें नवरात्र को देखते हुए विशेष अभियान भी चलाती हैं। दुकानों और गोदामों पर छापेमारी कर नमूने लिए जाते हैं और गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई भी होती है। बावजूद इसके, बाजार में मिलावटी सामान की मौजूदगी यह सवाल खड़ा करती है कि कार्रवाई का असर कितना प्रभावी है। स्थानीय व्यापारी संतोष का कहना है कि त्योहारों के समय मांग बढ़ने से सप्लाई पर दबाव आता है, जिसका फायदा कुछ असामाजिक तत्व उठाते हैं। वहीं उपभोक्ता भी सस्ते और आकर्षक दिखने वाले उत्पादों की ओर जल्दी आकर्षित हो जाते हैं, जिससे जोखिम बढ़ जाता है।
फिजीशियन डॉ. गौरव दुबे के मुताबिक, व्रत के दौरान लोग सीमित और खास प्रकार का भोजन करते हैं। ऐसे में अगर वही भोजन मिलावटी हो तो उसका असर शरीर पर ज्यादा गंभीर हो सकता है। पेट संबंधी दिक्कतों से लेकर फूड प्वाइजनिंग तक के मामले बढ़ सकते हैं।
नवरात्र को देखते हुए विभाग की टीमें लगातार बाजार में जांच कर रही हैं। मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। उपभोक्ताओं से अपील है कि वे केवल भरोसेमंद दुकानों से ही खाद्य पदार्थ खरीदें और किसी भी संदिग्ध उत्पाद की सूचना तुरंत विभाग को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
- आरएल यादव, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा