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Deoria News: यूजीसी बिल के विरोध में सड़क पर उतरे अधिवक्ता
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Wed, 28 Jan 2026 12:30 AM IST
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रुद्रपुर। यूजीसी संशोधन अधिनियम को लेकर सोशल मीडिया पर मचा संग्राम अब सड़क पर भी दिखने लगा है। इस बिल को लेकर सवर्ण समाज में नाराजगी है। मंगलवार को रुद्रपुर तहसील के सवर्ण अधिवक्ताओं ने यूजीसी संशोधित बिल का जोरदार विरोध किया। उन्होंने इस बिल के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। अधिवक्ताओं ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम हरिशंकर लाल को सौंपकर बिल को वापस लेने की मांग की।
अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष बृज बिहारी पांडेय, कृष्णमूर्ति त्रिपाठी, हिमांशु त्रिपाठी, सौरभ गुप्ता, रामेश्वर मणि त्रिपाठी, शैलेंद्र पांडेय, पंकज शुक्ला, शेरु तिवारी, सत्य प्रकाश सिंह, राजेश मणि, आनंद सिंह, अभिषेक सिंह आदि ने कहा कि यूजीसी बिल समाज में विघटन पैदा करने वाला बिल है। इसमें संशोधन से शिक्षण संस्थानों में एक वर्ग विशेष के छात्रों का शोषण किया जाएगा। यह बिल स्वर्ण छात्रों के करियर को समाप्त करने वाला बिल है। ऐसे काले कानून से न केवल विश्वविद्यालय और महाविद्यालय का माहौल दूषित होगा, बल्कि समाज में वर्ग संघर्ष का खतरा बनेगा। बिल में उच्च वर्ग के छात्र-छात्राओं को दूषित मानसिकता के तहत अपराधी मान लिया गया है। यूजीसी संशोधन बिल पर सत्ता पक्ष एवं विपक्ष एक साथ मौन हो गया है। अधिवक्ताओं ने शिक्षण संस्थानों के लिए बनाए गए काले कानून को केंद्र सरकार से वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि बिल वापस नहीं होता है तो व्यापक आंदोलन होगा। उन्होंने सरकार से जनहित में यूजीसी में किए गए हालिया संशोधनों को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने, सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित एवं न्याय संगत नीति बनाने, शिक्षा व्यवस्था में योग्यता और प्रतिभा को प्राथमिकता देने तथा भविष्य में किसी भी संशोधन के पूर्व सभी वर्गों के प्रतिनिधियों एवं विशेषज्ञों से परामर्श करने की मांग की। इस बाबत एसडीएम हरिशंकर लाल ने कहा कि अधिवक्ताओं के मांग पत्र को उचित माध्यम से शासन को भेजा जा रहा है।
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अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष बृज बिहारी पांडेय, कृष्णमूर्ति त्रिपाठी, हिमांशु त्रिपाठी, सौरभ गुप्ता, रामेश्वर मणि त्रिपाठी, शैलेंद्र पांडेय, पंकज शुक्ला, शेरु तिवारी, सत्य प्रकाश सिंह, राजेश मणि, आनंद सिंह, अभिषेक सिंह आदि ने कहा कि यूजीसी बिल समाज में विघटन पैदा करने वाला बिल है। इसमें संशोधन से शिक्षण संस्थानों में एक वर्ग विशेष के छात्रों का शोषण किया जाएगा। यह बिल स्वर्ण छात्रों के करियर को समाप्त करने वाला बिल है। ऐसे काले कानून से न केवल विश्वविद्यालय और महाविद्यालय का माहौल दूषित होगा, बल्कि समाज में वर्ग संघर्ष का खतरा बनेगा। बिल में उच्च वर्ग के छात्र-छात्राओं को दूषित मानसिकता के तहत अपराधी मान लिया गया है। यूजीसी संशोधन बिल पर सत्ता पक्ष एवं विपक्ष एक साथ मौन हो गया है। अधिवक्ताओं ने शिक्षण संस्थानों के लिए बनाए गए काले कानून को केंद्र सरकार से वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि बिल वापस नहीं होता है तो व्यापक आंदोलन होगा। उन्होंने सरकार से जनहित में यूजीसी में किए गए हालिया संशोधनों को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने, सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित एवं न्याय संगत नीति बनाने, शिक्षा व्यवस्था में योग्यता और प्रतिभा को प्राथमिकता देने तथा भविष्य में किसी भी संशोधन के पूर्व सभी वर्गों के प्रतिनिधियों एवं विशेषज्ञों से परामर्श करने की मांग की। इस बाबत एसडीएम हरिशंकर लाल ने कहा कि अधिवक्ताओं के मांग पत्र को उचित माध्यम से शासन को भेजा जा रहा है।
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