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Deoria News: छुट्टी के दिन भी बंटे सिलिंडर, फिर भी 12 हजार का बैकलॉग
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देवरिया। रसोई गैस सिलिंडरों की किल्लत अभी भी पूरी तरह दूर नहीं हो सकी है। स्थिति यह है कि गैस एजेंसियों को छुट्टी के दिन भी सिलिंडर का वितरण करना पड़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद करीब 12 हजार से अधिक उपभोक्ताओं की बुकिंग लंबित है। मांग और आपूर्ति के बीच अंतर के कारण उपभोक्ताओं को गैस सिलिंडर के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है।
जिले में इस समय कुल 78 गैस एजेंसियां संचालित हैं, जिन पर करीब पौने आठ लाख घरेलू उपभोक्ता पंजीकृत हैं। इसके अलावा 1856 उपभोक्ता काॅमर्शियल हैं। बीते कुछ दिनों से अचानक मांग बढ़ने के कारण एजेंसियों पर दबाव काफी बढ़ गया है। हालात ऐसे हैं कि एजेंसियां अभी 10 मार्च से पहले बुक कराए गए सिलिंडरों का ही वितरण कर पा रही हैं। इसके बाद की बुकिंग वाले उपभोक्ताओं को अपनी बारी आने का इंतजार करना पड़ रहा है।
गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि आपूर्ति सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। छुट्टी के दिन भी एजेंसियां खोलकर सिलिंडर बांटे जा रहे हैं, ताकि लंबित बुकिंग को जल्द से जल्द कम किया जा सके। इसके बावजूद मांग इतनी अधिक है कि बैकलॉग पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रहा है।
शहरी क्षेत्र में होम डिलीवरी से स्थिति सुधरी : शहरी क्षेत्र में स्थिति को कुछ हद तक होम डिलिवरी व्यवस्था ने संभाला है। गैस एजेंसियां लगातार घर-घर सिलिंडर पहुंचाने का काम कर रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं को एजेंसी तक आने की जरूरत नहीं पड़ रही है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी कई जगह उपभोक्ताओं को सिलिंडर लेने के लिए एजेंसी या वितरण केंद्र तक जाना पड़ रहा है।
शहर से लेकर गांव तक लोग विकल्प की करने लगे हैं तलाश : लगातार हो रही देरी के कारण शहर से लेकर गांव तक लोग रसोई गैस के विकल्प तलाशे जाने लगे हैं। कई छोटे दुकानदारों ने सिलिंडर खत्म होने के बाद अस्थायी तौर पर कोयले के चूल्हे का सहारा लेना शुरू कर दिया है।
चाय-नाश्ते की दुकानों और ढाबों पर भी लकड़ी या कोयले के चूल्हे फिर से जलने लगे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो कई घरों में भी लोग मजबूरी में चूल्हा जलाने लगे हैं। महिलाओं का कहना है कि गैस सिलिंडर समय पर नहीं मिलने से खाना बनाने में काफी दिक्कत हो रही है। ऐसे में कई परिवारों को लकड़ी या अन्य पारंपरिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
देसही देवरिया प्रतिनिधि के अनुसार, सोमवार को किसी भी गैस एजेंसी पर सिलिंडर का वितरण नहीं हुआ। उपभोक्ता रात से ही सिलिंडर लेकर कतार में खड़े रहे। संवाद
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जिले में इस समय कुल 78 गैस एजेंसियां संचालित हैं, जिन पर करीब पौने आठ लाख घरेलू उपभोक्ता पंजीकृत हैं। इसके अलावा 1856 उपभोक्ता काॅमर्शियल हैं। बीते कुछ दिनों से अचानक मांग बढ़ने के कारण एजेंसियों पर दबाव काफी बढ़ गया है। हालात ऐसे हैं कि एजेंसियां अभी 10 मार्च से पहले बुक कराए गए सिलिंडरों का ही वितरण कर पा रही हैं। इसके बाद की बुकिंग वाले उपभोक्ताओं को अपनी बारी आने का इंतजार करना पड़ रहा है।
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गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि आपूर्ति सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। छुट्टी के दिन भी एजेंसियां खोलकर सिलिंडर बांटे जा रहे हैं, ताकि लंबित बुकिंग को जल्द से जल्द कम किया जा सके। इसके बावजूद मांग इतनी अधिक है कि बैकलॉग पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रहा है।
शहरी क्षेत्र में होम डिलीवरी से स्थिति सुधरी : शहरी क्षेत्र में स्थिति को कुछ हद तक होम डिलिवरी व्यवस्था ने संभाला है। गैस एजेंसियां लगातार घर-घर सिलिंडर पहुंचाने का काम कर रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं को एजेंसी तक आने की जरूरत नहीं पड़ रही है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी कई जगह उपभोक्ताओं को सिलिंडर लेने के लिए एजेंसी या वितरण केंद्र तक जाना पड़ रहा है।
शहर से लेकर गांव तक लोग विकल्प की करने लगे हैं तलाश : लगातार हो रही देरी के कारण शहर से लेकर गांव तक लोग रसोई गैस के विकल्प तलाशे जाने लगे हैं। कई छोटे दुकानदारों ने सिलिंडर खत्म होने के बाद अस्थायी तौर पर कोयले के चूल्हे का सहारा लेना शुरू कर दिया है।
चाय-नाश्ते की दुकानों और ढाबों पर भी लकड़ी या कोयले के चूल्हे फिर से जलने लगे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो कई घरों में भी लोग मजबूरी में चूल्हा जलाने लगे हैं। महिलाओं का कहना है कि गैस सिलिंडर समय पर नहीं मिलने से खाना बनाने में काफी दिक्कत हो रही है। ऐसे में कई परिवारों को लकड़ी या अन्य पारंपरिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
देसही देवरिया प्रतिनिधि के अनुसार, सोमवार को किसी भी गैस एजेंसी पर सिलिंडर का वितरण नहीं हुआ। उपभोक्ता रात से ही सिलिंडर लेकर कतार में खड़े रहे। संवाद