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Deoria News: अहिल्या उद्धार प्रसंग का किया वर्णन
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 26 Mar 2026 11:36 PM IST
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पथरा। क्षेत्र के गौरी पाठक गांव में श्रीराम जानकी मंदिर पर चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम कथा के छठे दिन बृहस्पतिवार को श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए। कथावाचक रामकुमार दास ने भगवान श्रीराम के वनवास और अहिल्या उद्धार प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण के लिए क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कथावाचक ने कहा कि माता कैकेयी की प्रतिज्ञा को पूर्ण करने के लिए भगवान श्रीराम को 14 वर्षों का वनवास स्वीकार करना पड़ा। श्रीराम ने पिता दशरथ की आज्ञा और मर्यादा का पालन करते हुए बिना किसी विरोध के वनवास जाना स्वीकार किया। उनके साथ छोटे भाई लक्ष्मण और पत्नी माता सीता भी वन को प्रस्थान कर गए।
कथा के अनुसार गौतम ऋषि की पत्नी माता अहिल्या को देवराज इंद्र ने छलपूर्वक भ्रमित कर दिया था। जब इस घटना का पता गौतम ऋषि को चला तो उन्होंने क्रोधित होकर अहिल्या को पत्थर बनने का श्राप दे दिया।
वर्षों तक वह पत्थर रूप में तपस्या करती रहीं और भगवान श्रीराम के आगमन की प्रतीक्षा करती रहीं, जब भगवान श्रीराम चित्रकूट पहुंचे और उनके चरणों का स्पर्श उस पत्थर से हुआ तो माता अहिल्या को श्राप से मुक्ति मिली और उनका उद्धार हो गया।
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कथावाचक ने कहा कि माता कैकेयी की प्रतिज्ञा को पूर्ण करने के लिए भगवान श्रीराम को 14 वर्षों का वनवास स्वीकार करना पड़ा। श्रीराम ने पिता दशरथ की आज्ञा और मर्यादा का पालन करते हुए बिना किसी विरोध के वनवास जाना स्वीकार किया। उनके साथ छोटे भाई लक्ष्मण और पत्नी माता सीता भी वन को प्रस्थान कर गए।
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कथा के अनुसार गौतम ऋषि की पत्नी माता अहिल्या को देवराज इंद्र ने छलपूर्वक भ्रमित कर दिया था। जब इस घटना का पता गौतम ऋषि को चला तो उन्होंने क्रोधित होकर अहिल्या को पत्थर बनने का श्राप दे दिया।
वर्षों तक वह पत्थर रूप में तपस्या करती रहीं और भगवान श्रीराम के आगमन की प्रतीक्षा करती रहीं, जब भगवान श्रीराम चित्रकूट पहुंचे और उनके चरणों का स्पर्श उस पत्थर से हुआ तो माता अहिल्या को श्राप से मुक्ति मिली और उनका उद्धार हो गया।