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Deoria News: नाबालिगों ने स्वेच्छा से दिया था ब्लड बैंक में खून, प्राथमिकी दर्ज
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देवरिया। सोनूघाट स्थित एक ब्लड बैंक में नाबालिगों से जबरन खून निकालने के आरोपों की जांच में पुलिस को अलग ही तथ्य मिले हैं। जांच में सामने आया है कि नाबालिग लड़के स्वेच्छा से ब्लड डोनेट करने पहुंचे थे। हालांकि नाबालिगों से रक्तदान कराए जाने के मामले में ब्लड बैंक कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
कुछ दिन पहले एक महिला ने आरोप लगाया था कि ब्लड बैंक में नाबालिगों से जबरदस्ती खून निकाला जा रहा है। उसके बेटे का भी मोहल्ले के कुछ नशेड़ियों ने जबरन खून निकलवाया है। मामला एसपी तक पहुंचा तो उन्होंने जांच कर कार्रवाई का निर्देश दिया। इसके बाद बीते शुक्रवार को कोतवाली पुलिस ने इस ब्लड बैंक पर छापा मारकर जांच शुरू की थी।
सीओ सदर संजय कुमार रेड्डी ने बताया कि जांच के दौरान संबंधित लोगों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की भी पड़ताल की गई। जांच में पता चला कि कुछ दिन पहले लड़कों के दो गुटों के बीच मारपीट हुई थी, जिसके संबंध में प्राथमिकी भी दर्ज है। इसी विवाद के बाद एक पक्ष की ओर से यह आरोप लगाया गया कि ब्लड बैंक में जबरदस्ती खून निकालने का धंधा चल रहा है।
बताया कि जांच में यह भी सामने आया कि जिन नाबालिगों के ब्लड डोनेशन की बात कही जा रही थी, वे खुद ही रक्तदान करने के लिए ब्लड बैंक पहुंचे थे। हालांकि नियमानुसार 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्तियों से रक्तदान नहीं कराया जा सकता है। ऐसे में नाबालिगों से रक्तदान कराए जाने को लेकर ब्लड बैंक के कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले में आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को भी पत्र भेजा जा रहा है।
कहा कि पुलिस ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को पत्र लिखकर जिले के सभी ब्लड बैंकों और ब्लड बैंकों में सीसीटीवी कैमरे लगवाने का सुझाव दिया है। इसके अलावा यह भी सुझाव दिया गया है कि ऐसे सख्त नियम बनाए जाएं, जिससे नाबालिग बच्चों का रक्तदान किसी भी स्थिति में न हो सके।
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कुछ दिन पहले एक महिला ने आरोप लगाया था कि ब्लड बैंक में नाबालिगों से जबरदस्ती खून निकाला जा रहा है। उसके बेटे का भी मोहल्ले के कुछ नशेड़ियों ने जबरन खून निकलवाया है। मामला एसपी तक पहुंचा तो उन्होंने जांच कर कार्रवाई का निर्देश दिया। इसके बाद बीते शुक्रवार को कोतवाली पुलिस ने इस ब्लड बैंक पर छापा मारकर जांच शुरू की थी।
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सीओ सदर संजय कुमार रेड्डी ने बताया कि जांच के दौरान संबंधित लोगों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की भी पड़ताल की गई। जांच में पता चला कि कुछ दिन पहले लड़कों के दो गुटों के बीच मारपीट हुई थी, जिसके संबंध में प्राथमिकी भी दर्ज है। इसी विवाद के बाद एक पक्ष की ओर से यह आरोप लगाया गया कि ब्लड बैंक में जबरदस्ती खून निकालने का धंधा चल रहा है।
बताया कि जांच में यह भी सामने आया कि जिन नाबालिगों के ब्लड डोनेशन की बात कही जा रही थी, वे खुद ही रक्तदान करने के लिए ब्लड बैंक पहुंचे थे। हालांकि नियमानुसार 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्तियों से रक्तदान नहीं कराया जा सकता है। ऐसे में नाबालिगों से रक्तदान कराए जाने को लेकर ब्लड बैंक के कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले में आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को भी पत्र भेजा जा रहा है।
कहा कि पुलिस ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को पत्र लिखकर जिले के सभी ब्लड बैंकों और ब्लड बैंकों में सीसीटीवी कैमरे लगवाने का सुझाव दिया है। इसके अलावा यह भी सुझाव दिया गया है कि ऐसे सख्त नियम बनाए जाएं, जिससे नाबालिग बच्चों का रक्तदान किसी भी स्थिति में न हो सके।