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Deoria News: बीआरसी तक ही पहुंचीं पुस्तकें, वहां से हेडमास्टर ले जा रहे अपने साधन से
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- इस बार सत्र के पहले ही दिन एक अप्रैल को ही सभी स्कूलों में किताबें बांटने का था लक्ष्य
- बीआरसी से स्कूल तक किताबें पहुंचाने के लिए हुआ था टेंडर
- अभी आधी अधूरी पुस्तकें ही पहुंची हैं स्कूलों में
देवरिया। सरकारी प्राइमरी स्कूलों को निजी स्कूलों के मुकाबले खड़ा करने की कवायद कागजी ही ज्यादे है। निजी स्कूलों में जहां नामांकन के साथ ही नई किताबें मिल रही हैं, वहीं परिषदीय स्कूलों में अभी किताबें बीआरसी तक ही पहुंचीं हैं। वहां से हेडमास्टर अपने संसाधन से किताब मंगवा रहे हैं। वह भी पूरी नहीं आई है। जब शुरूआत ही ऐसी है तो बाकी सत्र में क्या होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
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बीआरसी से हेड मास्टरों को खुद जाकर लानी पड़ रही किताबें
तरकुलवा। विद्यार्थियों को सत्र के पहले दिन से किताबें उपलब्ध कराने की घोषणा पूरी तरह से जमीन पर नहीं उतर पाई। हेडमास्टरों को बीआरसी से किताबें जाकर लानी पड़ रही है। शिक्षकों ने बताया कि बीआरसी पर 27 मार्च तक किताबें पहुंच गईं थीं, लेकिन वहां से स्कूलों तक किताबें पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है। कंपोजिट विद्यालय हरैया के प्रधानाध्यापक द्वारिका कुशवाहा ने बताया कि विद्यालय में कक्षा एक से आठ तक कुल 81 बच्चे पंजीकृत हैं। किताबें वे बीआरसी से खुद जाकर ले आए।
प्राथमिक विद्यालय सबवट, कैथवलिया के प्रधानाध्यापक अमरनाथ पांडेय और प्राथमिक विद्यालय सोहनरिया के प्रधानाध्यापक प्रेम प्रकाश कुशवाहा ने बताया कि किताबें खुद के संसाधन से मंगाकर बंटवाई गई हैं। अभी कार्य पुस्तिका समेत कुछ पुस्तकें बाकी हैं।
बीईओ विजय कुमार ओझा ने बताया कि ठेकेदार की लापरवाही से कुछ नई किताबें आनी शेष हैं। उन्हें भी जल्द मंगवा कर स्कूलों में भेज दिया जाएगा।
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हफ्ते भर बाद भी छात्रों को नहीं मिली कई प्रमुख विषयों की किताबें
बनकटा। नया शैक्षिक सत्र शुरू हुए एक हफ्ता बीत जाने के बावजूद क्षेत्र के प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में सभी पाठ्य पुस्तकें नहीं पहुंच पाई हैं। ऐसे में छात्रों की कई प्रमुख विषयों की शुरुआत भी अभी नहीं हो सकी है।
छेरिहा गांव स्थित कंपोजिट विद्यालय में अभी केवल कक्षा एक और दो में ही सभी पुस्तकें बंट पाई हैं। अन्य कक्षाओं में कुछ विषयों की पुस्तकें बंटी हैं और कुछ का अभी इंतजार है। बीआरसी से पुस्तकें मंगानी पड़ी हैं। यहां कक्षा के तीन के छात्रों को हिंदी, चार में गणित और हमारा परिवेश, पांच में हमारा परिवेश, छह में गणित और अंग्रेजी, सात में हिंदी और गणित और कक्षा आठ में हिंदी और गणित की पुस्तकें नहीं मिली है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक रामनाथ ने बताया कि शेष पुस्तकें बीआरसी से प्राप्त होते ही छात्रों को वितरित कर दी जाएगी। बंजरिया गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में कुल छात्र संख्या 58 है। यहां भी वर्ग एक और दो के छात्रों को सभी पुस्तकें मिली हैं जबकि तीन चार और पांच के छात्रों को कई विषयों की किताबें नहीं मिल पाई हैं। इस संबंध में बीइओ संजीव कुमार सिंह ने बताया कि कुछ विषयों की किताबें प्राप्त नहीं हुई हैं। एक से दो दिन में अवशेष पुस्तक बीआरसी पर आ जाएगी, उसके बाद शीघ्र ही विद्यालयों को वितरित करा दिया जाएगा।
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कंपोजिट विद्यालय सुंदरपार में भी पूरी किताबें नहीं मिलीं
रामपुर बुजुर्ग। विकासखंड बनकटा के सुंदरपार स्थित कंपोजिट विद्यालय में सत्र शुरू होने के बाद भी छात्रों को पूरी पाठ्यपुस्तकें नहीं मिल सकी हैं। अलग-अलग कक्षाओं में नामांकन के सापेक्ष पुस्तकों की भारी कमी देखी जा रही है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
जानकारी के अनुसार कक्षा एक में 8 नामांकन है, लेकिन एक भी पुस्तक उपलब्ध नहीं है। कक्षा 2 में 5 नामांकन के सापेक्ष केवल हिंदी की पुस्तक मिली है। कक्षा 3 में 9 नामांकन के सापेक्ष आठ सेट पुस्तक मिली, जिसमें सिर्फ हिंदी, गणित और पर्यावरण की किताबें हैं। कक्षा 4 में 17 नामांकन के सापेक्ष केवल 11 बच्चों के लिए हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत की पुस्तकें मिली हैं। कक्षा 5 में 6 नामांकन के सापेक्ष सिर्फ 4 बच्चों के लिए हिंदी, अंग्रेजी, गणित और संस्कृत की पुस्तक उपलब्ध है। कक्षा 6 में 6 नामांकन है, जिसमें सभी बच्चों को हिंदी, संस्कृत और कृषि की पुस्तक दी गई है। कक्षा 7 में 27 नामांकन होने के बावजूद एक भी पुस्तक उपलब्ध नहीं है। वहीं कक्षा 8 में 17 छात्रों के नामांकन के सापेक्ष सभी बच्चों को 12 पुस्तकों के स्थान पर केवल संस्कृत, अंग्रेजी, इतिहास, हिंदी, स्काउट गाइड, भूगोल और गृह विज्ञान की ही पुस्तकें मिली हैं। खंड शिक्षा अधिकारी संजीव कुमार सिंह ने बताया कि शेष पुस्तकें भी दो दिनों में आ जाएंगी। शीघ्र ही वितरित करा दिया जाएगा।
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आधे से अधिक विद्यालयों में नहीं पहुंची पुस्तकें
भाटपार रानी। विकासखंड अंतर्गत कुल 123 परिषदीय विद्यालयों और 8 सहायता प्राप्त व 1 समाज कल्याण विभाग के परिषदीय विद्यालयों में अभी तक आधे से अधिक विद्यालयों में पुस्तकें नहीं पहुंच सकी है। न्याय पंचायत कोड़रा, बेलपार पंडित, खामपार और टीकमपार अंतर्गत परिषदीय विद्यालयों में किताबें नहीं पहुंची है। सहायता प्राप्त किसी परिषदीय विद्यालयों में अभी पुस्तकें नहीं पहुंची हैं। खंड शिक्षा अधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि एक सप्ताह के अंदर सभी विद्यालयों में सभी विषयों की पुस्तक उपलब्ध करा दी जाएंगी।
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भटनी। नए शैक्षिक सत्र के छह दिन बीत जाने के बाद भी परिषदीय विद्यालयों में अब तक सभी कक्षाओं की नई किताबें नहीं पहुंच सकी हैं। अधिकारियों ने दो दिनों में बीआरसी पर किताबें पहुंचने की बात कही है। इसके बाद स्कूलों में वितरण होगा। शिक्षकों को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत पुराने पुस्तकों और ब्लैकबोर्ड के सहारे पढ़ाई करानी पड़ रही है। खंड शिक्षा अधिकारी राम प्यारे राम ने बताया कि जल्द ही सभी विद्यालयों में किताबें पहुंचा दी जाएंगी।
सभी स्कूलों तक पुस्तकें पहुंचाने का टेंडर हुआ है। अभी तक अगर स्कूलों में पुस्तक नहीं पहुंच पाई है तो इस विलंब के कारणों की समीक्षा होगी। किताब पहुंचाने और वितरण में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
अनिल कुमार सिंह, बीएसए
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- बीआरसी से स्कूल तक किताबें पहुंचाने के लिए हुआ था टेंडर
- अभी आधी अधूरी पुस्तकें ही पहुंची हैं स्कूलों में
देवरिया। सरकारी प्राइमरी स्कूलों को निजी स्कूलों के मुकाबले खड़ा करने की कवायद कागजी ही ज्यादे है। निजी स्कूलों में जहां नामांकन के साथ ही नई किताबें मिल रही हैं, वहीं परिषदीय स्कूलों में अभी किताबें बीआरसी तक ही पहुंचीं हैं। वहां से हेडमास्टर अपने संसाधन से किताब मंगवा रहे हैं। वह भी पूरी नहीं आई है। जब शुरूआत ही ऐसी है तो बाकी सत्र में क्या होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
बीआरसी से हेड मास्टरों को खुद जाकर लानी पड़ रही किताबें
तरकुलवा। विद्यार्थियों को सत्र के पहले दिन से किताबें उपलब्ध कराने की घोषणा पूरी तरह से जमीन पर नहीं उतर पाई। हेडमास्टरों को बीआरसी से किताबें जाकर लानी पड़ रही है। शिक्षकों ने बताया कि बीआरसी पर 27 मार्च तक किताबें पहुंच गईं थीं, लेकिन वहां से स्कूलों तक किताबें पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है। कंपोजिट विद्यालय हरैया के प्रधानाध्यापक द्वारिका कुशवाहा ने बताया कि विद्यालय में कक्षा एक से आठ तक कुल 81 बच्चे पंजीकृत हैं। किताबें वे बीआरसी से खुद जाकर ले आए।
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प्राथमिक विद्यालय सबवट, कैथवलिया के प्रधानाध्यापक अमरनाथ पांडेय और प्राथमिक विद्यालय सोहनरिया के प्रधानाध्यापक प्रेम प्रकाश कुशवाहा ने बताया कि किताबें खुद के संसाधन से मंगाकर बंटवाई गई हैं। अभी कार्य पुस्तिका समेत कुछ पुस्तकें बाकी हैं।
बीईओ विजय कुमार ओझा ने बताया कि ठेकेदार की लापरवाही से कुछ नई किताबें आनी शेष हैं। उन्हें भी जल्द मंगवा कर स्कूलों में भेज दिया जाएगा।
हफ्ते भर बाद भी छात्रों को नहीं मिली कई प्रमुख विषयों की किताबें
बनकटा। नया शैक्षिक सत्र शुरू हुए एक हफ्ता बीत जाने के बावजूद क्षेत्र के प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में सभी पाठ्य पुस्तकें नहीं पहुंच पाई हैं। ऐसे में छात्रों की कई प्रमुख विषयों की शुरुआत भी अभी नहीं हो सकी है।
छेरिहा गांव स्थित कंपोजिट विद्यालय में अभी केवल कक्षा एक और दो में ही सभी पुस्तकें बंट पाई हैं। अन्य कक्षाओं में कुछ विषयों की पुस्तकें बंटी हैं और कुछ का अभी इंतजार है। बीआरसी से पुस्तकें मंगानी पड़ी हैं। यहां कक्षा के तीन के छात्रों को हिंदी, चार में गणित और हमारा परिवेश, पांच में हमारा परिवेश, छह में गणित और अंग्रेजी, सात में हिंदी और गणित और कक्षा आठ में हिंदी और गणित की पुस्तकें नहीं मिली है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक रामनाथ ने बताया कि शेष पुस्तकें बीआरसी से प्राप्त होते ही छात्रों को वितरित कर दी जाएगी। बंजरिया गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में कुल छात्र संख्या 58 है। यहां भी वर्ग एक और दो के छात्रों को सभी पुस्तकें मिली हैं जबकि तीन चार और पांच के छात्रों को कई विषयों की किताबें नहीं मिल पाई हैं। इस संबंध में बीइओ संजीव कुमार सिंह ने बताया कि कुछ विषयों की किताबें प्राप्त नहीं हुई हैं। एक से दो दिन में अवशेष पुस्तक बीआरसी पर आ जाएगी, उसके बाद शीघ्र ही विद्यालयों को वितरित करा दिया जाएगा।
कंपोजिट विद्यालय सुंदरपार में भी पूरी किताबें नहीं मिलीं
रामपुर बुजुर्ग। विकासखंड बनकटा के सुंदरपार स्थित कंपोजिट विद्यालय में सत्र शुरू होने के बाद भी छात्रों को पूरी पाठ्यपुस्तकें नहीं मिल सकी हैं। अलग-अलग कक्षाओं में नामांकन के सापेक्ष पुस्तकों की भारी कमी देखी जा रही है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
जानकारी के अनुसार कक्षा एक में 8 नामांकन है, लेकिन एक भी पुस्तक उपलब्ध नहीं है। कक्षा 2 में 5 नामांकन के सापेक्ष केवल हिंदी की पुस्तक मिली है। कक्षा 3 में 9 नामांकन के सापेक्ष आठ सेट पुस्तक मिली, जिसमें सिर्फ हिंदी, गणित और पर्यावरण की किताबें हैं। कक्षा 4 में 17 नामांकन के सापेक्ष केवल 11 बच्चों के लिए हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत की पुस्तकें मिली हैं। कक्षा 5 में 6 नामांकन के सापेक्ष सिर्फ 4 बच्चों के लिए हिंदी, अंग्रेजी, गणित और संस्कृत की पुस्तक उपलब्ध है। कक्षा 6 में 6 नामांकन है, जिसमें सभी बच्चों को हिंदी, संस्कृत और कृषि की पुस्तक दी गई है। कक्षा 7 में 27 नामांकन होने के बावजूद एक भी पुस्तक उपलब्ध नहीं है। वहीं कक्षा 8 में 17 छात्रों के नामांकन के सापेक्ष सभी बच्चों को 12 पुस्तकों के स्थान पर केवल संस्कृत, अंग्रेजी, इतिहास, हिंदी, स्काउट गाइड, भूगोल और गृह विज्ञान की ही पुस्तकें मिली हैं। खंड शिक्षा अधिकारी संजीव कुमार सिंह ने बताया कि शेष पुस्तकें भी दो दिनों में आ जाएंगी। शीघ्र ही वितरित करा दिया जाएगा।
आधे से अधिक विद्यालयों में नहीं पहुंची पुस्तकें
भाटपार रानी। विकासखंड अंतर्गत कुल 123 परिषदीय विद्यालयों और 8 सहायता प्राप्त व 1 समाज कल्याण विभाग के परिषदीय विद्यालयों में अभी तक आधे से अधिक विद्यालयों में पुस्तकें नहीं पहुंच सकी है। न्याय पंचायत कोड़रा, बेलपार पंडित, खामपार और टीकमपार अंतर्गत परिषदीय विद्यालयों में किताबें नहीं पहुंची है। सहायता प्राप्त किसी परिषदीय विद्यालयों में अभी पुस्तकें नहीं पहुंची हैं। खंड शिक्षा अधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि एक सप्ताह के अंदर सभी विद्यालयों में सभी विषयों की पुस्तक उपलब्ध करा दी जाएंगी।
भटनी। नए शैक्षिक सत्र के छह दिन बीत जाने के बाद भी परिषदीय विद्यालयों में अब तक सभी कक्षाओं की नई किताबें नहीं पहुंच सकी हैं। अधिकारियों ने दो दिनों में बीआरसी पर किताबें पहुंचने की बात कही है। इसके बाद स्कूलों में वितरण होगा। शिक्षकों को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत पुराने पुस्तकों और ब्लैकबोर्ड के सहारे पढ़ाई करानी पड़ रही है। खंड शिक्षा अधिकारी राम प्यारे राम ने बताया कि जल्द ही सभी विद्यालयों में किताबें पहुंचा दी जाएंगी।
सभी स्कूलों तक पुस्तकें पहुंचाने का टेंडर हुआ है। अभी तक अगर स्कूलों में पुस्तक नहीं पहुंच पाई है तो इस विलंब के कारणों की समीक्षा होगी। किताब पहुंचाने और वितरण में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
अनिल कुमार सिंह, बीएसए