{"_id":"69d3fbfa6c5118a97c0bf92a","slug":"the-chaknali-dispute-had-been-going-on-for-four-years-had-it-been-resolved-in-time-the-lawyers-life-would-have-been-saved-deoria-news-c-208-1-sgkp1013-178790-2026-04-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Deoria News: चार से चल रहा था चकनाली का विवाद, समय से होता निस्तारित बच जाती अधिवक्ता की जान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Deoria News: चार से चल रहा था चकनाली का विवाद, समय से होता निस्तारित बच जाती अधिवक्ता की जान
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Tue, 07 Apr 2026 12:01 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
- सरयू घाट पर बिजेंद्र सिंह का हुआ अंतिम संस्कार, पुत्र सिद्धार्थ ने कहा- प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया
बरहज (देवरिया)। बरहज तहसील क्षेत्र के लक्ष्मीपुर गांव में चकनाली पर कराए जा रहे सड़क निर्माण को लेकर रविवार को हुए विवाद में अधिवक्ता बिजेंद्र सिंह की मौत हो गई। गांव के लोग चकनाली पर सड़क निर्माण के विवाद को चार वर्ष पुराना बता रहे हैं। अधिवक्ता के पुत्र सिद्धार्थ का कहना है कि समय से प्रशासन ने निस्तारण कराया होता तो, शायद इतना बड़ी घटना नहीं होती। लोगों ने बिजेंद्र के मौत का कारण प्रशासन की लापरवाही बताई है।
बता दें कि, सिद्धार्थ के मुताबिक, लक्ष्मीपुर गांव में ग्राम प्रधान राजेश यादव की ओर से चकनाली पर सड़क निर्माण कराया जा रहा था। चार वर्ष पूर्व अधिवक्ता बिजेंद्र ने तत्कालीन एसडीएम गजेंद्र सिंह से सड़क निर्माण को लेकर शिकायत की थी। इसके बाद कार्य रोक दिया गया था। बीते छह फरवरी को अधिवक्ता ने दोबारा चकनाली पर सड़क निर्माण कराए जाने की शिकायत की। जिस पर नौ फरवरी को नायब तहसीलदार रवींद्र मौर्य ने मौके पर पहुंच कर जांच की थी। इस दौरान सोशल मीडिया पर ‘दम है कितना दमन में तेरे देख लिया है, देखेंगे’ पोस्ट भी वायरल हुआ था। हालांकि, संवाद न्यूज एजेंसी वायरल पोस्ट की पुष्टि नहीं करता है। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया था।
-- -
ट्यूबेल के लिए बनी थी नाली, अब हो गई है बेकार
मृतक बिजेंद्र के पुत्र सिद्धार्थ ने बताया कि, गांव के दक्षिण पबारू यादव के खेत के समीप स्थित ट्यूबवेल नंबर 30 है, जिससे कभी 50 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई की जाती थी। ट्यूबवेल से लक्ष्मीपुर के अलावा कपरवार, बारा दीक्षित, खोरी, बढ़या हरदाे आदि गांवों के खेतों की सिंचाई के लिए चकनाली बनाया गया था, जो अभिलेखों में भी दर्ज है। आरोप है कि, सिंचाई के लिए बनाई गई अधिकांश चकनाली पर अतिक्रमण कर लिया गया है। आरोप है कि, ट्यूबवेल से पारसनाथ सिंह के खेत तक जाने वाली विवादित चकनाली का स्वरूप बदलकर सड़क बनाने की कोशिश हो रही थी। इसी को लेकर लंंबे समय से विवाद चला आ रहा है। चकनाली पर बनाए जा रहे सीसी सड़क का विरोध करना पिता बिजेंद्र की मौत का कारण बन गया।
-- -- -- -- -- -- --
बरहज तहसील में कार्य से विरत रहे अधिवक्ता
बरहज। तहसील परिसर में सोमवार को अधिवक्ताओं ने शोक सभा आयोजित की। अधिवक्ता बिजेंद्र सिंह के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर शोक व्यक्त किया, जबकि दिनभर कार्य से विरत रहे।
तहसील बार संघ अध्यक्ष चंद्रगुप्त यादव और महामंत्री अमरेश यादव के नेतृतव में वकील बिजेंद्र सिंह के निधन पर शोकसभा आयोजित की गई। वकीलों ने साथी बिजेंद्र की मौत को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। मौके पर पूर्व अध्यक्ष नागेंद्र सिंह, उदयराज चौरसिया, श्रवण सिंह, अम्बिकेश सिंह, चंद्रभान चौरसिया, सत्यप्रकाश मालवीय, लक्ष्मी दीक्षित, संतोष सिंह, रणजीत मिश्र आदि मौजूद रहे। संवाद
-- -- -- -- --
सरयू तट पर अधिवक्ता का हुआ अंतिम संस्कार
बरहज। तहसील बार संघ के पूर्व अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह की मौत से गांव में सन्नाटा है। सोमवार को सरयू नदी तट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। पोस्टमार्टम के बाद सोमवार भोर में अधिवक्ता का शव लक्ष्मीपुर गांव लाया गया। शव पहुंचते ही दरवाजे पर भीड़ उमड़ पड़ी। सुरक्षा इंतजाम को लेकर पुलिस बल भी तैनात किया गया था। सुबह करीब नौ बजे तहसील बार संघ के पूर्व अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह का शव नगर के कटइलवा मुक्तिपथ स्थित सरयू नदी तट पर ले जाया गया, जहां उनके बड़े पुत्र सिद्धार्थ सिंह ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में प्रशांत सिंह, एडवोकेट अम्बिकेश सिंह, प्रमोद मिश्र, निशिकांत दीक्षित, अभिषेक मिश्र आदि मौजूद रहे।
-- -- -- -- -
दो बार रह चुके हैं तहसील बार संघ के अध्यक्ष
बरहज। अधिवक्ता बिजेंद्र दो बार संघ के तहसील अध्यक्ष भी रह चुके थे। ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से वह चकनाली पर किए जा रहे सड़क निर्माण का विरोध कर रहे थे। बिजेंद्र सिंह की मौत को लोग दुर्भाग्यपूर्ण बता रहे हैं। वह दो बार तहसील बार संघ अध्यक्ष रह चुके हैं। लोगों के अनुसार, 1997 में गेंहू की फसल कटने और अनाज बेचकर उन्होंने तहसील बार संघ का रजिस्ट्रेशन कराया था। बताया जा रहा है कि वह डीएम के संपूर्ण समाधान दिवस पर तहसील की समस्याओं को जोरदार तरीके से उठाते थे। इस पर अधिकारी अमल भी करते थे। मार्च माह के दूसरे संपूर्ण समाधान दिवस में उन्होंने डीएम दिव्या मित्तल से तहसील परिसर की टूटी सड़कों को बनवाने की मांग की थी। इस पर डीएम ने जिम्मेदारों को हिदायत भी दी थी।
Trending Videos
बरहज (देवरिया)। बरहज तहसील क्षेत्र के लक्ष्मीपुर गांव में चकनाली पर कराए जा रहे सड़क निर्माण को लेकर रविवार को हुए विवाद में अधिवक्ता बिजेंद्र सिंह की मौत हो गई। गांव के लोग चकनाली पर सड़क निर्माण के विवाद को चार वर्ष पुराना बता रहे हैं। अधिवक्ता के पुत्र सिद्धार्थ का कहना है कि समय से प्रशासन ने निस्तारण कराया होता तो, शायद इतना बड़ी घटना नहीं होती। लोगों ने बिजेंद्र के मौत का कारण प्रशासन की लापरवाही बताई है।
बता दें कि, सिद्धार्थ के मुताबिक, लक्ष्मीपुर गांव में ग्राम प्रधान राजेश यादव की ओर से चकनाली पर सड़क निर्माण कराया जा रहा था। चार वर्ष पूर्व अधिवक्ता बिजेंद्र ने तत्कालीन एसडीएम गजेंद्र सिंह से सड़क निर्माण को लेकर शिकायत की थी। इसके बाद कार्य रोक दिया गया था। बीते छह फरवरी को अधिवक्ता ने दोबारा चकनाली पर सड़क निर्माण कराए जाने की शिकायत की। जिस पर नौ फरवरी को नायब तहसीलदार रवींद्र मौर्य ने मौके पर पहुंच कर जांच की थी। इस दौरान सोशल मीडिया पर ‘दम है कितना दमन में तेरे देख लिया है, देखेंगे’ पोस्ट भी वायरल हुआ था। हालांकि, संवाद न्यूज एजेंसी वायरल पोस्ट की पुष्टि नहीं करता है। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
ट्यूबेल के लिए बनी थी नाली, अब हो गई है बेकार
मृतक बिजेंद्र के पुत्र सिद्धार्थ ने बताया कि, गांव के दक्षिण पबारू यादव के खेत के समीप स्थित ट्यूबवेल नंबर 30 है, जिससे कभी 50 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई की जाती थी। ट्यूबवेल से लक्ष्मीपुर के अलावा कपरवार, बारा दीक्षित, खोरी, बढ़या हरदाे आदि गांवों के खेतों की सिंचाई के लिए चकनाली बनाया गया था, जो अभिलेखों में भी दर्ज है। आरोप है कि, सिंचाई के लिए बनाई गई अधिकांश चकनाली पर अतिक्रमण कर लिया गया है। आरोप है कि, ट्यूबवेल से पारसनाथ सिंह के खेत तक जाने वाली विवादित चकनाली का स्वरूप बदलकर सड़क बनाने की कोशिश हो रही थी। इसी को लेकर लंंबे समय से विवाद चला आ रहा है। चकनाली पर बनाए जा रहे सीसी सड़क का विरोध करना पिता बिजेंद्र की मौत का कारण बन गया।
बरहज तहसील में कार्य से विरत रहे अधिवक्ता
बरहज। तहसील परिसर में सोमवार को अधिवक्ताओं ने शोक सभा आयोजित की। अधिवक्ता बिजेंद्र सिंह के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर शोक व्यक्त किया, जबकि दिनभर कार्य से विरत रहे।
तहसील बार संघ अध्यक्ष चंद्रगुप्त यादव और महामंत्री अमरेश यादव के नेतृतव में वकील बिजेंद्र सिंह के निधन पर शोकसभा आयोजित की गई। वकीलों ने साथी बिजेंद्र की मौत को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। मौके पर पूर्व अध्यक्ष नागेंद्र सिंह, उदयराज चौरसिया, श्रवण सिंह, अम्बिकेश सिंह, चंद्रभान चौरसिया, सत्यप्रकाश मालवीय, लक्ष्मी दीक्षित, संतोष सिंह, रणजीत मिश्र आदि मौजूद रहे। संवाद
सरयू तट पर अधिवक्ता का हुआ अंतिम संस्कार
बरहज। तहसील बार संघ के पूर्व अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह की मौत से गांव में सन्नाटा है। सोमवार को सरयू नदी तट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। पोस्टमार्टम के बाद सोमवार भोर में अधिवक्ता का शव लक्ष्मीपुर गांव लाया गया। शव पहुंचते ही दरवाजे पर भीड़ उमड़ पड़ी। सुरक्षा इंतजाम को लेकर पुलिस बल भी तैनात किया गया था। सुबह करीब नौ बजे तहसील बार संघ के पूर्व अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह का शव नगर के कटइलवा मुक्तिपथ स्थित सरयू नदी तट पर ले जाया गया, जहां उनके बड़े पुत्र सिद्धार्थ सिंह ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में प्रशांत सिंह, एडवोकेट अम्बिकेश सिंह, प्रमोद मिश्र, निशिकांत दीक्षित, अभिषेक मिश्र आदि मौजूद रहे।
दो बार रह चुके हैं तहसील बार संघ के अध्यक्ष
बरहज। अधिवक्ता बिजेंद्र दो बार संघ के तहसील अध्यक्ष भी रह चुके थे। ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से वह चकनाली पर किए जा रहे सड़क निर्माण का विरोध कर रहे थे। बिजेंद्र सिंह की मौत को लोग दुर्भाग्यपूर्ण बता रहे हैं। वह दो बार तहसील बार संघ अध्यक्ष रह चुके हैं। लोगों के अनुसार, 1997 में गेंहू की फसल कटने और अनाज बेचकर उन्होंने तहसील बार संघ का रजिस्ट्रेशन कराया था। बताया जा रहा है कि वह डीएम के संपूर्ण समाधान दिवस पर तहसील की समस्याओं को जोरदार तरीके से उठाते थे। इस पर अधिकारी अमल भी करते थे। मार्च माह के दूसरे संपूर्ण समाधान दिवस में उन्होंने डीएम दिव्या मित्तल से तहसील परिसर की टूटी सड़कों को बनवाने की मांग की थी। इस पर डीएम ने जिम्मेदारों को हिदायत भी दी थी।