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Deoria News: क्रॉसिंग पर हरी झंडी के लिए गेटमैन साथ लिए दौड़ती है ट्रेन
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Tue, 26 May 2026 01:04 AM IST
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- चकरा ढाले पर नहीं रहता कोई कर्मचारी, ट्रेन से उतरकर गेटमैन बंद करता है फाटक, क्रॉसिंग पार कर गेटमैन के लिए रुकती है ट्रेन
- बरहज से सलेमपुर के बीच पैसेंजर ट्रेन के लिए रेलवे में अलग नियम
देवरिया। सलेमपुर से बरहज के बीच चलने वाली पैसेंजर ट्रेन के लिए पूर्वोत्तर रेलवे में आज भी वन ट्रेन सिस्टम लागू है। यह कि यह ट्रेन जब ऑन रूट होती है तो उस लाइन पर दूसरी ट्रेन नहीं चलती। इतना ही नहीं, इस ट्रेन में लोको पायलट और गार्ड के अलावा एक और खास शख्स होता है मोबाइल गेटमैन। ट्रेन रूट पर पड़ने वाली क्रॉसिंग (ढाला) के पास रुकती है, वहां गेटमैन उतरता है और ढाला बंद करने व खोलने की जिम्मदारी के बाद उसी ट्रेन में सवार होकर रवाना हो जाता है।
पुराने जमाने में देवरिया जिले का बरहज कस्बा काफी संपन्न था। सरयू नदी के किनारे बसे इस कस्बे से नाव के जरिये व्यापार होता था। ब्रिटिश काल में सलेमपुर से बरहज के बीच करीब 25 किमी लंबी रेल लाइन माल ढुलाई के लिए बिछाई गई थी। बाद में यह इस इलाके के आवागमन का प्रमुख साधन बन गई। आज यह बड़ी लाइन बन चुकी है और इसका विद्युतीकरण भी हो चुका है। इसके बावजूद इस रूट पर ट्रेनों का संचालन पुराने तरीके से ही होता है।
सलेमपुर से बरहज रूट पर चकरा ढाले पर किसी स्थाई गेटमैन और अन्य कर्मचारी की तैनाती नहीं है। पैसेंटजर ट्रेन यहां पहुंचकर रुक जाती है। ट्रेन से एक गेटमैन हरी और लाल झंडी लेकर उतरता है और क्रॉसिंग का गेट बंद करता है। इसके बाद वह हरी झंडी हिलाता है तो आठ डिब्बे की यह ट्रेन ढाले को पार करती है और फिर रुक जाती है। गेटमैन दोनों तरफ के गेट खोलने के बाद ट्रेन में सवार हो जाता है और ट्रेन फिर चल पड़ती है।
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ट्रेन आते ही लाइन के किनारे खड़े हो जाते हैं लोग
क्षेत्र के चकरा गोसाईं, बरठी बाबू, कसिली, कैलानी, बरठी चौराहा, परसिया चंदौर, चेरो सहित आसपास के 10 से अधिक गांवों के लोग सलेमपुर और बरहज जाने के लिए ट्रेन आने के समय चकरा ढाले के पास आकर रेलवे लाइन के किनारे खड़े हो जाते हैं। जैसे ही ट्रेन क्रॉसिंग बंद होने के लिए थमती है, रेल लाइन के किनारे खड़े लोग ट्रेन में सवार हो जाते हैं। वहीं ट्रेन में चढ़े आसपास के गांवों के यात्री यहीं उतर भी जाते हैं।
00ट्रेन आने के समय तक लोग पार करते हैं क्राॅसिंग
दूर से आने वालों के लिए यह ट्रेन की आवाजाही की यह व्यवस्था भले ही हैरत भरी हो, लेकिन आसपास के गांव वाले इसके इतने अभ्यस्त हो गए हैं कि ट्रेन के सामने भी क्राॅसिंग पार करते रहते हैं। ट्रेन आकर क्राॅसिंग से पहले खड़ी होती है और तब तक गाड़ियां और पैदल यात्री क्राॅसिंग पार करते रहते हैं। गेटमैन उतरकर क्राॅसिंग बंद करता है और ट्रेन पार होने के बाद खोलता है इस बीच में लगभग पांच मिनट आवाजाही बंद होती है।
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लोग बोले--
बरहजिया पैसेंजर बरहज बाजार व सलेमपुर की यात्रा का सबसे सुलभ और सस्ता साधन है। इलाके के लोग बरहजिया ट्रेन को जवरहिया गाड़ी भी कहते हैं। चकरा क्राॅसिंग पर स्टेशन बना दिया जाए तो लोगों के आवागमन के लिए और बेहतर सुविधा हो जाएगी।
- सूर्य प्रकाश मिश्र, ग्राम कसिली
...
चकरा ढाले पर बिना स्टेशन के भी बरहजिया के रुकने से लोगों को काफी सहूलियत होती है। हालांकि, पहली बार इधर आए लोग ढाला खुला देखकर जरूर चौंक जाते हैं। स्थानीय लोगों के लिए रेलवे की यह व्यवस्था काफी सुविधाजनक हो गई है।
- अनिल सिंह, ग्राम बरठा बाबू
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कोट-
पूर्वोत्तर रेलवे में सलेमपुर-बरहज और इंदारा-दोहरीघाट समेत कुल तीन रूट ऐसे हैं जो अब भी वन ट्रेन सिस्टम से चलते हैं। इस नियम के तहत ट्रेन जब पहले स्टेशन से चल देती है तो अंतिम स्टेशन तक पहुंचने से पहले उस रूट पर दूसरी ट्रेन नहीं चलती है। चकरा क्राॅसिंग पर एक कर्मचारी की दिनभर तैनाती के बजाय मोबाइल गेटमैन की तैनाती होती है। वही गेट खोलने और बंद करने के लिए जिम्मेदार होता है।
अशोक कुमार, जनसंपर्क अधिकारी-वाराणसी मंडल
- बरहज से सलेमपुर के बीच पैसेंजर ट्रेन के लिए रेलवे में अलग नियम
देवरिया। सलेमपुर से बरहज के बीच चलने वाली पैसेंजर ट्रेन के लिए पूर्वोत्तर रेलवे में आज भी वन ट्रेन सिस्टम लागू है। यह कि यह ट्रेन जब ऑन रूट होती है तो उस लाइन पर दूसरी ट्रेन नहीं चलती। इतना ही नहीं, इस ट्रेन में लोको पायलट और गार्ड के अलावा एक और खास शख्स होता है मोबाइल गेटमैन। ट्रेन रूट पर पड़ने वाली क्रॉसिंग (ढाला) के पास रुकती है, वहां गेटमैन उतरता है और ढाला बंद करने व खोलने की जिम्मदारी के बाद उसी ट्रेन में सवार होकर रवाना हो जाता है।
पुराने जमाने में देवरिया जिले का बरहज कस्बा काफी संपन्न था। सरयू नदी के किनारे बसे इस कस्बे से नाव के जरिये व्यापार होता था। ब्रिटिश काल में सलेमपुर से बरहज के बीच करीब 25 किमी लंबी रेल लाइन माल ढुलाई के लिए बिछाई गई थी। बाद में यह इस इलाके के आवागमन का प्रमुख साधन बन गई। आज यह बड़ी लाइन बन चुकी है और इसका विद्युतीकरण भी हो चुका है। इसके बावजूद इस रूट पर ट्रेनों का संचालन पुराने तरीके से ही होता है।
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सलेमपुर से बरहज रूट पर चकरा ढाले पर किसी स्थाई गेटमैन और अन्य कर्मचारी की तैनाती नहीं है। पैसेंटजर ट्रेन यहां पहुंचकर रुक जाती है। ट्रेन से एक गेटमैन हरी और लाल झंडी लेकर उतरता है और क्रॉसिंग का गेट बंद करता है। इसके बाद वह हरी झंडी हिलाता है तो आठ डिब्बे की यह ट्रेन ढाले को पार करती है और फिर रुक जाती है। गेटमैन दोनों तरफ के गेट खोलने के बाद ट्रेन में सवार हो जाता है और ट्रेन फिर चल पड़ती है।
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ट्रेन आते ही लाइन के किनारे खड़े हो जाते हैं लोग
क्षेत्र के चकरा गोसाईं, बरठी बाबू, कसिली, कैलानी, बरठी चौराहा, परसिया चंदौर, चेरो सहित आसपास के 10 से अधिक गांवों के लोग सलेमपुर और बरहज जाने के लिए ट्रेन आने के समय चकरा ढाले के पास आकर रेलवे लाइन के किनारे खड़े हो जाते हैं। जैसे ही ट्रेन क्रॉसिंग बंद होने के लिए थमती है, रेल लाइन के किनारे खड़े लोग ट्रेन में सवार हो जाते हैं। वहीं ट्रेन में चढ़े आसपास के गांवों के यात्री यहीं उतर भी जाते हैं।
00ट्रेन आने के समय तक लोग पार करते हैं क्राॅसिंग
दूर से आने वालों के लिए यह ट्रेन की आवाजाही की यह व्यवस्था भले ही हैरत भरी हो, लेकिन आसपास के गांव वाले इसके इतने अभ्यस्त हो गए हैं कि ट्रेन के सामने भी क्राॅसिंग पार करते रहते हैं। ट्रेन आकर क्राॅसिंग से पहले खड़ी होती है और तब तक गाड़ियां और पैदल यात्री क्राॅसिंग पार करते रहते हैं। गेटमैन उतरकर क्राॅसिंग बंद करता है और ट्रेन पार होने के बाद खोलता है इस बीच में लगभग पांच मिनट आवाजाही बंद होती है।
लोग बोले
बरहजिया पैसेंजर बरहज बाजार व सलेमपुर की यात्रा का सबसे सुलभ और सस्ता साधन है। इलाके के लोग बरहजिया ट्रेन को जवरहिया गाड़ी भी कहते हैं। चकरा क्राॅसिंग पर स्टेशन बना दिया जाए तो लोगों के आवागमन के लिए और बेहतर सुविधा हो जाएगी।
- सूर्य प्रकाश मिश्र, ग्राम कसिली
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चकरा ढाले पर बिना स्टेशन के भी बरहजिया के रुकने से लोगों को काफी सहूलियत होती है। हालांकि, पहली बार इधर आए लोग ढाला खुला देखकर जरूर चौंक जाते हैं। स्थानीय लोगों के लिए रेलवे की यह व्यवस्था काफी सुविधाजनक हो गई है।
- अनिल सिंह, ग्राम बरठा बाबू
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पूर्वोत्तर रेलवे में सलेमपुर-बरहज और इंदारा-दोहरीघाट समेत कुल तीन रूट ऐसे हैं जो अब भी वन ट्रेन सिस्टम से चलते हैं। इस नियम के तहत ट्रेन जब पहले स्टेशन से चल देती है तो अंतिम स्टेशन तक पहुंचने से पहले उस रूट पर दूसरी ट्रेन नहीं चलती है। चकरा क्राॅसिंग पर एक कर्मचारी की दिनभर तैनाती के बजाय मोबाइल गेटमैन की तैनाती होती है। वही गेट खोलने और बंद करने के लिए जिम्मेदार होता है।
अशोक कुमार, जनसंपर्क अधिकारी-वाराणसी मंडल