{"_id":"69c43f002c21e459f90e29b3","slug":"wishes-are-fulfilled-by-visiting-kathela-mata-deoria-news-c-227-1-sgkp1033-155550-2026-03-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Deoria News: कठेला माता के दर्शन से पूरी होती हैं मुरादें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Deoria News: कठेला माता के दर्शन से पूरी होती हैं मुरादें
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 26 Mar 2026 01:31 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
तुलसियापुर। इटवा तहसील के तहत बूढ़ी राप्ती नदी के किनारे कठेला में स्थित समय माता के मंदिर पर शारदीय नवरात्रि के प्रारंभ से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा सकती है। यहां वर्ष भर क्षेत्र के साथ पड़ोसी राष्ट्र नेपाल और बलरामपुर से भी समय माता के भक्त मां के दर्शन के लिए यहां आते हैं।
यह मंदिर काफी समय से श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। श्रद्धालुओं के अनुसार समय माता के दरबार में श्रद्धा और आस्था से मांगी गई मन्नतें पूरी होती हैं। यहां मुंडन और कड़ाही चढ़ाने की भी परंपरा प्राचीन काल से ही चली आ रही है। तुलसियापुर चौराहे दक्षिण दिशा 10 किमी की दूरी पर बूढ़ी राप्ती नदी के किनारे स्थित कठेला की समय माता की मंदिर पर वैसे तो वर्ष भर सोमवार और शुक्रवार श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रहती है, लेकिन शारदीय और चैत्र नवरात्रों में तो माहौल मेले जैसा हो जाता है। यहां केवल क्षेत्र के ही लोग दर्शन करने नहीं आते हैं बल्कि पड़ोसी जनपद बलरामपुर और पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से भी माता के भक्तों की आवक कठेला समय माता के मंदिर पर बढ़ जाती है। यह अति प्राचीन मंदिर पुरातन काल से ही भक्तों की आस्था का केंद्र है। भक्तों के अनुसार यहां सच्चे मन से मांगी गई मुरादें पूरी होती हैं।
मंदिर का व्यवस्थापन कार्य देख रहे पूर्वांचल बैंक कठेला के पूर्व शाखा प्रबंधक आरएन त्रिपाठी के अनुसार इस ऐतिहासिक मंदिर का वर्णन चीनी यात्री फाह्यान की पुस्तक में भी मिलता है। मध्यकाल में यहां की रानी ने अपने सम्मान को बचाने के लिए दूसरे राजा के हमले पर इसी स्थान पर सती हो गई थी। कुछ दिनों बाद मूर्ति के रूप में अवतरित हुईं। मंदिर के मुख्य पुजारी बाबा हंसुदास के अनुसार इस मंदिर में समय माता और शिव की मूर्ति की स्थापना किसी ने नहीं करवाई है, अपितु यह स्वयं ही अवतरित हुई है।
Trending Videos
यह मंदिर काफी समय से श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। श्रद्धालुओं के अनुसार समय माता के दरबार में श्रद्धा और आस्था से मांगी गई मन्नतें पूरी होती हैं। यहां मुंडन और कड़ाही चढ़ाने की भी परंपरा प्राचीन काल से ही चली आ रही है। तुलसियापुर चौराहे दक्षिण दिशा 10 किमी की दूरी पर बूढ़ी राप्ती नदी के किनारे स्थित कठेला की समय माता की मंदिर पर वैसे तो वर्ष भर सोमवार और शुक्रवार श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रहती है, लेकिन शारदीय और चैत्र नवरात्रों में तो माहौल मेले जैसा हो जाता है। यहां केवल क्षेत्र के ही लोग दर्शन करने नहीं आते हैं बल्कि पड़ोसी जनपद बलरामपुर और पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से भी माता के भक्तों की आवक कठेला समय माता के मंदिर पर बढ़ जाती है। यह अति प्राचीन मंदिर पुरातन काल से ही भक्तों की आस्था का केंद्र है। भक्तों के अनुसार यहां सच्चे मन से मांगी गई मुरादें पूरी होती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
मंदिर का व्यवस्थापन कार्य देख रहे पूर्वांचल बैंक कठेला के पूर्व शाखा प्रबंधक आरएन त्रिपाठी के अनुसार इस ऐतिहासिक मंदिर का वर्णन चीनी यात्री फाह्यान की पुस्तक में भी मिलता है। मध्यकाल में यहां की रानी ने अपने सम्मान को बचाने के लिए दूसरे राजा के हमले पर इसी स्थान पर सती हो गई थी। कुछ दिनों बाद मूर्ति के रूप में अवतरित हुईं। मंदिर के मुख्य पुजारी बाबा हंसुदास के अनुसार इस मंदिर में समय माता और शिव की मूर्ति की स्थापना किसी ने नहीं करवाई है, अपितु यह स्वयं ही अवतरित हुई है।