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एटा के उद्योगों को लगे पंख: दुनिया भर में महक रहा चिकोरी कारोबार, जलेसर के घुंघरू-घंटी की बढ़ी चमक
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Published by: Arun Parashar
Updated Fri, 17 Apr 2026 07:55 PM IST
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सार
एटा का चिकोरी कारोबार अब देश-विदेश में पहचान बना रहा है, जहां से कई बड़ी कंपनियों और 17 देशों में निर्यात हो रहा है। वहीं जलेसर के घुंघरू-घंटी और पीतल उद्योग को सरकारी योजनाओं से नई चमक मिली है।
पीतल की फैक्ट्री में निर्मित घंटे।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
एटा के उद्योग की पहचान लगातार बढ़ रही है। जिले के इंफ्रास्ट्रक्चर को बदलने से उद्योगों को भी पंख लग रहे हैं। जिले के विकास और कारोबार की चुनौतियों को उभारने में अमर उजाला ने अग्रणी भूमिका निभाई है। 78 वर्ष के सफर में अमर उजाला कारोबारियों से कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहा है। आज एटा के चिकोरी और घुंघरू-घंटी और हार्डवेयर कारोबार की पहचान देश ही नहीं विदेश तक बनी है।
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चकोरी कारोबारी अजय चतुर्वेदी बताते हैं कि एटा जनपद का प्रमुख उद्योग है। चिकोरी एटा जनपद का प्रमुख उद्योग है। यहां तीन बड़ी एक्सपोर्ट यूनिटें हैं। जिलेभर के किसान इस फसल को करते हैं। कच्चा माल फैक्ट्रियों तक पहुंचता है। यहां से चकोरी प्रोसेसिंग के बाद देश ही नहीं विदेशों में भेजी जाती है।
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हिंदुस्तान यूनिलीवर, नेस्ले समेत कई कंपनियों को यहां से माल जाता है। वहीं अमेरिका, रूस, यूरोप, साउथ अफ्रीका समेत करीब 17 देशों में यहां से चकोरी भेजी जाती है। चकोरी से काॅफी के लिए बिलेंड बनाए जाती है। हालांकि फिलहाल ईरान-इस्राइल युद्ध के कारण एक्सपोर्ट प्रभावित जरूर हुआ है। लेकिन आने वाला समय में सब बेहतर होने की उम्मीद है।
घंटा-घुंघरू और पीतल कारोबार की बढ़ी चमक
जलेसर के घुंघरू-घंटी उद्योग के साथ-साथ अब पीतल व्यवसाय ने भी खूब तरक्की की है। एक जनपद-एक उत्पाद योजना के अंतर्गत अब तक घुंघरू-घंटी को ही शामिल किया गया है। इसके बाद से जलेसर के घंटा व पीतल से उत्पादित अन्य वस्तुओं का कारोबार चमक हर तरफ बिखरी है। जलेसर के पीतल उत्पादों से जुड़े छोटे-बड़े 100 के करीब कारोबारी हैं। सैकड़ों हस्तशिल्पी भी इस कारोबार से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। कुछ कारोबारी निर्यात भी कर रहे हैं। घुंघरू-घंटी के साथ यहां के पीतल उत्पाद प्रदेश ही नहीं, बल्कि दूसरे क्षेत्रों में भी सरकारी मदद से चमकते नजर आ रहे हैं। पीतल उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए अब उद्यमी और हस्तशिल्पियों को भी बैंकों से आर्थिक मदद ऋण के रूप में मिल रही है। इससे छोटे-बड़े व्यापारियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
जलेसर के घुंघरू-घंटी उद्योग के साथ-साथ अब पीतल व्यवसाय ने भी खूब तरक्की की है। एक जनपद-एक उत्पाद योजना के अंतर्गत अब तक घुंघरू-घंटी को ही शामिल किया गया है। इसके बाद से जलेसर के घंटा व पीतल से उत्पादित अन्य वस्तुओं का कारोबार चमक हर तरफ बिखरी है। जलेसर के पीतल उत्पादों से जुड़े छोटे-बड़े 100 के करीब कारोबारी हैं। सैकड़ों हस्तशिल्पी भी इस कारोबार से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। कुछ कारोबारी निर्यात भी कर रहे हैं। घुंघरू-घंटी के साथ यहां के पीतल उत्पाद प्रदेश ही नहीं, बल्कि दूसरे क्षेत्रों में भी सरकारी मदद से चमकते नजर आ रहे हैं। पीतल उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए अब उद्यमी और हस्तशिल्पियों को भी बैंकों से आर्थिक मदद ऋण के रूप में मिल रही है। इससे छोटे-बड़े व्यापारियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
अमर उजाला समाचार पत्र ने कारोबारियों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है। 78वीं वर्षगांठ के लिए बधाई। पूरा भरोसा है कि आने वाले समय भी विकास के मुद्दे को प्रमुखता से उठाता रहेगा। - अजय चतुर्वेदी, चिकोरी कारोबारी
शासन-प्रशासन पर जलेसर के घुंघरू-घंटी उद्योग के सामने बड़ी चुनौतियां रहीं हैं। अमर उजाला ने इसे प्रमुखता से उठाया। आज यह उत्पाद ओडीओपी में शामिल है। इससे कारोबार की चमक बढ़़ी है। - आदित्य मित्तल, पीतल कारोबारी

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