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Etah News: मौसम बिगड़ने से किसानों की बढ़ी चिंता, बारिश-हवा से फसलों पर संकट
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Tue, 24 Mar 2026 12:49 AM IST
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कस्बा जलेसर में खेत में बिछी पड़ी फसल को देखता किसान। संवाद
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एटा। जिले में बीते कुछ दिनों से मौसम परिवर्तन ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सोमवार को दिन में रुक-रुककर हुई बूंदाबांदी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी। किसान खेतों में तैयार खड़ी फसलों को लेकर परेशान दिख रहे हैं। और तेज बारिश होने पर हालात बिगड़ सकते हैं। जलेसर क्षेत्र के कुछ गांवों में तेज हवाओं के कारण खेत में किसानों की फसल बिछ गई है।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही तेज हवाओं से गेहूं की फसलें झुक गई हैं। सोमवार को दिनभर हुई बूंदाबांदी ने फिर से किसानों को चिंतित कर दिया। किसान नितिन तिवारी, प्रांशू, अर्जुन कुमार ने बताया कि फसल अब दाने भरने की अंतिम अवस्था में थी ऐसे में हवा और नमी का प्रभाव सीधे पैदावार पर पड़ता है। किसान सोबरन ने बताया कि पौधों में अत्यधिक नमी के कारण दाने झड़ने की आशंका बढ़ गई है। मक्का के खेतों में भी बारिश से पानी भरने और गीली मिट्टी की वजह से पौधों के कमजोर पड़ने की स्थिति बन रही है। कुछ जगह आलू की खुदाई के समय हो रही बारिश किसानों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बनी हुई है। खेतों में मिट्टी गीली होने के कारण खुदाई कार्य रुक गया है। किसान अरविंद ने बताया कि अगर खुदाई में देर हुई तो आलू में सड़न शुरू हो सकती है जिससे भंडारण पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। तंबाकू की फसल में नमी बढ़ने से पत्तियों के काले पड़ने और रंग खराब होने का डर बना हुआ है जिसका सीधा प्रभाव बाजार मूल्य पर पड़ेगा।
किसानों में बढ़ती बेचैनी, मेहनत पर पानी फिरने का डर
किसानों हरिशंकर सिंह ने बताया कि इस समय मौसम का साफ और शुष्क रहना जरूरी था। किसान विमल कुमार ने बताया कि अगर दो-तीन दिन और ऐसी ही स्थिति बनी रही तो नुकसान तय है।
मौसम परिवर्तन में कृषि विभाग ने जारी की सलाह
जिला कृषि अधिकारी डॉ. मनवीर सिंह ने कहा कि इस तरह का असमय मौसम फसलों के लिए बेहद हानिकारक होता है। अत्यधिक नमी से फसलों में झुलसा, फफूंद और पत्ती रोग बढ़ने का खतरा रहता है। गेहूं में कंडवा और करनाल बंट जैसी बीमारियों के फैलने की संभावना बढ़ जाती है। सरसों में श्वेत फफूंदी और अल्टरनेरिया ब्लाइट के बढ़ने की आशंका रहती है। कहा कि किसा खेतों का नियमित निरीक्षण करें और आवश्यक होने पर अनुशंसित दवाइयों का छिड़काव करने की सलाह दी है।
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मौसम विभाग की चेतावनी से बढ़ी परेशानी
कृषि मौसम विज्ञान केंद्र अवागढ़ प्रभारी एस सिंह ने बताया कि 24 घंटे तक बादल छाए रहने व हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है। इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है क्योंकि फसलें अब कटाई के करीब पहुंच चुकी हैं और हर दिन की नमी उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।
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किसान यूनियन ने प्रशासन से मिलने की कही बात
भारतीय किसान यूनियन टिकैत के जिलाध्यक्ष अनिल प्रताप सिंह ने कहा कि वह प्रशासन मिलकर बात करेंगे कि यदि नुकसान बढ़ता है तो प्रभावित किसानों का सर्वे कराकर राहत राशि प्रदान की जाए। कई किसानों ने कहा कि लगातार मौसम परिवर्तन से खेती पहले ही घाटे का सौदा बनती जा रही है ऐसे में सरकारी सहायता बेहद जरूरी है।
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किसानों की बात
लगातार मौसम चिंता बढ़ा रहा है, खेत में गेहूं की सफल पकी खड़ी है। ऐसे में लगातार बिगड़ते मौसम से फसल की पैदावार प्रभावित हो सकती है। - मनोज कुमार, सकीट
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पूर्व में तेज बारिश व हवाओं ने पहले की गेहूं की फसल बिछ गई है। ऐसे में सोमवार को हुई रुक-रुककर बारिश खेतों में खड़ी फसलाें की गुणवत्ता को खराब कर सकती है। - आदिल खान, मकसूदपुर
वर्जन
हल्की बारिश है। इससे फसल का नुकसान तो नहीं पहुंचा है। तेज बारिश पर फसल को क्षति हो सकती हहै। सर्वे के लिए टीमें भ्रमण कर रही हैं। फसल के नुकसान की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है। - मनवीर सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही तेज हवाओं से गेहूं की फसलें झुक गई हैं। सोमवार को दिनभर हुई बूंदाबांदी ने फिर से किसानों को चिंतित कर दिया। किसान नितिन तिवारी, प्रांशू, अर्जुन कुमार ने बताया कि फसल अब दाने भरने की अंतिम अवस्था में थी ऐसे में हवा और नमी का प्रभाव सीधे पैदावार पर पड़ता है। किसान सोबरन ने बताया कि पौधों में अत्यधिक नमी के कारण दाने झड़ने की आशंका बढ़ गई है। मक्का के खेतों में भी बारिश से पानी भरने और गीली मिट्टी की वजह से पौधों के कमजोर पड़ने की स्थिति बन रही है। कुछ जगह आलू की खुदाई के समय हो रही बारिश किसानों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बनी हुई है। खेतों में मिट्टी गीली होने के कारण खुदाई कार्य रुक गया है। किसान अरविंद ने बताया कि अगर खुदाई में देर हुई तो आलू में सड़न शुरू हो सकती है जिससे भंडारण पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। तंबाकू की फसल में नमी बढ़ने से पत्तियों के काले पड़ने और रंग खराब होने का डर बना हुआ है जिसका सीधा प्रभाव बाजार मूल्य पर पड़ेगा।
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किसानों में बढ़ती बेचैनी, मेहनत पर पानी फिरने का डर
किसानों हरिशंकर सिंह ने बताया कि इस समय मौसम का साफ और शुष्क रहना जरूरी था। किसान विमल कुमार ने बताया कि अगर दो-तीन दिन और ऐसी ही स्थिति बनी रही तो नुकसान तय है।
मौसम परिवर्तन में कृषि विभाग ने जारी की सलाह
जिला कृषि अधिकारी डॉ. मनवीर सिंह ने कहा कि इस तरह का असमय मौसम फसलों के लिए बेहद हानिकारक होता है। अत्यधिक नमी से फसलों में झुलसा, फफूंद और पत्ती रोग बढ़ने का खतरा रहता है। गेहूं में कंडवा और करनाल बंट जैसी बीमारियों के फैलने की संभावना बढ़ जाती है। सरसों में श्वेत फफूंदी और अल्टरनेरिया ब्लाइट के बढ़ने की आशंका रहती है। कहा कि किसा खेतों का नियमित निरीक्षण करें और आवश्यक होने पर अनुशंसित दवाइयों का छिड़काव करने की सलाह दी है।
मौसम विभाग की चेतावनी से बढ़ी परेशानी
कृषि मौसम विज्ञान केंद्र अवागढ़ प्रभारी एस सिंह ने बताया कि 24 घंटे तक बादल छाए रहने व हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है। इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है क्योंकि फसलें अब कटाई के करीब पहुंच चुकी हैं और हर दिन की नमी उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।
किसान यूनियन ने प्रशासन से मिलने की कही बात
भारतीय किसान यूनियन टिकैत के जिलाध्यक्ष अनिल प्रताप सिंह ने कहा कि वह प्रशासन मिलकर बात करेंगे कि यदि नुकसान बढ़ता है तो प्रभावित किसानों का सर्वे कराकर राहत राशि प्रदान की जाए। कई किसानों ने कहा कि लगातार मौसम परिवर्तन से खेती पहले ही घाटे का सौदा बनती जा रही है ऐसे में सरकारी सहायता बेहद जरूरी है।
किसानों की बात
लगातार मौसम चिंता बढ़ा रहा है, खेत में गेहूं की सफल पकी खड़ी है। ऐसे में लगातार बिगड़ते मौसम से फसल की पैदावार प्रभावित हो सकती है। - मनोज कुमार, सकीट
पूर्व में तेज बारिश व हवाओं ने पहले की गेहूं की फसल बिछ गई है। ऐसे में सोमवार को हुई रुक-रुककर बारिश खेतों में खड़ी फसलाें की गुणवत्ता को खराब कर सकती है। - आदिल खान, मकसूदपुर
वर्जन
हल्की बारिश है। इससे फसल का नुकसान तो नहीं पहुंचा है। तेज बारिश पर फसल को क्षति हो सकती हहै। सर्वे के लिए टीमें भ्रमण कर रही हैं। फसल के नुकसान की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है। - मनवीर सिंह, जिला कृषि अधिकारी