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Etah News: मौसम–जलवायु के बढ़ते प्रभाव ने चिंता बढ़ाई, कृषि पर सबसे अधिक असर
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Mon, 23 Mar 2026 12:09 AM IST
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मारहरा में बारिश के बाद बिछी पड़ी गेहूं की फसल। संवाद
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एटा। हर साल 23 मार्च को मनाया जाने वाला विश्व मौसम विज्ञान दिवस इस बार भी मौसम और जलवायु के बढ़ते प्रभाव की याद दिलाता है। यह दिवस मौसम विज्ञान, जलवायु व जल संसाधनों के अध्ययन को मानव जीवन, कृषि और सुरक्षा से जोड़ने का संदेश देता है।
जिले में बीते कुछ सालों से मौसम के अनिश्चित रुख ने लोगों को खासा परेशान किया है। कभी असमय बारिश, तो कभी तेज धूप और तापमान में अचानक उछाल ने मौसम विज्ञान के महत्व को और बढ़ा दिया है। अवागढ़ मौसम विज्ञान केंद्र प्रभारी एके सिंह ने बताया कि जलवायु परिवर्तन की गति तेज हुई है जिसके कारण स्थानीय स्तर पर मौसम का स्थिर पैटर्न लगातार टूट रहा है। कृषि प्रधान जिले में मौसम का बदलता मिजाज किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। हाल ही में हुई असमय वर्षा से फसलों को होने वाले नुकसान ने किसानों को मौसम पूर्वानुमान पर निर्भर रहने को मजबूर किया है। कहा कि कृषि मौसम विज्ञान की समय-समय पर जारी सलाहें खेती के जोखिम को कम करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं। इस वर्ष विश्व मौसम विज्ञान दिवस की थीम जलवायु कार्रवाई की अग्रिम पंक्ति पर जलवायु संकट की गंभीरता का संकेत देती है। कहा कि तापमान वृद्धि, वर्षा में कमी-बढ़ोतरी और असंतुलित आर्द्रता जैसे कारक जिले में सीधे फसलों, पेयजल और स्वास्थ्य पर असर डाल रहे हैं। मौसम संबंधी जानकारी और वैज्ञानिक पूर्वानुमान को आम लोगों और किसानों तक तेजी से पहुंचाना समय की मांग है। जलवायु के बदलते स्वरूप से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर योजना और सतर्कता को अब प्राथमिकता देनी होगी।
मेघदूत और दामिनी एप किसानों के लिए वरदान, मौसम की सही जानकारी से होगा नुकसान पर नियंत्रण
किसानों को मौसम की सटीक जानकारी उपलब्ध कराने और फसलों को होने वाले संभावित नुकसान से बचाने के उद्देश्य से आवागढ़ कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एस.के. सिंह ने किसानों से मेघदूत एप और दामिनी एप अनिवार्य रूप से डाउनलोड करने को कहा।
उन्होंने बताया कि मेघदूत एप के माध्यम से किसानों को उनके क्षेत्र के मौसम पूर्वानुमान की विस्तृत जानकारी मिलती है। बारिश की संभावना, तापमान और आर्द्रता की स्थिति का अंदाजा लगाकर किसान अपनी फसलों को जरूरत के अनुसार सिंचाई कर सकते हैं। इससे गलत समय पर पानी देने से होने वाले नुकसान से बचाव संभव है। बताया कि दामिनी एप बिजली गिरने की आशंका वाले क्षेत्रों की जानकारी तुरंत उपलब्ध कराता है। यह एप बताता है कि किस इलाके में आकाशीय बिजली गिरने की संभावना है जिससे किसान खेतों में काम करते समय सतर्क रह सकें। उन्होंने कहा कि यह एप ग्रामीण एवं कृषि क्षेत्रों के लिए बहुत उपयोगी है और इससे कई दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों से अपील की है कि मौसम संबंधी इन आधुनिक तकनीकी साधनों का उपयोग कर वे अपनी जान और फसलों दोनों को सुरक्षित रखें।
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जिले में बीते कुछ सालों से मौसम के अनिश्चित रुख ने लोगों को खासा परेशान किया है। कभी असमय बारिश, तो कभी तेज धूप और तापमान में अचानक उछाल ने मौसम विज्ञान के महत्व को और बढ़ा दिया है। अवागढ़ मौसम विज्ञान केंद्र प्रभारी एके सिंह ने बताया कि जलवायु परिवर्तन की गति तेज हुई है जिसके कारण स्थानीय स्तर पर मौसम का स्थिर पैटर्न लगातार टूट रहा है। कृषि प्रधान जिले में मौसम का बदलता मिजाज किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। हाल ही में हुई असमय वर्षा से फसलों को होने वाले नुकसान ने किसानों को मौसम पूर्वानुमान पर निर्भर रहने को मजबूर किया है। कहा कि कृषि मौसम विज्ञान की समय-समय पर जारी सलाहें खेती के जोखिम को कम करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं। इस वर्ष विश्व मौसम विज्ञान दिवस की थीम जलवायु कार्रवाई की अग्रिम पंक्ति पर जलवायु संकट की गंभीरता का संकेत देती है। कहा कि तापमान वृद्धि, वर्षा में कमी-बढ़ोतरी और असंतुलित आर्द्रता जैसे कारक जिले में सीधे फसलों, पेयजल और स्वास्थ्य पर असर डाल रहे हैं। मौसम संबंधी जानकारी और वैज्ञानिक पूर्वानुमान को आम लोगों और किसानों तक तेजी से पहुंचाना समय की मांग है। जलवायु के बदलते स्वरूप से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर योजना और सतर्कता को अब प्राथमिकता देनी होगी।
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मेघदूत और दामिनी एप किसानों के लिए वरदान, मौसम की सही जानकारी से होगा नुकसान पर नियंत्रण
किसानों को मौसम की सटीक जानकारी उपलब्ध कराने और फसलों को होने वाले संभावित नुकसान से बचाने के उद्देश्य से आवागढ़ कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एस.के. सिंह ने किसानों से मेघदूत एप और दामिनी एप अनिवार्य रूप से डाउनलोड करने को कहा।
उन्होंने बताया कि मेघदूत एप के माध्यम से किसानों को उनके क्षेत्र के मौसम पूर्वानुमान की विस्तृत जानकारी मिलती है। बारिश की संभावना, तापमान और आर्द्रता की स्थिति का अंदाजा लगाकर किसान अपनी फसलों को जरूरत के अनुसार सिंचाई कर सकते हैं। इससे गलत समय पर पानी देने से होने वाले नुकसान से बचाव संभव है। बताया कि दामिनी एप बिजली गिरने की आशंका वाले क्षेत्रों की जानकारी तुरंत उपलब्ध कराता है। यह एप बताता है कि किस इलाके में आकाशीय बिजली गिरने की संभावना है जिससे किसान खेतों में काम करते समय सतर्क रह सकें। उन्होंने कहा कि यह एप ग्रामीण एवं कृषि क्षेत्रों के लिए बहुत उपयोगी है और इससे कई दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों से अपील की है कि मौसम संबंधी इन आधुनिक तकनीकी साधनों का उपयोग कर वे अपनी जान और फसलों दोनों को सुरक्षित रखें।