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Etawah News: फिर से लौट आओ... ओ री चिरैया

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 19 Mar 2026 11:58 PM IST
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Come back again... O my bird
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इटावा। घर, आँगन, छत और मुंडेर पर चीं-चीं की मधुर आवाज से वातावरण को जीवंत बनाने वाली गौरैया धीरे-धीरे हमारी जिंदगी से दूर होती जा रही हैं। शुक्रवार को होने वाले विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर यह चिंता और भी गहरी हो जाती है।
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गौरैया संरक्षिका डॉ. सुनीता यादव बताती हैं कि पिछले कुछ दशकों में गौरैया की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। गांवों में भी इनकी उपस्थिति कम हुई है जबकि शहरों में स्थिति अत्यंत गंभीर बनी है। इसके पीछे प्रमुख कारणों में प्राकृतिक आवास की कमी भोजन और पानी का अभाव, कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग, पेड़-पौधों की कमी और आधुनिक जीवनशैली शामिल है।
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पिछले एक दशक से गौरैया संरक्षण का काम कर रही हैं। बताती हैं कि सबसे बड़ा कारण इनका प्राकृतिक आवास समाप्त होना है। पहले कच्चे घर, छप्पर और खपरैल होते थे जिनमें गौरैया आसानी से अपना घोंसला बना लेती थीं। घोंसलों की कमी से गौरैया का प्रजनन प्रभावित हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में गौरैया संरक्षण को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है।
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