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Etawah News: ज्यादा एमआरपी डालने पर लगे अंकुश
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फोटो: 10:::: भरथना में तहसीलदार दिलीप कुमार को ज्ञापन देते एबीजीपी के पदाधिकारी। स्रोत संगठन
अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
भरथना। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (एबीजीपी) की जिला इकाई ने अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) मुद्रण पर सीमा तय करने के लिए कानून बनाए जाने की मांग की है। संगठन ने सोमवार को तहसीलदार दिलीप कुमार को ज्ञापन देकर प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री व उपभोक्ता मामलों के मंत्री तक उनकी मांग पहुंचाने को कहा।
ज्ञापन में ग्राहक पंचायत ने मांग करते हुए कहा है कि वर्तमान में एमआरपी प्रणाली का दुरुपयोग हो रहा है। कंपनियां उत्पादों पर वास्तविक लागत से कई गुना अधिक एमआरपी अंकित कर बाद में भारी छूट दिखाकर उपभोक्ताओं को भ्रमित करती हैं। संगठन का कहना है कि इससे उपभोक्ताओं को वास्तविक मूल्य की जानकारी नहीं मिल पाती और वे अधिक कीमत चुकाने को मजबूर हो जाते हैं।
एबीजीपी का कहना है कि कई उत्पादों की वास्तविक कीमत और एमआरपी में बड़ा अंतर होता है। एमआरपी पर कोई ऊपरी सीमा निर्धारित नहीं होने से निर्माता और विक्रेता मनमाने तरीके से एमआरपी तय कर रहे हैं। इससे मूल्य पारदर्शिता प्रभावित हो रही है। ऐसे में उत्पादों पर उत्पादन लागत और बिक्री लागत का स्पष्ट उल्लेख अनिवार्य किया जाए, फर्जी छूट पर रोक लगे व एमआरपी निर्धारण के लिए स्वतंत्र प्राधिकरण या आयोग का गठन किया जाए। इसके साथ ही मौजूदा कानूनों में संशोधन कर उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। ज्ञापन देने वालों में जिलाध्यक्ष निशांत पोरवाल, भरथना शाखा अध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव, सचिव हिमांशु गुप्ता, अमित श्रीवास्तव, ब्रजेश पोरवाल, नितिन दीक्षित, अंकित यादव आदि शामिल रहे।
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अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
भरथना। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (एबीजीपी) की जिला इकाई ने अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) मुद्रण पर सीमा तय करने के लिए कानून बनाए जाने की मांग की है। संगठन ने सोमवार को तहसीलदार दिलीप कुमार को ज्ञापन देकर प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री व उपभोक्ता मामलों के मंत्री तक उनकी मांग पहुंचाने को कहा।
ज्ञापन में ग्राहक पंचायत ने मांग करते हुए कहा है कि वर्तमान में एमआरपी प्रणाली का दुरुपयोग हो रहा है। कंपनियां उत्पादों पर वास्तविक लागत से कई गुना अधिक एमआरपी अंकित कर बाद में भारी छूट दिखाकर उपभोक्ताओं को भ्रमित करती हैं। संगठन का कहना है कि इससे उपभोक्ताओं को वास्तविक मूल्य की जानकारी नहीं मिल पाती और वे अधिक कीमत चुकाने को मजबूर हो जाते हैं।
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एबीजीपी का कहना है कि कई उत्पादों की वास्तविक कीमत और एमआरपी में बड़ा अंतर होता है। एमआरपी पर कोई ऊपरी सीमा निर्धारित नहीं होने से निर्माता और विक्रेता मनमाने तरीके से एमआरपी तय कर रहे हैं। इससे मूल्य पारदर्शिता प्रभावित हो रही है। ऐसे में उत्पादों पर उत्पादन लागत और बिक्री लागत का स्पष्ट उल्लेख अनिवार्य किया जाए, फर्जी छूट पर रोक लगे व एमआरपी निर्धारण के लिए स्वतंत्र प्राधिकरण या आयोग का गठन किया जाए। इसके साथ ही मौजूदा कानूनों में संशोधन कर उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। ज्ञापन देने वालों में जिलाध्यक्ष निशांत पोरवाल, भरथना शाखा अध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव, सचिव हिमांशु गुप्ता, अमित श्रीवास्तव, ब्रजेश पोरवाल, नितिन दीक्षित, अंकित यादव आदि शामिल रहे।