{"_id":"69d2b3363a734c27af000317","slug":"golden-crop-ruined-wheat-loss-up-to-40-etawah-news-c-216-1-etw1002-140509-2026-04-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Etawah News: सुनहरी फसल हो गई मटियामेट, गेहूं में 40 फीसदी तक नुकसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Etawah News: सुनहरी फसल हो गई मटियामेट, गेहूं में 40 फीसदी तक नुकसान
विज्ञापन
विज्ञापन
फोटो 21:: ताखा क्षेत्र में जमीन पर बिछे ओले। संवाद
फोटो 22:: ताखा में विद्यालय के सामने ओलों से पटी सड़क। संवाद
फोटो 23:: घर के आंगन में गिरे ओले। संवाद
फोटो 24::भरथना क्षेत्र में जमीन पर गिरी गेहूं की फसल। संवाद
फोटो 25::चकरनगर क्षेत्र में गिरी गेहूं की फसल। संवाद
फोटो 26:: शहर में बारिश के दौरान निकलते ई-रिक्शा। संवाद
फोटो 27::आशीष कुमार।
फोटो 28:: अरविंद दुबे।
कुदरत की मार से सहमे जिले के किसान, ताखा क्षेत्र में 20 मिनट तक गिरे ओले
24 घंटे में हुई लगभग आठ एमएम बारिश, आज भी मौसम खराब रहने का अनुमान
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। जिले में बीते 24 घंटों में मौसम के बदले मिजाज ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। शनिवार शाम और रविवार दोपहर बाद हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी सुनहरी फसल को मटियामेट कर दिया है। खासकर ताखा क्षेत्र में करीब 20 मिनट तक हुई भारी ओलावृष्टि ने गेहूं की फसल को बिछा दिया है जबकि चकरनगर और भरथना क्षेत्र में तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से फसलें जमीन पर लोट गई हैं। इस दौरान जिले में लगभग आठ एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई।
जिले में इस वर्ष करीब 67 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की बोआई की गई है। होली के बाद जैसे ही फसल पककर तैयार हुई और किसानों ने कटाई के लिए हंसिया उठाया, वैसे ही मौसम की मार पड़ गई। मार्च में पड़ने वाली तेज गर्मी ने जहां गेहूं को समय से पहले ही पका दिया और अब बची कसर बारिश और ओलों ने पूरी कर दी। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जिन क्षेत्रों में ओलावृष्टि और तेज हवा चली है, वहां गेहूं की पैदावार और गुणवत्ता में 30 से 40 प्रतिशत तक की गिरावट आने की आशंका है। इसके साथ ही गेहूं के दानों के काले पड़ने और चमक खोने का डर भी किसानों को सता रहा है।
20 मिनट की ओलावृष्टि ने मचाई तबाही
ताखा। ताखा तहसील क्षेत्र में शाम करीब तीन बजे अचानक आसमान में काली घटाएं छाईं और करीब 20 मिनट तक बड़े-बड़े ओले गिरे। ताखा, नगला कोरी, विरतिया, रठूरी और सुतियानी समेत लगभग 20 गांवों में ओलों की सफेद चादर बिछ गई। गेहूं के बाल टूटकर जमीन पर गिर गए, जिससे किसानों को 40 प्रतिशत तक क्षति का अनुमान है। (संवाद)
कटी फसल भी भीगी, बढ़ी मशक्कत
चकरनगर/भरथना। तहसील क्षेत्र में शनिवार शाम हुई बारिश ने कटाई कार्य रोक दिया। जिन किसानों ने फसल काटकर गट्ठर बना लिए थे, उन्हें धूप दिखाने के लिए दोबारा फैलाना पड़ रहा है। भरथना के पीपरीपुर और आसपास के गांवों में भी तेज हवाओं ने पकी खड़ी फसल को धराशाई कर दिया है। हालांकि रविवार को इन क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी हुई। (संवाद)
किसानों ने बयां की परेशानी
फोटो 27::आशीष कुमार।
ग्राम पीपरीपुरा निवासी किसान आशीष कुमार ने बताया कि उनकी नौ बीघा गेहूं की फसल पूरी तरह जमीन पर बिछ गई है। इसमें कम से कम 40 फीसदी का नुकसान नजर आ रहा है। अब लागत निकलना भी मुश्किल है।
फोटो 28:: अरविंद दुबे।
भरथना क्षेत्र के किसान अरविंद दुबे ने बताया कि 20 बीघा गेहूं की फसल गिर गई है। बालियां गीली होने से दाना सिकुड़ जाएगा। प्रशासन को जल्द सर्वे कराकर किसानों को मुआवजा देना चाहिए। बारिश से भूसे की गुणवत्ता भी खराब हो जाएगी।
Trending Videos
फोटो 22:: ताखा में विद्यालय के सामने ओलों से पटी सड़क। संवाद
फोटो 23:: घर के आंगन में गिरे ओले। संवाद
फोटो 24::भरथना क्षेत्र में जमीन पर गिरी गेहूं की फसल। संवाद
फोटो 25::चकरनगर क्षेत्र में गिरी गेहूं की फसल। संवाद
फोटो 26:: शहर में बारिश के दौरान निकलते ई-रिक्शा। संवाद
फोटो 27::आशीष कुमार।
फोटो 28:: अरविंद दुबे।
कुदरत की मार से सहमे जिले के किसान, ताखा क्षेत्र में 20 मिनट तक गिरे ओले
24 घंटे में हुई लगभग आठ एमएम बारिश, आज भी मौसम खराब रहने का अनुमान
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। जिले में बीते 24 घंटों में मौसम के बदले मिजाज ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। शनिवार शाम और रविवार दोपहर बाद हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी सुनहरी फसल को मटियामेट कर दिया है। खासकर ताखा क्षेत्र में करीब 20 मिनट तक हुई भारी ओलावृष्टि ने गेहूं की फसल को बिछा दिया है जबकि चकरनगर और भरथना क्षेत्र में तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से फसलें जमीन पर लोट गई हैं। इस दौरान जिले में लगभग आठ एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई।
जिले में इस वर्ष करीब 67 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की बोआई की गई है। होली के बाद जैसे ही फसल पककर तैयार हुई और किसानों ने कटाई के लिए हंसिया उठाया, वैसे ही मौसम की मार पड़ गई। मार्च में पड़ने वाली तेज गर्मी ने जहां गेहूं को समय से पहले ही पका दिया और अब बची कसर बारिश और ओलों ने पूरी कर दी। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जिन क्षेत्रों में ओलावृष्टि और तेज हवा चली है, वहां गेहूं की पैदावार और गुणवत्ता में 30 से 40 प्रतिशत तक की गिरावट आने की आशंका है। इसके साथ ही गेहूं के दानों के काले पड़ने और चमक खोने का डर भी किसानों को सता रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
20 मिनट की ओलावृष्टि ने मचाई तबाही
ताखा। ताखा तहसील क्षेत्र में शाम करीब तीन बजे अचानक आसमान में काली घटाएं छाईं और करीब 20 मिनट तक बड़े-बड़े ओले गिरे। ताखा, नगला कोरी, विरतिया, रठूरी और सुतियानी समेत लगभग 20 गांवों में ओलों की सफेद चादर बिछ गई। गेहूं के बाल टूटकर जमीन पर गिर गए, जिससे किसानों को 40 प्रतिशत तक क्षति का अनुमान है। (संवाद)
कटी फसल भी भीगी, बढ़ी मशक्कत
चकरनगर/भरथना। तहसील क्षेत्र में शनिवार शाम हुई बारिश ने कटाई कार्य रोक दिया। जिन किसानों ने फसल काटकर गट्ठर बना लिए थे, उन्हें धूप दिखाने के लिए दोबारा फैलाना पड़ रहा है। भरथना के पीपरीपुर और आसपास के गांवों में भी तेज हवाओं ने पकी खड़ी फसल को धराशाई कर दिया है। हालांकि रविवार को इन क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी हुई। (संवाद)
किसानों ने बयां की परेशानी
फोटो 27::आशीष कुमार।
ग्राम पीपरीपुरा निवासी किसान आशीष कुमार ने बताया कि उनकी नौ बीघा गेहूं की फसल पूरी तरह जमीन पर बिछ गई है। इसमें कम से कम 40 फीसदी का नुकसान नजर आ रहा है। अब लागत निकलना भी मुश्किल है।
फोटो 28:: अरविंद दुबे।
भरथना क्षेत्र के किसान अरविंद दुबे ने बताया कि 20 बीघा गेहूं की फसल गिर गई है। बालियां गीली होने से दाना सिकुड़ जाएगा। प्रशासन को जल्द सर्वे कराकर किसानों को मुआवजा देना चाहिए। बारिश से भूसे की गुणवत्ता भी खराब हो जाएगी।