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Etawah News: बाढ़ की आहट... मलबे, जर्जर भवनों में राहत की तैयारी

Fri, 14 Aug 2026 12:00 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 14 Aug 2026 12:00 AM IST
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Looming threat of floods... preparations for relief operations amidst debris and dilapidated buildings.
चकरनगर। तहसील क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे चंबल और यमुना के जलस्तर से बाढ़ का खतरा गहराता जा रहा है। बढ़ते जलस्तर को लेकर ग्रामीण चिंतित हैं। तहसील प्रशासन बाढ़ से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार होने का दावा कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत प्रशासनिक दावों से अलग नजर आ रही है। स्थिति यह है कि कंधेशीघार में जिस जगह बाढ़ राहत चौकी होने का दावा प्रशासन कर रहा है, वह भवन आठ माह पूर्व ध्वस्त किया जा चुका है। वहीं, कुछ भवन जर्जर घोषित किए जा चुके हैं। जहां चौकियां बनाई भी गई हैं वहां कर्मचारी की मौजूदगी नहीं है और न ही चौकी संबंधित कोई बैनर लगा है।
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संवाद न्यूज की टीम ने गुरुवार को बाढ़ से निपटने के लिए बनाई गई राहत चौकियों की पड़ताल की तो कई चौकियां मौके पर ही नहीं मिलीं। सुबह 11:15 बजे कंधेशीघार पहुंची संवाद टीम को प्राथमिक विद्यालय के पास ध्वस्त हो चुके भवन का मलबा पड़ा मिला। प्राथमिक विद्यालय के पास मिले कंधेशीघर प्रधान के पति प्रेम सिंह ने बताया कि विद्यालय के भवन को पांच माह पहले ही ध्वस्त किया जा चुका है, जबकि प्रशासन से जारी सूची में इस विद्यालय भवन में बाढ़ चौकी दर्शाई गई है।
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दोपहर 12:11 बजे प्राथमिक विद्यालय कोला में बनाई गई बाढ़ राहत चौकी पर पहुंची टीम को यहां न तो कोई कर्मचारी मिला और न ही बैनर लगा दिखा। जिस भवन में चौकी बनाई गई है, वह जर्जर घोषित है। प्रधानाध्यापक महावीर सिंह ने बताया कि भवन जर्जर घोषित होने के बाद बच्चों को पंचायत घर में पढ़ाने के आदेश हुए हैं। ऐसे में यहां कर्मचारी कैसे रुक सकते हैं। दोपहर 1:36 बजे ब्लॉक कार्यालय राजपुर पहुंचने पर भी बाढ़ चौकी की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। बाढ़ चौकी का कोई बैनर नहीं लगा होने की वजह से स्पष्ट नहीं हो पा रहा था कि चौकी कहां है।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर लटका ताला
दो बजे गढ़ा कासदा गांव स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी ताला लटका मिला। इस केंद्र को भी बाढ़ राहत चौकी बनाया गया है। दोपहर 2 बजकर 35 मिनट पर भरेह स्कूल की बाढ़ चौकी पर पहुंची संवाद टीम को यहां भी कोई कर्मचारी मौजूद नहीं मिला। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर बाढ़ आती है तो ग्रामीणों को तत्काल राहत कैसे मिलेगी और उन्हें सुरक्षित ठिकाना कैसे मिल सकेगा।



बाढ़ चौकी को अपडेट के लिए बोल दिया है, जहां सफाई नहीं हुई हो वहां सफाई कराई जाए। अगर कोई भवन अच्छा, लेकिन रास्ते या परिसर में पानी भर जाता है। उसे बदला जाए, वहीं जर्जर और ध्वस्त भवन में बनी बाढ़ चौकी को भी बढ़लने के लिए बोला गया है।
- रोहित कुमार मौर्य, एसडीएम चकरनगर
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