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Etawah News: रंगों की जलन लेकर पहुंचे मरीज... कुंडी-ताला देखकर लौटे

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 06 Mar 2026 12:44 AM IST
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Patients arrived with color irritation... returned after seeing the latch and lock.
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इटावा। होली पर आंखों और कानों में रंग चले जाने से परेशान मरीजों को जिला अस्पताल में भी दुश्वारियां झेलनी पड़ीं। यहां वह आंख और कान दिखाने पहुंचे थे लेकिन इनके डॉक्टर ही नहीं मिले। इन डॉक्टरों के कमरों के बाहर दरवाजे पर या तो ताला लगा था या फिर कुंडी लगी नजर आई। पर्चा बनवाने के दौरान भी डॉक्टर को लेकर जानकारी नहीं दी गई। बाद में भटकने को मजबूर हुए मरीज परेशान होकर लौट गए।
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गुरुवार सुबह 10:57 बजे जिला अस्पताल में भाई दूज त्योहार के चलते ज्यादा भीड़ तो नहीं थी लेकिन तकलीफ से परेशान मरीज पहुंचे थे। मरीजों की ज्यादा संख्या न होने से पर्चा काउंटर पर लोगों को लाइन नहीं लगानी पड़ रही थी। सबसे ज्यादा भीड़ प्रथम तल पर बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में थी। यहां बच्चों को लेकर आए उनके माता-पिता अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। नेत्र रोग विशेषज्ञ के कक्ष संख्या 109 के बाहर ताला लगा था। इस कारण मरीज लौट रहे थे। कुछ आसपास के स्टाफ से जानकारी ले रहे तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
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यही हाल नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ की ओपीडी कक्ष संख्या 120 पर भी दिखा। यहां कुंडी लगी थी। यहां डॉ. राहुल आनंद व डॉ. अश्वनी कुमार की नेम प्लेट लगी थी, दरवाजे के बगल में नोटिस चस्पा था, जिसमें डॉ. अश्वनी की ड्यूटी जेल में होने की जानकारी लिखी थी। सर्जन ओपीडी का दरवाजा भी बंद था। दवा काउंटर पर भीड़ कम थी।





-नाक-कान में तकलीफ हो रही थी। यहां कुंडी बंद है। एक डाॅक्टर की जेल में ड्यूटी बता रहे हैं लेकिन दूसरे डॉक्टर का कहीं अता- पता नहीं है।
प्रदीप कुमार, जसवंतनगर



- पर्चा तो बना दिया लेकिन यहां आए तो ओपीडी का दरवाजा ही बंद है। स्टाफ से पूछ रहे हैं तो कोई संतोष जनक जवाब नहीं मिल रहा है। डॉक्टर को खुद ही तलाश रहे हैं।

डॉ. राहुल आनंद ने बताया कि गुरुवार को उनकी पोस्टमार्टम में ड्यूटी थी इसलिए वह जिला अस्पताल में नहीं थे। डॉ. अश्वनी कुमार ने बताया कि ुकी ड्यूटी जिला कारागार में थी। गुरुवार को जिला अस्पताल में नहीं थे। इसकी जानकारी ओपीडी के बाहर चस्पा थी।



- डॉ. मंगल सिंह पितृ शोक के चलते अवकाश पर हैं। ईएनटी सर्जन डॉ. जेपी ओपीडी में थे। सर्जन डॉ. श्रीशांक अवकाश पर हैं इसलिए आंखों में वाले कक्ष में कोई डॉक्टर नहीं था। डॉक्टरों की कमी की वजह से दिक्कत हुई है।



डॉ. पारितोष शुक्ला, सीएमएस, जिला अस्पताल
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