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Etawah News: छह दिन बंद रखी दुकान, बदल दिया काम का तरीका
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फोटो 2 : उर्दू मोहल्ले के पास लकड़ी की भट्टी में समोसे बनाते कारीगर। संवाद
- कॉमर्शियल सिलिंडर न मिलने से दुकानदारों ने लकड़ी की भट्टियों का तलाशा विकल्प
- दुकानदार बोले-खर्च बढ़ गया लेकिन बाजार में टिके रहने के लिए काम करना जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। उर्दू मोहल्ले के पास पुराने समोसे की दुकान में कारीगर गर्मी से परेशान थे। लकड़ी की भट्टी जल रही थी। इसी भट्टी में समोसे तैयार हो रहे थे। वर्षों से चल रही इस दुकान में पहली बार समोसा बनाने के लिए लकड़ी की भट्टी का इस्तेमाल हो रहा है। भट्टी जलने से धुएं की समस्या की वजह से पंखे बंद हैं, कारीगर गर्मी में काम कर रहे हैं। कॉमर्शियल सिलिंडर न मिलने से खर्चा भी दोगुना हो गया लेकिन बाजार की प्रतिस्पर्धा और बिक्री घटने के डर से समोसे की कीमत नहीं बढ़ा रहे।
उर्दू मोहल्ले में हनुमान मंदिर के सामने वर्षों पुरानी समोसे की दुकान पर संवाद न्यूज एजेंसी की टीम रविवार को पहुंची तो यहां मुख्य कारीगर विशाल जैन समोसे सेंक रहे थे। उन्होंने बताया कि कॉमर्शियल सिलिंडर बंद हुआ तो लगा कि सब कुछ खत्म हो गया। कभी ऐसा नहीं हुआ कि दुकान को एक दिन से ज्यादा बंद किया हो लेकिन सिलिंडर नहीं मिलने से छह दिन तक दुकान नहीं खुली।
इस दौरान विचार चल रहा था कि अब क्या करें। लकड़ी की भट्टी में समोसे तैयार करना परेशानी भरा होता है। धुआं और गर्मी के मौसम में तपन जैसी दिक्कत बढ़ जाती है लेकिन कोई दूसरा विकल्प न मिलने पर एक हजार रुपये में लकड़ी की भट्टी तैयार कराई और फिर दो गुना महंगी हुई लकड़ी को खरीदकर काम दोबारा शुरू किया। भट्टी लगातार चलानी पड़ती है, धुएं की समस्या के कारण पंखा बंद करना पड़ता है। इससे गर्मी और परेशान करती है।
केस-1
फोटो 3: श्यामजी
दोगुनी महंगी हो गई लकड़ी
-पक्के बाग में एक ढाबा संचालक श्यामजी बताते हैं कि कॉमर्शियल सिलिंडर न मिलने से अब रोटी सेंकने के लिए भी लकड़ी वाली भट्टी का इस्तेमाल कर रहे हैं। ग्राहक के आने पर ही रोटी सिकती है लेकिन इस भट्टी को लगातार चालू रखना पड़ता है। गैस में यह दिक्कत नहीं थी। लकड़ी भी छह रुपये प्रति किलो से बढ़कर 10 से 12 रुपये प्रति किलो हो गई है। तीन दिन में 2800 रुपये के दो सिलिंडर खर्च होते थे तो अब छह हजार से ज्यादा की लकड़ी जल रही है।
केस-2
फोटो 4: श्याम मोहन दीक्षित
हजार रुपये में तैयार कराई भट्टी
-तकिया आजाद नगर में एक बुजुर्ग श्याम मोहन दीक्षित का ढाबा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने लकड़ी की भट्टी बनवा ली है। एक हजार रुपये में यह भट्टी बनी। अब लकड़ी की व्यवस्था कर काम को चालू करेंगे। सिलिंडर के लिए बहुत भटके लेकिन व्यवस्था कर पाना मुश्किल हो गया। पक्के बाग, फ्रेंड्स कॉलोनी और बाजार में कई दुकानों के बंद होने से डर गया हूं, इसलिए लकड़ी की भट्टी का विकल्प ही सही लग रहा है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। उर्दू मोहल्ले के पास पुराने समोसे की दुकान में कारीगर गर्मी से परेशान थे। लकड़ी की भट्टी जल रही थी। इसी भट्टी में समोसे तैयार हो रहे थे। वर्षों से चल रही इस दुकान में पहली बार समोसा बनाने के लिए लकड़ी की भट्टी का इस्तेमाल हो रहा है। भट्टी जलने से धुएं की समस्या की वजह से पंखे बंद हैं, कारीगर गर्मी में काम कर रहे हैं। कॉमर्शियल सिलिंडर न मिलने से खर्चा भी दोगुना हो गया लेकिन बाजार की प्रतिस्पर्धा और बिक्री घटने के डर से समोसे की कीमत नहीं बढ़ा रहे।
उर्दू मोहल्ले में हनुमान मंदिर के सामने वर्षों पुरानी समोसे की दुकान पर संवाद न्यूज एजेंसी की टीम रविवार को पहुंची तो यहां मुख्य कारीगर विशाल जैन समोसे सेंक रहे थे। उन्होंने बताया कि कॉमर्शियल सिलिंडर बंद हुआ तो लगा कि सब कुछ खत्म हो गया। कभी ऐसा नहीं हुआ कि दुकान को एक दिन से ज्यादा बंद किया हो लेकिन सिलिंडर नहीं मिलने से छह दिन तक दुकान नहीं खुली।
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इस दौरान विचार चल रहा था कि अब क्या करें। लकड़ी की भट्टी में समोसे तैयार करना परेशानी भरा होता है। धुआं और गर्मी के मौसम में तपन जैसी दिक्कत बढ़ जाती है लेकिन कोई दूसरा विकल्प न मिलने पर एक हजार रुपये में लकड़ी की भट्टी तैयार कराई और फिर दो गुना महंगी हुई लकड़ी को खरीदकर काम दोबारा शुरू किया। भट्टी लगातार चलानी पड़ती है, धुएं की समस्या के कारण पंखा बंद करना पड़ता है। इससे गर्मी और परेशान करती है।
केस-1
फोटो 3: श्यामजी
दोगुनी महंगी हो गई लकड़ी
-पक्के बाग में एक ढाबा संचालक श्यामजी बताते हैं कि कॉमर्शियल सिलिंडर न मिलने से अब रोटी सेंकने के लिए भी लकड़ी वाली भट्टी का इस्तेमाल कर रहे हैं। ग्राहक के आने पर ही रोटी सिकती है लेकिन इस भट्टी को लगातार चालू रखना पड़ता है। गैस में यह दिक्कत नहीं थी। लकड़ी भी छह रुपये प्रति किलो से बढ़कर 10 से 12 रुपये प्रति किलो हो गई है। तीन दिन में 2800 रुपये के दो सिलिंडर खर्च होते थे तो अब छह हजार से ज्यादा की लकड़ी जल रही है।
केस-2
फोटो 4: श्याम मोहन दीक्षित
हजार रुपये में तैयार कराई भट्टी
-तकिया आजाद नगर में एक बुजुर्ग श्याम मोहन दीक्षित का ढाबा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने लकड़ी की भट्टी बनवा ली है। एक हजार रुपये में यह भट्टी बनी। अब लकड़ी की व्यवस्था कर काम को चालू करेंगे। सिलिंडर के लिए बहुत भटके लेकिन व्यवस्था कर पाना मुश्किल हो गया। पक्के बाग, फ्रेंड्स कॉलोनी और बाजार में कई दुकानों के बंद होने से डर गया हूं, इसलिए लकड़ी की भट्टी का विकल्प ही सही लग रहा है।