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Etawah News: छेड़खानी के मामले में कोर्ट ने खारिज किया निचली अदालत का आदेश

Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 25 Mar 2026 12:28 AM IST
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The court set aside the lower court's order in the molestation case.
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इटावा। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने एक महत्वपूर्ण फैसले में निचली अदालत की ओर से पारित उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें आरोपियों को धारा 451 के तहत तलब किया गया था। न्यायालय ने माना कि मामले के तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को कड़ी धारा 452 आईपीसी के तहत तलब किया जाना चाहिए था।
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पीड़िता ने आरोप लगाया था कि 24 अप्रैल 2024 की शाम को जब वह अपने घर जा रही थी तब विपक्षी लोगों ने उसका रास्ता रोका और अश्लील बातें कीं थीं। जब वह अपने घर के अंदर चली गई तो आरोपी उसका पीछा करते हुए घर में घुस आए और गलत नियत से उसके साथ मारपीट की थी। निचली अदालत ने एक जुलाई 2025 को अपने आदेश में आरोपियों को धारा 451 (कारावास से दंडनीय अपराध करने के लिए गृह-अतिचार), 354-D, 504, 323 और 354 आईपीसी के तहत तलब किया था।
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निगरानीकर्ता की दलीलें पीड़िता ने इस आदेश के खिलाफ जिला न्यायालय में दंड निगरानी (रिवीजन) याचिका दायर की। उसमें अधिवक्ता ने दलील दी थी। जानबूझकर और बुरी नीयत से घर के अंदर घुसे और मारपीट की जो धारा 452 आईपीसी (उपहति, हमला या दोषपूर्ण अवरोध की तैयारी के पश्चात गृह-अतिचार) के अंतर्गत आता है।
निचली अदालत ने साक्ष्यों की अनदेखी करते हुए आरोपियों को कम गंभीर धारा (451) में तलब किया जो कि विधि विरुद्ध है। न्यायालय का निर्णय अपर सत्र न्यायाधीश ने पत्रावली और साक्ष्यों का परिशीलन करने के बाद पाया कि परिवादिनी के साक्ष्यों और घटना के विवरण से स्पष्ट है कि आरोपियों को धारा 451 के बजाय धारा 452 आईपीसी में तलब किया जाना न्यायोचित था।
अवर न्यायालय का पिछला आदेश त्रुटिपूर्ण था और उसे कायम नहीं रखा जा सकता। न्यायालय ने निचली अदालत के एक जुलाई 2025 के आदेश को रद्द कर दिया है। अब निचली अदालत को निर्देशित किया गया है कि वह जिला न्यायालय के निष्कर्षों के आलोक में पीड़िता को पुनः सुनकर कानून के अनुसार नया आदेश पारित करे। सभी संबंधित पक्षों को 16 अप्रैल 2026 को संबंधित निचली अदालत के समक्ष सुनवाई हेतु उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
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