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Etawah News: कागजों में बहा दिया पानी, धरातल पर सूख गई नहर
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इटावा/उदी। आगरा के पिनाहट से इटावा के उदी मोड़ तक फैली 69 किलोमीटर लंबी चंबल पंप नहर परियोजना सवालों के घेरे में है। इसका उद्देश्य 14,619 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई कर 25 हजार किसानों को लाभ पहुंचाना था। किसानों का आरोप है कि नहर वर्षों से सूखी है, जबकि विभाग हर साल पानी छोड़ने का दावा कर रहा है।
राजा महेंद्र सिंह चंबल डाल नहर परियोजना आगरा और इटावा के बीहड़ क्षेत्र में सिंचाई समस्या के समाधान के लिए शुरू हुई थी। 50 से अधिक गांवों को लाभान्वित करने के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। किसानों को बेहतर सिंचाई, अधिक फसल उत्पादन और कम खेती लागत का भरोसा दिया गया था। लेकिन अब नहर में कई स्थानों पर झाड़-झंखाड़ उग आए हैं और पानी नहीं है। नहर किनारे के किसान कहते हैं कि उन्होंने वर्षों से इसमें पानी नहीं देखा। खरीफ और रबी सीजन में भी उन्हें सिंचाई की उम्मीद नहीं मिलती। किसानों को निजी ट्यूबवेल, सबमर्सिबल और डीजल पंप से सिंचाई करनी पड़ती है। इससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और छोटे किसान सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद परियोजना का लाभ नहीं मिल रहा है। किसान पूछते हैं कि यदि पानी छोड़ा जाता है तो नहर सूखी क्यों है और टेल तक क्यों नहीं पहुंचता।
किसानों का आरोप है कि नहर के रखरखाव और जल वितरण व्यवस्था की निगरानी प्रभावी नहीं है। उन्हें वर्षों से नहर में पानी नहीं मिला है। इससे उन्हें निजी साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। यह उनकी खेती की लागत को बढ़ा रहा है।
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सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह चंबल पंप नहर है और इसमें हर वर्ष पानी छोड़ा जाता है। इसका संचालन चंबल नदी के जलस्तर पर निर्भर करता है। जलस्तर कम होने पर पंपिंग प्रभावित होती है, जिससे पानी की आपूर्ति रोकनी पड़ती है। जलस्तर सामान्य होने पर नहर का संचालन फिर शुरू किया जाता है।
उदी क्षेत्र के ग्राम हवेली भटपुरा निवासी भारत तिवारी ने बताया कि नहर की लगभग दो वर्ष पूर्व सफाई तो हुई थी लेकिन पानी कभी नहीं आया। इसके कारण आसपास के किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए निजी नलकूपों से पानी लेना पड़ता है इससे परेशानी होती है।
किसान रामकुमार ने बताया कि जब नहर निर्माण का कार्य शुरू हुआ था, तब अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने बड़े-बड़े वादे किए थे। कहा गया था कि नहर बनने के बाद खेतों तक पानी पहुंचेगा और खेती की तस्वीर बदल जाएगी। लेकिन आज हालत यह है कि नहर केवल वादों और कागजों तक सीमित होकर रह गई है।
चंबल पंप कैनाल सामान्य नहरों से अलग एक लिफ्ट सिंचाई परियोजना है। इसमें चंबल नदी से पानी को पंपों की मदद से ऊंचाई पर उठाकर नहर में छोड़ा जाता है। सामान्य नहरों में पानी ढाल के सहारे बहता है, जबकि पंप कैनाल का संचालन पूरी तरह पंपिंग व्यवस्था, बिजली आपूर्ति और नदी के जलस्तर पर निर्भर करता है। जलस्तर कम होने या पंपिंग में तकनीकी दिक्कत आने पर पानी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी कारण सिंचाई विभाग चंबल पंप नहर में पानी की उपलब्धता को चंबल नदी की स्थिति और पंप संचालन से जोड़कर देखता है।
राजा महेंद्र सिंह चंबल डाल नहर में पानी छोड़ा जाता है, बीते वर्ष नहर की सफाई भी करवाई गई थी। यह नहर चंबल के जलस्तर पर निर्भर रहती है। फिलहाल चंबल का जलस्तर कम है, इसलिए पंप पानी नहीं उठा पा रहे है। इसकी वजह से नहर में पानी नहीं जा रहा है। किन कारणों से इटावा क्षेत्र में पानी नहीं पहुंच रहा है, टीम बनाकर इस संबंध में जांच करवाएंगें।
-नीरज, एक्सईएन, नहर विभाग, आगरा
राजा महेंद्र सिंह चंबल डाल नहर परियोजना आगरा और इटावा के बीहड़ क्षेत्र में सिंचाई समस्या के समाधान के लिए शुरू हुई थी। 50 से अधिक गांवों को लाभान्वित करने के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। किसानों को बेहतर सिंचाई, अधिक फसल उत्पादन और कम खेती लागत का भरोसा दिया गया था। लेकिन अब नहर में कई स्थानों पर झाड़-झंखाड़ उग आए हैं और पानी नहीं है। नहर किनारे के किसान कहते हैं कि उन्होंने वर्षों से इसमें पानी नहीं देखा। खरीफ और रबी सीजन में भी उन्हें सिंचाई की उम्मीद नहीं मिलती। किसानों को निजी ट्यूबवेल, सबमर्सिबल और डीजल पंप से सिंचाई करनी पड़ती है। इससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और छोटे किसान सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद परियोजना का लाभ नहीं मिल रहा है। किसान पूछते हैं कि यदि पानी छोड़ा जाता है तो नहर सूखी क्यों है और टेल तक क्यों नहीं पहुंचता।
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किसानों का आरोप है कि नहर के रखरखाव और जल वितरण व्यवस्था की निगरानी प्रभावी नहीं है। उन्हें वर्षों से नहर में पानी नहीं मिला है। इससे उन्हें निजी साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। यह उनकी खेती की लागत को बढ़ा रहा है।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह चंबल पंप नहर है और इसमें हर वर्ष पानी छोड़ा जाता है। इसका संचालन चंबल नदी के जलस्तर पर निर्भर करता है। जलस्तर कम होने पर पंपिंग प्रभावित होती है, जिससे पानी की आपूर्ति रोकनी पड़ती है। जलस्तर सामान्य होने पर नहर का संचालन फिर शुरू किया जाता है।
उदी क्षेत्र के ग्राम हवेली भटपुरा निवासी भारत तिवारी ने बताया कि नहर की लगभग दो वर्ष पूर्व सफाई तो हुई थी लेकिन पानी कभी नहीं आया। इसके कारण आसपास के किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए निजी नलकूपों से पानी लेना पड़ता है इससे परेशानी होती है।
किसान रामकुमार ने बताया कि जब नहर निर्माण का कार्य शुरू हुआ था, तब अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने बड़े-बड़े वादे किए थे। कहा गया था कि नहर बनने के बाद खेतों तक पानी पहुंचेगा और खेती की तस्वीर बदल जाएगी। लेकिन आज हालत यह है कि नहर केवल वादों और कागजों तक सीमित होकर रह गई है।
चंबल पंप कैनाल सामान्य नहरों से अलग एक लिफ्ट सिंचाई परियोजना है। इसमें चंबल नदी से पानी को पंपों की मदद से ऊंचाई पर उठाकर नहर में छोड़ा जाता है। सामान्य नहरों में पानी ढाल के सहारे बहता है, जबकि पंप कैनाल का संचालन पूरी तरह पंपिंग व्यवस्था, बिजली आपूर्ति और नदी के जलस्तर पर निर्भर करता है। जलस्तर कम होने या पंपिंग में तकनीकी दिक्कत आने पर पानी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी कारण सिंचाई विभाग चंबल पंप नहर में पानी की उपलब्धता को चंबल नदी की स्थिति और पंप संचालन से जोड़कर देखता है।
राजा महेंद्र सिंह चंबल डाल नहर में पानी छोड़ा जाता है, बीते वर्ष नहर की सफाई भी करवाई गई थी। यह नहर चंबल के जलस्तर पर निर्भर रहती है। फिलहाल चंबल का जलस्तर कम है, इसलिए पंप पानी नहीं उठा पा रहे है। इसकी वजह से नहर में पानी नहीं जा रहा है। किन कारणों से इटावा क्षेत्र में पानी नहीं पहुंच रहा है, टीम बनाकर इस संबंध में जांच करवाएंगें।
-नीरज, एक्सईएन, नहर विभाग, आगरा