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Farrukhabad News: एसडीएम कोर्ट से आदेश के तीन वर्ष बाद भी नहीं हो सकी पैमाइश
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अमृतपुर। तहसील क्षेत्र में मेड़बंदी और भूमि पैमाइश के कार्यों में लगातार देरी से किसान परेशान हैं। सर्वेश शाक्य जैसे कई किसान अधिकारियों और कानूनगो के चक्कर काटने को मजबूर हैं। पैमाइश के नाम पर दलालों के जरिए हजारों रुपये की रिश्वत ली जा रही है।
गांव उधरनपुर लीलापुर निवासी रामकुमार और राजवीर ने खेत की पैमाइश के लिए एसडीएम न्यायालय में धारा 24 के तहत वाद दायर किया था। वर्ष 2019 में कच्ची पैमाइश के आदेश दिए गए थे। इसके बाद एक नवंबर 2023 को तत्कालीन एसडीएम रवींद्र सिंह ने पक्की पैमाइश कर पत्थर लगाने के निर्देश दिए लेकिन तीन साल बाद भी कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। कनकापुर निवासी शिवा के मामले में मेड़बंदी का आदेश होने के बावजूद छह माह से कार्रवाई लंबित है। नगला रामप्रसाद निवासी संतराम की कच्ची पैमाइश तो हो गई लेकिन एक वर्ष बाद भी पक्की पैमाइश के लिए पत्रावली एसडीएम न्यायालय नहीं भेजी गई।
किसान की मृत्यु के बाद भी नहीं हो सकी पैमाइश
अमैयापुर निवासी मुनेश्वर सिंह एक साल तक पैमाइश के लिए भटकते रहे लेकिन उनके खेत की पैमाइश नहीं हो सकी। इस बीच उनकी मृत्यु भी हो गई। पर पैमाइश अभी तक नहीं हो सकी है। किसानों का कहना है कि लेखपाल और कानूनगो जानबूझकर देरी करते हैं और दलालों के माध्यम से अवैध वसूली करते हैं। विरासत दर्ज कराने और मेड़बंदी जैसे कार्यों में भी हजारों रुपये का लेनदेन आम बात हो गई है। एसडीएम संजय कुमार सिंह ने बताया कि मेड़बंदी न होने की शिकायतें मिली हैं। पांच वर्ष की पत्रावलियों की समीक्षा कर समस्याओं का समाधान कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि कटरी क्षेत्र में पैमाइश में दिक्कतें आती है लेकिन अब शासन से एक मशीन मिली है। कानून गो की ट्रेनिंग भी हो गई है। अब कटरी क्षेत्र में पैमाइश करने में दिक्कत नहीं होगी।
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गांव उधरनपुर लीलापुर निवासी रामकुमार और राजवीर ने खेत की पैमाइश के लिए एसडीएम न्यायालय में धारा 24 के तहत वाद दायर किया था। वर्ष 2019 में कच्ची पैमाइश के आदेश दिए गए थे। इसके बाद एक नवंबर 2023 को तत्कालीन एसडीएम रवींद्र सिंह ने पक्की पैमाइश कर पत्थर लगाने के निर्देश दिए लेकिन तीन साल बाद भी कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। कनकापुर निवासी शिवा के मामले में मेड़बंदी का आदेश होने के बावजूद छह माह से कार्रवाई लंबित है। नगला रामप्रसाद निवासी संतराम की कच्ची पैमाइश तो हो गई लेकिन एक वर्ष बाद भी पक्की पैमाइश के लिए पत्रावली एसडीएम न्यायालय नहीं भेजी गई।
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किसान की मृत्यु के बाद भी नहीं हो सकी पैमाइश
अमैयापुर निवासी मुनेश्वर सिंह एक साल तक पैमाइश के लिए भटकते रहे लेकिन उनके खेत की पैमाइश नहीं हो सकी। इस बीच उनकी मृत्यु भी हो गई। पर पैमाइश अभी तक नहीं हो सकी है। किसानों का कहना है कि लेखपाल और कानूनगो जानबूझकर देरी करते हैं और दलालों के माध्यम से अवैध वसूली करते हैं। विरासत दर्ज कराने और मेड़बंदी जैसे कार्यों में भी हजारों रुपये का लेनदेन आम बात हो गई है। एसडीएम संजय कुमार सिंह ने बताया कि मेड़बंदी न होने की शिकायतें मिली हैं। पांच वर्ष की पत्रावलियों की समीक्षा कर समस्याओं का समाधान कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि कटरी क्षेत्र में पैमाइश में दिक्कतें आती है लेकिन अब शासन से एक मशीन मिली है। कानून गो की ट्रेनिंग भी हो गई है। अब कटरी क्षेत्र में पैमाइश करने में दिक्कत नहीं होगी।
