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Farrukhabad News: दरोगा, सिपाही पर मारपीट व रुपये छीनने का आरोप
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फर्रुखाबाद। राजेपुर थाने के दरोगा और एक सिपाही पर गंभीर आरोप लगे हैं। एक व्यक्ति ने उन पर थाने बुलाकर मारपीट करने और 30 हजार रुपये व अन्य सामान छीनने का आरोप लगाया है। इस मामले में पीड़ित ने न्यायालय में अर्जी देकर आरोपियों पर प्राथमिकी दर्ज करने और विभागीय कार्रवाई की मांग की है।
स्वास्थ्य विभाग में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत शशिकांत ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया है। शशिकांत के अनुसार, 22 मई को उन्होंने थाने में एक लिखित शिकायत की थी। अगले दिन 23 मई को उन्हें एक मोबाइल नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को राजेपुर थाने में तैनात सिपाही बताया। उसने कहा कि थाना प्रभारी ने उन्हें तत्काल थाने बुलाया है।
शशिकांत ने बताया कि तब वह कायमगंज स्थित अस्पताल में ड्यूटी पर थे। वह ड्यूटी से अनुमति लेकर दोपहर करीब सवा दो बजे राजेपुर थाना पहुंचे। वहां थाना प्रभारी, उपनिरीक्षक रामबाबू, सिपाही मुकेश कुमार और अन्य पुलिसकर्मी मौजूद थे। उन्होंने अभद्रता और गाली-गलौज की। विरोध करने पर कथित रूप से मारपीट की गई। उन्हें थाने की हवालात में बंद कर दिया गया।
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रुपये और सामान छीनने का आरोप
पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि उन्होंने शशिकांत के पास मौजूद 30 हजार रुपये छीन लिए। ये रुपये घरेलू कार्यों के लिए रखे गए थे। उनकी बेल्ट और अन्य दस्तावेज भी कब्जे में ले लिए गए। जब शशिकांत ने रुपये वापस मांगे तो उन्हें धमकाया गया। पुलिसकर्मियों ने कहा कि वह विभिन्न धाराओं में निरुद्ध हैं। अधिक विरोध करने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
शांतिभंग का चालान और शिकायत पर कार्रवाई नहीं
बाद में शशिकांत का शांतिभंग, सार्वजनिक उपद्रव और शांति बनाए रखने की धाराओं में चालान कर दिया गया। जमानत पर रिहा होने के बाद भी उन्होंने अपने रुपये और सामान वापस पाने का प्रयास किया। हालांकि, इस संबंध में कोई सुनवाई नहीं हुई। शशिकांत ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी मूल शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने 29 मई को पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र भेजा था, लेकिन उस पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई।
स्वास्थ्य विभाग में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत शशिकांत ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया है। शशिकांत के अनुसार, 22 मई को उन्होंने थाने में एक लिखित शिकायत की थी। अगले दिन 23 मई को उन्हें एक मोबाइल नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को राजेपुर थाने में तैनात सिपाही बताया। उसने कहा कि थाना प्रभारी ने उन्हें तत्काल थाने बुलाया है।
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शशिकांत ने बताया कि तब वह कायमगंज स्थित अस्पताल में ड्यूटी पर थे। वह ड्यूटी से अनुमति लेकर दोपहर करीब सवा दो बजे राजेपुर थाना पहुंचे। वहां थाना प्रभारी, उपनिरीक्षक रामबाबू, सिपाही मुकेश कुमार और अन्य पुलिसकर्मी मौजूद थे। उन्होंने अभद्रता और गाली-गलौज की। विरोध करने पर कथित रूप से मारपीट की गई। उन्हें थाने की हवालात में बंद कर दिया गया।
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पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि उन्होंने शशिकांत के पास मौजूद 30 हजार रुपये छीन लिए। ये रुपये घरेलू कार्यों के लिए रखे गए थे। उनकी बेल्ट और अन्य दस्तावेज भी कब्जे में ले लिए गए। जब शशिकांत ने रुपये वापस मांगे तो उन्हें धमकाया गया। पुलिसकर्मियों ने कहा कि वह विभिन्न धाराओं में निरुद्ध हैं। अधिक विरोध करने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
शांतिभंग का चालान और शिकायत पर कार्रवाई नहीं
बाद में शशिकांत का शांतिभंग, सार्वजनिक उपद्रव और शांति बनाए रखने की धाराओं में चालान कर दिया गया। जमानत पर रिहा होने के बाद भी उन्होंने अपने रुपये और सामान वापस पाने का प्रयास किया। हालांकि, इस संबंध में कोई सुनवाई नहीं हुई। शशिकांत ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी मूल शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने 29 मई को पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र भेजा था, लेकिन उस पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई।