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पंचायत चुनाव: तीन बार बार प्रधानी हारे बृजेश, इस बार जीते तो पता चला कि छोड़ चुके हैं दुनियां
Mon, 03 May 2021 08:50 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 03 May 2021 08:50 PM IST
सार
फर्रुखाबाद में मोहम्मदाबाद के रैसेपुर निवासी प्रधान प्रत्याशी बृजेश सिंह राजपूत बीते तीन चुनाव में आठ, एक और दो मतों के अंतर से प्रधान पद का चुनाव हार चुके थे।
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पंचायत चुनाव मतगणना
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
फर्रुखाबाद में मोहम्मदाबाद के रैसेपुर निवासी प्रधान प्रत्याशी बृजेश सिंह राजपूत बीते तीन चुनाव में आठ, एक और दो मतों के अंतर से प्रधान पद का चुनाव हार चुके थे।
इस बार चुनाव में उन्हें जनता ने कुर्सी तक पहुंचा दिया, लेकिन परिणाम आने से पहले ही वह दुनिया छोड़ गए। सोमवार को मतगणना हुई तो वह 144 वोटों से जीत गए, लेकिन प्रमाणपत्र लेने के लिए वह इस दुुनिया में नहीं थे।
बृजेश सिंह को प्रधान पद के प्रचार के दौरान बुखार आया। 29 अप्रैल को मतदान के दिन कमजोरी की वजह से उन्हें परिजन सहारा देकर वोट डलवाने ले गए। 30 अप्रैल को उनकी तबीयत बिगड़ गई तो मैनपुरी के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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वहां भी हालत में सुधार नहीं हुआ और रात में मौत हो गई। सोमवार रात मतगणना हुई तो वह विजयी घोषित किए गए। इससे पहले बृजेश ने पहला चुनाव वर्ष 2005 में लड़ा और आठ वोट से हार गए।
दूसरा चुनाव 2010 में लड़ा जिसमें उन्हें मात्र एक वोट कम मिलने से हार का सामना करना पड़ा था। वर्ष 2015 के चुनाव में दो वोट कम पड़ जाने से वह चुनाव हार गए थे। इस बार जब विजयश्री मिली तो इस खुशी को मनाने के लिए वह मौजूद नहीं थे।
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इस बार चुनाव में उन्हें जनता ने कुर्सी तक पहुंचा दिया, लेकिन परिणाम आने से पहले ही वह दुनिया छोड़ गए। सोमवार को मतगणना हुई तो वह 144 वोटों से जीत गए, लेकिन प्रमाणपत्र लेने के लिए वह इस दुुनिया में नहीं थे।
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बृजेश सिंह को प्रधान पद के प्रचार के दौरान बुखार आया। 29 अप्रैल को मतदान के दिन कमजोरी की वजह से उन्हें परिजन सहारा देकर वोट डलवाने ले गए। 30 अप्रैल को उनकी तबीयत बिगड़ गई तो मैनपुरी के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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वहां भी हालत में सुधार नहीं हुआ और रात में मौत हो गई। सोमवार रात मतगणना हुई तो वह विजयी घोषित किए गए। इससे पहले बृजेश ने पहला चुनाव वर्ष 2005 में लड़ा और आठ वोट से हार गए।
दूसरा चुनाव 2010 में लड़ा जिसमें उन्हें मात्र एक वोट कम मिलने से हार का सामना करना पड़ा था। वर्ष 2015 के चुनाव में दो वोट कम पड़ जाने से वह चुनाव हार गए थे। इस बार जब विजयश्री मिली तो इस खुशी को मनाने के लिए वह मौजूद नहीं थे।