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Farrukhabad News: चार बीघा खेत के लिए छह माह से भ्रष्ट सिस्टम से जूझ रहा था किसान
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नवाबगंज। थाना क्षेत्र के गांव वीरपुर नादी निवासी सर्वेश शाक्य के पिता उजागर लाल की सात वर्ष पूर्व मौत हो गई थी। उसका भाई राम प्रकाश है। दोनों खेती करते हैं। मां मुन्नी देवी ने अपने हिस्से की जमीन दोनों भाइयों के नाम कर दी थी।
उसके मकान के सामने सड़क के किनारे गाटा संख्या 6626 व 6627 में उसका 10 बीघा खेत है। पास में ही गाटा संख्या 6628 राकेश दिवाकर के नाम दर्ज है। यह लगभग चार बीघा का खेत है। इस खेत के बीच से सड़क निकल जाने से वह दो भाग बंट गया। राकेश ने अपना पूरा चार बीघा खेत पड़ोसी गांव नादी नगला निवासी किसान को बेच दिया। उसने अपने परिवार के ही किसान को खेत दे दिया। सर्वेश का आरोप है कि करीब छह माह पूर्व क्षेत्रीय लेखपाल व कानूनगो विमल श्रीवास्तव ने 80000 रुपये दूसरे पक्ष से लेकर भूमि पैमाइश की। इसमें कानूनगो ने कमल ठाकुर की चार बीघा भूमि सर्वेश के दस बीघा के खेत में निकाल दी। चिह्नांकन करने के साथ सीमेंट के खंभे भी लगवा दिए। इसके बाद से ही सर्वेश अपने चार बीघा खेत को बचाने के लिए अधिकारियों, कानूनगो व लेखपाल के चक्कर लगा था। इस बीच करीब तीन माह पूर्व लेखपाल का क्षेत्र बदलने पर उसे नए लेखपाल को अपनी पीड़ा बताई। इस पर उस लेखपाल ने उससे 14 हजार रुपये पैमाइश के नाम पर ले लिए और उसने भी पैमाइश नहीं की। इससे सर्वेश परेशान था।
15 दिन पूर्व कानूनगो ने फोन कर सर्वेश को था बुलाया
सर्वेश बताते हैं कि पक्की पैमाइश के लिए 6 माह पूर्व उसने ऑनलाइन आवेदन किया था। तब वह लटका ही था। 15 दिन पूर्व कानूनगो विमल श्रीवास्तव ने फोन जानकारी दी पैमाइश संबंधी आदेश उनके पास आ गया है। पर पैमाइश से पहले उससे मिलना जरूरी है। कानूनगो के पास पहुंचने उसने 80 हजार रुपये की मांग की। इस पर उसने देने में असमर्थता जताई। बाद में एक परिचित से सिफारिश कराने पर 40 हजार रुपये में पैमाइश होने की बात तय हो गई। पर उसके पास 40 हजार रुपये भी नहीं थे। इससे पवन सक्सेना से कुछ रुपये कम कराने को कहा तो उसे 30 हजार में बात तय करवा दी। बिना रुपये के पैमाइश होती न देख उसने एंटी करप्शन थाना में शिकायत कर दी।
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उसके मकान के सामने सड़क के किनारे गाटा संख्या 6626 व 6627 में उसका 10 बीघा खेत है। पास में ही गाटा संख्या 6628 राकेश दिवाकर के नाम दर्ज है। यह लगभग चार बीघा का खेत है। इस खेत के बीच से सड़क निकल जाने से वह दो भाग बंट गया। राकेश ने अपना पूरा चार बीघा खेत पड़ोसी गांव नादी नगला निवासी किसान को बेच दिया। उसने अपने परिवार के ही किसान को खेत दे दिया। सर्वेश का आरोप है कि करीब छह माह पूर्व क्षेत्रीय लेखपाल व कानूनगो विमल श्रीवास्तव ने 80000 रुपये दूसरे पक्ष से लेकर भूमि पैमाइश की। इसमें कानूनगो ने कमल ठाकुर की चार बीघा भूमि सर्वेश के दस बीघा के खेत में निकाल दी। चिह्नांकन करने के साथ सीमेंट के खंभे भी लगवा दिए। इसके बाद से ही सर्वेश अपने चार बीघा खेत को बचाने के लिए अधिकारियों, कानूनगो व लेखपाल के चक्कर लगा था। इस बीच करीब तीन माह पूर्व लेखपाल का क्षेत्र बदलने पर उसे नए लेखपाल को अपनी पीड़ा बताई। इस पर उस लेखपाल ने उससे 14 हजार रुपये पैमाइश के नाम पर ले लिए और उसने भी पैमाइश नहीं की। इससे सर्वेश परेशान था।
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15 दिन पूर्व कानूनगो ने फोन कर सर्वेश को था बुलाया
सर्वेश बताते हैं कि पक्की पैमाइश के लिए 6 माह पूर्व उसने ऑनलाइन आवेदन किया था। तब वह लटका ही था। 15 दिन पूर्व कानूनगो विमल श्रीवास्तव ने फोन जानकारी दी पैमाइश संबंधी आदेश उनके पास आ गया है। पर पैमाइश से पहले उससे मिलना जरूरी है। कानूनगो के पास पहुंचने उसने 80 हजार रुपये की मांग की। इस पर उसने देने में असमर्थता जताई। बाद में एक परिचित से सिफारिश कराने पर 40 हजार रुपये में पैमाइश होने की बात तय हो गई। पर उसके पास 40 हजार रुपये भी नहीं थे। इससे पवन सक्सेना से कुछ रुपये कम कराने को कहा तो उसे 30 हजार में बात तय करवा दी। बिना रुपये के पैमाइश होती न देख उसने एंटी करप्शन थाना में शिकायत कर दी।
