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Farrukhabad News: गन्ने की कमी से लक्ष्य अधूरा
संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
Updated Mon, 26 Jan 2026 01:39 AM IST
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कायमगंज। तराई क्षेत्र में आई बाढ़ से गन्ने की फसल को भारी नुकसान हुआ है। करीब 2500 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल बर्बाद होने के चलते कायमगंज चीनी मिल का पेराई सत्र समय से पहले बंद होने की कगार पर पहुंच गया है। गन्ने की कमी को देखते हुए मिल प्रशासन ने बिना पर्ची के गन्ना खरीद शुरू कर दी है, वहीं बंदी का अंतिम नोटिस भी जारी कर दिया गया है।
गन्ने की कम आवक के कारण हाजियांपुर क्रय केंद्र को बंद कर दिया गया है, जबकि पांच अन्य क्रय केंद्रों को बंदी का नोटिस जारी किया गया है। इसके बावजूद मिल को अपेक्षित मात्रा में गन्ना नहीं मिल पा रहा है। इस पेराई सत्र की शुरुआत 19 नवंबर से हुई थी। अब तक 7.15 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हो चुकी है। इससे लगभग 6500 क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ है। हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में इस समय तक करीब डेढ़ लाख क्विंटल गन्ने की अधिक पेराई हुई है, लेकिन बाढ़ के कारण आगे गन्ना मिलना मुश्किल हो गया है।
पिछले वर्ष 4500 हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती हुई थी, जबकि इस वर्ष यह घटकर 4000 हेक्टेयर रह गई। इनमें से तराई क्षेत्र के 2500 हेक्टेयर में बाढ़ से फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। गन्ने के अभाव में मिल को 16 लाख क्विंटल पेराई का लक्ष्य पूरा करना कठिन नजर आ रहा है।
सीसीओ प्रमोद यादव ने बताया कि गन्ने की कमी के चलते बिना पर्ची के गन्ना खरीदा जा रहा है लेकिन इसके बावजूद पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल रही है। अनुमान है कि पेराई कार्य तीन फरवरी तक ही चल सकेगा।
जीएम रमेश सिंह ने बताया कि बाढ़ से गन्ने की फसल को भारी नुकसान हुआ है। इससे मिल को पर्याप्त गन्ना नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में तय लक्ष्य हासिल कर पाना मुश्किल है।
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गन्ने की कम आवक के कारण हाजियांपुर क्रय केंद्र को बंद कर दिया गया है, जबकि पांच अन्य क्रय केंद्रों को बंदी का नोटिस जारी किया गया है। इसके बावजूद मिल को अपेक्षित मात्रा में गन्ना नहीं मिल पा रहा है। इस पेराई सत्र की शुरुआत 19 नवंबर से हुई थी। अब तक 7.15 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हो चुकी है। इससे लगभग 6500 क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ है। हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में इस समय तक करीब डेढ़ लाख क्विंटल गन्ने की अधिक पेराई हुई है, लेकिन बाढ़ के कारण आगे गन्ना मिलना मुश्किल हो गया है।
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पिछले वर्ष 4500 हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती हुई थी, जबकि इस वर्ष यह घटकर 4000 हेक्टेयर रह गई। इनमें से तराई क्षेत्र के 2500 हेक्टेयर में बाढ़ से फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। गन्ने के अभाव में मिल को 16 लाख क्विंटल पेराई का लक्ष्य पूरा करना कठिन नजर आ रहा है।
सीसीओ प्रमोद यादव ने बताया कि गन्ने की कमी के चलते बिना पर्ची के गन्ना खरीदा जा रहा है लेकिन इसके बावजूद पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल रही है। अनुमान है कि पेराई कार्य तीन फरवरी तक ही चल सकेगा।
जीएम रमेश सिंह ने बताया कि बाढ़ से गन्ने की फसल को भारी नुकसान हुआ है। इससे मिल को पर्याप्त गन्ना नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में तय लक्ष्य हासिल कर पाना मुश्किल है।
