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Farrukhabad News: अवैध असलहा रखने में तीन को तीन वर्ष का कारावास
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फर्रुखाबाद। प्राथमिकी दर्ज की पैरवी की रंजिश में वर्ष 2015 में हुई किसान की हत्या के मामले में अदालत ने सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए हत्या के आरोप से बरी कर दिया। हालांकि अवैध असलहा रखने के मामले में तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
थाना नवाबगंज के गांव नगला हीरा सिंह निवासी वीर सिंह ने 14 जून 2015 को अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि उनके पिता दाताराम रात में भोजन के बाद घर के बाहर चबूतरे पर सो रहे थे। करीब 12:30 बजे फायरिंग की आवाज सुनकर परिवार के लोग बाहर पहुंचे तो देखा कि दाताराम के बाईं कनपटी और कोख में गोली लगी थी। घायल अवस्था में उन्हें सीएचसी नवाबगंज ले जाया गया। वहां से लोहिया अस्पताल रेफर किया गया। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले की विवेचना कर राजू अवस्थी, रवींद्र, गीता, मूलचंद्र निवासी नगला हीरा सिंह तथा महावीर सिंह व जबर सिंह निवासी घुमइया रसूलपुर को आरोपी बनाया और उनके विरुद्ध हत्या व अवैध असलहा रखने के आरोप में आरोप पत्र दाखिल किया। मामले में गीता की विवेचना सीबीसीआईडी को सौंप दी गई। विवेचक विवेक कुमार त्रिपाठी ने गीता के विरुद्ध षड्यंत्र में सहयोग करने का आरोप पत्र दाखिल किया।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट अभिनितम उपाध्याय ने दोनों पक्षों की दलीलें और गवाहों के बयान सुनने के बाद हत्या के आरोप में सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। हालांकि अदालत ने अवैध असलहा रखने के मामले में मूलचंद्र, जबर सिंह और महावीर सिंह को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह के अतिरिक्त कारावास का प्रावधान किया।
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थाना नवाबगंज के गांव नगला हीरा सिंह निवासी वीर सिंह ने 14 जून 2015 को अज्ञात के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि उनके पिता दाताराम रात में भोजन के बाद घर के बाहर चबूतरे पर सो रहे थे। करीब 12:30 बजे फायरिंग की आवाज सुनकर परिवार के लोग बाहर पहुंचे तो देखा कि दाताराम के बाईं कनपटी और कोख में गोली लगी थी। घायल अवस्था में उन्हें सीएचसी नवाबगंज ले जाया गया। वहां से लोहिया अस्पताल रेफर किया गया। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले की विवेचना कर राजू अवस्थी, रवींद्र, गीता, मूलचंद्र निवासी नगला हीरा सिंह तथा महावीर सिंह व जबर सिंह निवासी घुमइया रसूलपुर को आरोपी बनाया और उनके विरुद्ध हत्या व अवैध असलहा रखने के आरोप में आरोप पत्र दाखिल किया। मामले में गीता की विवेचना सीबीसीआईडी को सौंप दी गई। विवेचक विवेक कुमार त्रिपाठी ने गीता के विरुद्ध षड्यंत्र में सहयोग करने का आरोप पत्र दाखिल किया।
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अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट अभिनितम उपाध्याय ने दोनों पक्षों की दलीलें और गवाहों के बयान सुनने के बाद हत्या के आरोप में सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। हालांकि अदालत ने अवैध असलहा रखने के मामले में मूलचंद्र, जबर सिंह और महावीर सिंह को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह के अतिरिक्त कारावास का प्रावधान किया।