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Fatehpur News: रसोई गैस सिलिंडर फटने से आयुर्वेद दवा कारखाने में आग लगी, पांच झुलसे
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फोटो-24-मकान पर चढ़कर आग बुझाने का प्रयास करते ग्रामीण। संवाद
- फोटो : kathua news
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ललौली/फतेहपुर। रसोई गैस सिलिंडर फटने से आयुर्वेद दवा कारखाने में सोमवार शाम आग लग गई। धमाका इतना तेज था कि गैस सिलिंडर के टुकड़े के साथ संचालक करीब 20 फीट दूर बाहर सड़क पर गिरा। हादसे में संचालक के अलावा परिवार के चार लोग गंभीर रूप से झुलस गए। सभी को जिला अस्पताल से कानपुर हैलट रेफर किया गया है। ग्रामीणों, पुलिस व दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। एसडीएम, सीओ समेत अन्य अफसर मौके पर पहुंचे। 50 लाख से अधिक का नुकसान होने का आकलन किया जा रहा है। आग भड़कने का कारण दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाला केमिकल बताया जा रहा है।
गाजीपुर थाने के खेसहन निवासी डॉ. जमील अहमद कुरैशी (65) करीब 30 वर्ष से ललौली थाना क्षेत्र के बहुआ कस्बे के आजाद नगर मोहल्ला में होम्योपैथी और आयुर्वेदिक दवाओं का क्लीनिक चलाते हैं। करीब 10 वर्ष पहले मकान बनाकर न्यू किरन फार्मेसी नाम से आयुर्वेद दवाओं का कारखाना संचालित करते हैं।
घर में शीतल ब्रांड का तेल, मरहम, चूर्ण समेत कई आयुर्वेदिक दवाएं बनाते हैं। इसमें कई ज्वलनशील पदार्थ कपूर, पिपरमिंट, अलसी का तेल समेत कई केमिकल का इस्तेमाल होता है। दवा कारखाना में शाम को अचानक रसोई गैस सिलिंडर फटने से शाम को आग लग गई।
तेज धमाके से जमील सिलिंडर के टुकड़ों के साथ बाहर आकर गिरे। तेज धमाके की आवाज सुनकर लोग दौड़ पड़े। केमिकल के संपर्क में आते ही गैस से आग लग गई। कुछ ही देर में आग दूसरी मंजिल तक पहुंच गई। लोगों ने कारखाने में फंसे जमील के पुत्र अकील अहमद कुरैशी (26), छोटे पुत्र उजैफा कुरैशी (13) और जमील अहमद कुरैशी के साले का पुत्र अबू सहमा (15) पुत्र मन्नान कुरैशी निवासी चिलौला थाना लालगंज जनपद रायबरेली, भांजे महबूब अली की पुत्री बुशरा खातून (10) निवासी बहुआ को बाहर निकाला।
हालांकि तब तक सभी लोग झुलस गए थे। जमील की पत्नी और बहू मकान के दूसरे हिस्से में थे। वह दोनों सुरक्षित हैं। ग्रामीणों में दरवाजे तोड़कर दूसरे कमरे में रखे दो रसोई गैस सिलिंडर आग की चपेट में आने से पहले ही बाहर निकाल लिए।
आग लगने से कारखाने में खड़ी स्कूटी में भी आग लग गई। स्थानीय लोगों ने डिब्बा, बाल्टी, सबमर्सिबल पंप, ट्यूबवेल की मदद से आग पर काबू पाने की कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली। हादसे के करीब 30 मिनट के बाद दो दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंची और दो घंटे में आग की लपटों पर काबू पा सकीं।
एसडीएम सदर अनामिका श्रीवास्तव, तहसीलदार अमरेश सिंह, सीओ जाफरगंज ब्रजमोहन राय, नायब तहसीलदार रजनीश श्रीवास्तव ने पहुंचकर जांच की। सीओ ने बताया कि आग लगने के कारण की जांच की जा रही है। उधर, सीएफओ जसबीर सिंह ने बताया कि रसोई गैस सिलिंडर लीकेज होने से आग लगी है। दवा कारखाने में गैस केमिकल के संपर्क में आ गई। इससे आग भड़क गई। इससे सिलिंडर फट गया।
एनओसी नहीं मिली, आयुर्वेद विभाग में है पंजीकृत कारखाना
दमकल विभाग के मुताबिक कारखाने की एनओसी नहीं मिली है। इससे साफ है कि चोरी छिपे कारोबार किया जा रहा था। उधर क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी नवीन कुमार ने बताया कि न्यू किरन फार्मेसी कारखाना विभाग में पंजीकृत है। कई बार संचालक से पूछताछ की गई। उन्होंने कारखाना संचालित नहीं होने की बात कही है। मौके पर दवाओं की पैकिंग के ढक्कन व अन्य सामग्री दमकल कर्मियों को मिली है।
ग्रामीण और पुलिस की मशक्कत
ग्रामीणों के साथ बहुआ चौकी पुलिस के कर्मियों ने भी आग बुझाने में मदद की। पुलिस ने बताया कि घर में रखी सारी गृहस्थी और कारखाने में रखी दवाएं, शीतल तेल समेत पूरा सामान जल गया है। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित कर किसी तरह से घटनास्थल से दूर रखा। आग लगने की सूचना के एक घंटे बाद दमकल की सदर और बिंदकी से टीम पहुंची।
दूसरे रसोई गैस सिलिंडर फटते तो और भी बड़ा होता हादसा
मोहल्ले के लोगों ने बताया कि आग लगने के बाद डाॅ. जमील कुरैशी बाहर गिरे। इसके बाद भी वह आग बुझाने लगे। कारखाने में दो और गैस सिलिंडर रखे थे। उन तक आग नहीं पहुंच सकी थी। उन सिलिंडर को दरवाजा तोड़कर ग्रामीणों ने बाहर निकाल लिया। गनीमत तो यह रही कि डॉ. जमील की पत्नी और बहू किसी तरह से बाहर निकल आए। दवा कारखाने से करीब 20 मीटर दूर एक निजी स्कूल बना है। बच्चों की छुट्टी हो चुकी थी। यही हादसा दोपहर के स्कूल चलने के समय होता तो आते-जाते बच्चे भी चपेट में आ सकते थे।
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गाजीपुर थाने के खेसहन निवासी डॉ. जमील अहमद कुरैशी (65) करीब 30 वर्ष से ललौली थाना क्षेत्र के बहुआ कस्बे के आजाद नगर मोहल्ला में होम्योपैथी और आयुर्वेदिक दवाओं का क्लीनिक चलाते हैं। करीब 10 वर्ष पहले मकान बनाकर न्यू किरन फार्मेसी नाम से आयुर्वेद दवाओं का कारखाना संचालित करते हैं।
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घर में शीतल ब्रांड का तेल, मरहम, चूर्ण समेत कई आयुर्वेदिक दवाएं बनाते हैं। इसमें कई ज्वलनशील पदार्थ कपूर, पिपरमिंट, अलसी का तेल समेत कई केमिकल का इस्तेमाल होता है। दवा कारखाना में शाम को अचानक रसोई गैस सिलिंडर फटने से शाम को आग लग गई।
तेज धमाके से जमील सिलिंडर के टुकड़ों के साथ बाहर आकर गिरे। तेज धमाके की आवाज सुनकर लोग दौड़ पड़े। केमिकल के संपर्क में आते ही गैस से आग लग गई। कुछ ही देर में आग दूसरी मंजिल तक पहुंच गई। लोगों ने कारखाने में फंसे जमील के पुत्र अकील अहमद कुरैशी (26), छोटे पुत्र उजैफा कुरैशी (13) और जमील अहमद कुरैशी के साले का पुत्र अबू सहमा (15) पुत्र मन्नान कुरैशी निवासी चिलौला थाना लालगंज जनपद रायबरेली, भांजे महबूब अली की पुत्री बुशरा खातून (10) निवासी बहुआ को बाहर निकाला।
हालांकि तब तक सभी लोग झुलस गए थे। जमील की पत्नी और बहू मकान के दूसरे हिस्से में थे। वह दोनों सुरक्षित हैं। ग्रामीणों में दरवाजे तोड़कर दूसरे कमरे में रखे दो रसोई गैस सिलिंडर आग की चपेट में आने से पहले ही बाहर निकाल लिए।
आग लगने से कारखाने में खड़ी स्कूटी में भी आग लग गई। स्थानीय लोगों ने डिब्बा, बाल्टी, सबमर्सिबल पंप, ट्यूबवेल की मदद से आग पर काबू पाने की कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली। हादसे के करीब 30 मिनट के बाद दो दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंची और दो घंटे में आग की लपटों पर काबू पा सकीं।
एसडीएम सदर अनामिका श्रीवास्तव, तहसीलदार अमरेश सिंह, सीओ जाफरगंज ब्रजमोहन राय, नायब तहसीलदार रजनीश श्रीवास्तव ने पहुंचकर जांच की। सीओ ने बताया कि आग लगने के कारण की जांच की जा रही है। उधर, सीएफओ जसबीर सिंह ने बताया कि रसोई गैस सिलिंडर लीकेज होने से आग लगी है। दवा कारखाने में गैस केमिकल के संपर्क में आ गई। इससे आग भड़क गई। इससे सिलिंडर फट गया।
एनओसी नहीं मिली, आयुर्वेद विभाग में है पंजीकृत कारखाना
दमकल विभाग के मुताबिक कारखाने की एनओसी नहीं मिली है। इससे साफ है कि चोरी छिपे कारोबार किया जा रहा था। उधर क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी नवीन कुमार ने बताया कि न्यू किरन फार्मेसी कारखाना विभाग में पंजीकृत है। कई बार संचालक से पूछताछ की गई। उन्होंने कारखाना संचालित नहीं होने की बात कही है। मौके पर दवाओं की पैकिंग के ढक्कन व अन्य सामग्री दमकल कर्मियों को मिली है।
ग्रामीण और पुलिस की मशक्कत
ग्रामीणों के साथ बहुआ चौकी पुलिस के कर्मियों ने भी आग बुझाने में मदद की। पुलिस ने बताया कि घर में रखी सारी गृहस्थी और कारखाने में रखी दवाएं, शीतल तेल समेत पूरा सामान जल गया है। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित कर किसी तरह से घटनास्थल से दूर रखा। आग लगने की सूचना के एक घंटे बाद दमकल की सदर और बिंदकी से टीम पहुंची।
दूसरे रसोई गैस सिलिंडर फटते तो और भी बड़ा होता हादसा
मोहल्ले के लोगों ने बताया कि आग लगने के बाद डाॅ. जमील कुरैशी बाहर गिरे। इसके बाद भी वह आग बुझाने लगे। कारखाने में दो और गैस सिलिंडर रखे थे। उन तक आग नहीं पहुंच सकी थी। उन सिलिंडर को दरवाजा तोड़कर ग्रामीणों ने बाहर निकाल लिया। गनीमत तो यह रही कि डॉ. जमील की पत्नी और बहू किसी तरह से बाहर निकल आए। दवा कारखाने से करीब 20 मीटर दूर एक निजी स्कूल बना है। बच्चों की छुट्टी हो चुकी थी। यही हादसा दोपहर के स्कूल चलने के समय होता तो आते-जाते बच्चे भी चपेट में आ सकते थे।

फोटो-24-मकान पर चढ़कर आग बुझाने का प्रयास करते ग्रामीण। संवाद- फोटो : kathua news

फोटो-24-मकान पर चढ़कर आग बुझाने का प्रयास करते ग्रामीण। संवाद- फोटो : kathua news

फोटो-24-मकान पर चढ़कर आग बुझाने का प्रयास करते ग्रामीण। संवाद- फोटो : kathua news