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Fatehpur News: 15 साल से बंद सहकारी समिति, खाद के लिए भटक रहे किसान
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फोटो-06-जर्जर सहकारी समिति भवन। संवाद
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खागा। खरीफ सीजन में खाद की बढ़ती मांग के बीच क्षेत्र की अंजना भैरो साधन सहकारी समिति पिछले 15 वर्षों से बंद पड़ी है। वर्ष 2011 से बंद समिति का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। समिति से जुड़े 25 से अधिक गांवों के करीब 35 हजार किसानों को खाद के लिए दूसरी समितियों और निजी दुकानों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। किसानों ने डीएम से समिति शीघ्र संचालित कराने और भवन का पुनर्निर्माण कराने की मांग की है।
गांव निवासी समाजसेवी आशीष कुमार मिश्र ने डीएम को दिए शिकायती पत्र में बताया कि समिति बंद होने से धान की रोपाई के समय किसानों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। मजबूरी में किसानों को निजी दुकानों से अधिक कीमत पर खाद खरीदनी पड़ रही है। उन्होंने समिति को तत्काल चालू कराने की मांग की है।
किसानों का आरोप है कि समिति का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। छत से पानी टपकता है। दीवारों में दरारें हैं और दरवाजे भी टूट चुके हैं। इसके बावजूद खाद आने पर इसी भवन से वितरण कराया जाता है। इससे हादसे की आशंका बनी रहती है।
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इन गावों के किसान हैं प्रभावित
अंजना भैरो साधन सहकारी समिति से अंजना भैरो, मदद अलीपुर, किशुनपुर, रामपुर, इटोली, गुरुवल, गढ़ीवा, सेनधरी, विकौरा, पिपरहा डेरा, असहट, पहाड़पुर, मनीपुर, सेमरिया, मड़ौली, जालंधरपुर, नेवाजपुर, मोहाली का डेरा, भयौखर, रेवाड़ी, अगलेहार, लोहारन डेरा, गौतमन डेरा, मौहारी, थूरियानी, शिवप्रसाद का डेरा, बहियापुर, काशीपुर, मडरहन का डेरा, बहरी का डेरा, चातर का डेरा, कुम्हारन डेरा और रघुबर डेरा समेत 25 से अधिक गांव के किसान प्रभावित हैं।
समय पर नहीं मिल रही खाद
किसान विक्रम पाल का कहना है कि सहकारी समिति 15 वर्षों से बंद है। धान की रोपाई के समय खाद की सबसे ज्यादा जरूरत होती है लेकिन किसानों को समय पर खाद नहीं मिल रही है।
किसान रामबाबू पाल का कहना है कि खाद लेने दूसरी समिति भेज दिया जाता है लेकिन वहां से भी वापस कर दिया जाता है। मजबूरी में निजी दुकानों से महंगे दाम पर खाद खरीदनी पड़ती है।
नए समिति भवन की पैमाइश हो चुकी है। जल्द ही भवन निर्माण शुरू कराया जाएगा। तब तक किसानों को खाद उपलब्ध कराने के लिए किराये के भवन से वितरण की व्यवस्था की जाएगी।
- राजेंद्र मिश्रा, सचिव, सहकारी समिति, अंजना भैरो।
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गांव निवासी समाजसेवी आशीष कुमार मिश्र ने डीएम को दिए शिकायती पत्र में बताया कि समिति बंद होने से धान की रोपाई के समय किसानों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। मजबूरी में किसानों को निजी दुकानों से अधिक कीमत पर खाद खरीदनी पड़ रही है। उन्होंने समिति को तत्काल चालू कराने की मांग की है।
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किसानों का आरोप है कि समिति का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। छत से पानी टपकता है। दीवारों में दरारें हैं और दरवाजे भी टूट चुके हैं। इसके बावजूद खाद आने पर इसी भवन से वितरण कराया जाता है। इससे हादसे की आशंका बनी रहती है।
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इन गावों के किसान हैं प्रभावित
अंजना भैरो साधन सहकारी समिति से अंजना भैरो, मदद अलीपुर, किशुनपुर, रामपुर, इटोली, गुरुवल, गढ़ीवा, सेनधरी, विकौरा, पिपरहा डेरा, असहट, पहाड़पुर, मनीपुर, सेमरिया, मड़ौली, जालंधरपुर, नेवाजपुर, मोहाली का डेरा, भयौखर, रेवाड़ी, अगलेहार, लोहारन डेरा, गौतमन डेरा, मौहारी, थूरियानी, शिवप्रसाद का डेरा, बहियापुर, काशीपुर, मडरहन का डेरा, बहरी का डेरा, चातर का डेरा, कुम्हारन डेरा और रघुबर डेरा समेत 25 से अधिक गांव के किसान प्रभावित हैं।
समय पर नहीं मिल रही खाद
किसान विक्रम पाल का कहना है कि सहकारी समिति 15 वर्षों से बंद है। धान की रोपाई के समय खाद की सबसे ज्यादा जरूरत होती है लेकिन किसानों को समय पर खाद नहीं मिल रही है।
किसान रामबाबू पाल का कहना है कि खाद लेने दूसरी समिति भेज दिया जाता है लेकिन वहां से भी वापस कर दिया जाता है। मजबूरी में निजी दुकानों से महंगे दाम पर खाद खरीदनी पड़ती है।
नए समिति भवन की पैमाइश हो चुकी है। जल्द ही भवन निर्माण शुरू कराया जाएगा। तब तक किसानों को खाद उपलब्ध कराने के लिए किराये के भवन से वितरण की व्यवस्था की जाएगी।
- राजेंद्र मिश्रा, सचिव, सहकारी समिति, अंजना भैरो।

फोटो-06-जर्जर सहकारी समिति भवन। संवाद

फोटो-06-जर्जर सहकारी समिति भवन। संवाद