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Fatehpur News: जांच में सुस्ती से बढ़ा असंतोष, तीन माह बाद भी नतीजा नहीं
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फतेहपुर। बहुआ ब्लॉक क्षेत्र की चक इटौली ग्राम पंचायत में विकास कार्यों में अनियमितता के आरोपों की जांच तीन महीने बाद भी अधूरी है। जिलाधिकारी के आदेश पर गठित तीन सदस्यीय जांच टीम की सुस्त कार्यप्रणाली से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
ग्राम पंचायत चक इटौली के संतोष तिवारी, संगम तिवारी और अवधेश अग्निहोत्री ने दिसंबर 2025 में जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाया था। 10 दिसंबर 2025 को तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की गई, जिसमें जिला समाज कल्याण अधिकारी, तकनीकी सहायक अभियंता लघु सिंचाई और जिला लेखा परीक्षा अधिकारी को शामिल किया गया।
टीम गठन के बाद भी जांच की रफ्तार धीमी बनी रही। शिकायतकर्ताओं के दबाव और भूख हड़ताल की चेतावनी के बाद टीम ने 23 जनवरी 2026 को जांच की तारीख तय की, जिसे बाद में बदलकर 22 जनवरी कर दिया गया। उस दिन टीम गांव पहुंची लेकिन करीब दो घंटे तक स्कूलों की रंगाई-पुताई समेत कुछ कार्यों का औपचारिक निरीक्षण कर लौट गई।
इसके बाद 18 फरवरी को टीम ने दोबारा जांच की लेकिन उस दिन भी केवल एक मजरे में पहुंचकर शौचालय समेत कुछ कार्यों को देखने के बाद टीम लौट गई।
11 मार्च को तय जांच तिथि पर टीम के सदस्य गांव पहुंचे ही नहीं, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई। फिर 20 मार्च की नई तारीख तय कर दी गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है और मामले को जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर की है। उनका कहना है कि यदि जल्द जांच पूरी कर कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करेंगे।
उधर, जांच अधिकारी व जिला समाज कल्याण अधिकारी अवनीश सिंह का कहना है कि जिलाधिकारी की ओर से एक माह का समय जांच के लिए दिया गया था। वर्ष 2019-20 से अभिलेखों के आधार पर स्थलीय निरीक्षण किया जा रहा है। एक स्थल का निरीक्षण करने में पूरा दिन लग जाता है, इसी कारण विलंब हो रहा है। उन्होंने बताया कि अप्रैल के प्रथम सप्ताह में जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।
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ग्राम पंचायत चक इटौली के संतोष तिवारी, संगम तिवारी और अवधेश अग्निहोत्री ने दिसंबर 2025 में जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाया था। 10 दिसंबर 2025 को तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की गई, जिसमें जिला समाज कल्याण अधिकारी, तकनीकी सहायक अभियंता लघु सिंचाई और जिला लेखा परीक्षा अधिकारी को शामिल किया गया।
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टीम गठन के बाद भी जांच की रफ्तार धीमी बनी रही। शिकायतकर्ताओं के दबाव और भूख हड़ताल की चेतावनी के बाद टीम ने 23 जनवरी 2026 को जांच की तारीख तय की, जिसे बाद में बदलकर 22 जनवरी कर दिया गया। उस दिन टीम गांव पहुंची लेकिन करीब दो घंटे तक स्कूलों की रंगाई-पुताई समेत कुछ कार्यों का औपचारिक निरीक्षण कर लौट गई।
इसके बाद 18 फरवरी को टीम ने दोबारा जांच की लेकिन उस दिन भी केवल एक मजरे में पहुंचकर शौचालय समेत कुछ कार्यों को देखने के बाद टीम लौट गई।
11 मार्च को तय जांच तिथि पर टीम के सदस्य गांव पहुंचे ही नहीं, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई। फिर 20 मार्च की नई तारीख तय कर दी गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है और मामले को जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर की है। उनका कहना है कि यदि जल्द जांच पूरी कर कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करेंगे।
उधर, जांच अधिकारी व जिला समाज कल्याण अधिकारी अवनीश सिंह का कहना है कि जिलाधिकारी की ओर से एक माह का समय जांच के लिए दिया गया था। वर्ष 2019-20 से अभिलेखों के आधार पर स्थलीय निरीक्षण किया जा रहा है। एक स्थल का निरीक्षण करने में पूरा दिन लग जाता है, इसी कारण विलंब हो रहा है। उन्होंने बताया कि अप्रैल के प्रथम सप्ताह में जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।