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Fatehpur News: बालू-माैरंग के ओवरलोड वाहनों की ढाल बनी पुलिस

संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर Updated Wed, 24 Jun 2026 01:03 AM IST
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Police became a shield for overloaded sand and gravel vehicles
फोटो-19-युवक पर धौंस जमाते दरोगा व सिपाही। स्रोत: वीडियो ग्रैब
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फतेहपुर। बालू-माैरंग लदे ओवरलोड वाहनों पर लगाम क्यों नहीं लग रहीं है। इसका खुलासा मंगलवार को उस समय हो गया जब फोटो-वीडियो बनाने पर खुद पुलिस इन वाहनों की ढाल बनकर खड़ी हो गई। विजयीपुर चौराहे पर गुजर रहे ओवरलोड डंपरों का वीडियो बना रहे एक युवक से खुद पुलिसकर्मी ही भिड़ गए। आरोप है कि ओवरलोडिंग का सच कैमरे में कैद होते देख दरोगा और सिपाही भड़क उठे। उन्होंने युवक का मोबाइल छीन लिया गया, उसके साथ धक्का-मुक्की की और फर्जी मुकदमे में फंसाने तक की धमकी दे डाली।

सिलमी गांव निवासी आयुष यादव का आरोप है कि विजयीपुर चौराहे पर टास्क फोर्स की मौजूदगी में ओवरलोड वाहन गुजर रहे थे। पुलिस और टास्क फोर्स मूकदर्शक बने रहे, जबकि चौकी का एक सिपाही वाहनों को पास कराने में शामिल दिख रहा था। आयुष ने इन ओवरलोड वाहनों के गुजरने का वीडियो बनाया। वीडियो बनाते देखकर चौकी के एक दरोगा और सिपाही ने एक डंपर चालक को गाली-गलौज की और उस पर लाठियां बरसाईं। इसके बाद दरोगा व सिपाही ने आयुष से भी गाली-गलौज और धक्का-मुक्की की। दरोगा ने आयुष का फोन छीनकर अपने पास रख लिया। आयुष ने पुलिस अधीक्षक को मामले की जानकारी दी, जिसके बाद सिपाही ने उसका फोन लौटा दिया। हालांकि, सिपाही ने आयुष को फर्जी लोकेटर बताकर झूठी प्राथमिकी दर्ज करने की धमकी भी दी। इस घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं। वायरल वीडियो के बाद चौकी पुलिस और टास्क फोर्स की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। थानाध्यक्ष योगेश कुमार मौके पर पहुंचे और कुछ देर रुकने के बाद लौट गए। उन्होंने बताया कि सड़क पर वीडियो बनाने को लेकर कहासुनी हुई थी। थानाध्यक्ष के अनुसार, डंपर तेज रफ्तार में गुजर रहे थे, जिन्हें रोकने या वीडियो बनाने से हादसा हो सकता था।
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पुलिस की सफाई और आरोपों की जांच
पुलिस ने एक्स पर वायरल वीडियो को लेकर अपनी सफाई दी है। पुलिस के अनुसार, पुलिस और राजस्व की संयुक्त टीम बैरियर लगाकर जांच कर रही थी। इस दौरान एक ट्रक तेज गति से बैरियर तोड़कर निकल गया। उसके पीछे आ रहे दूसरे ट्रक को रोकने की कोशिश की गई, पर चालक ने वाहन नहीं रोका। पुलिस ने वाहन को रोकने के लिए ट्रक के ड्राइवर साइड पर डंडे से संकेत किया था। चालक दूसरी ओर से उतरकर मौके से भाग निकला। पुलिसकर्मी की ओर से किसी से मारपीट नहीं की गई, और लगाए गए आरोप गलत हैं। पुलिस अधीक्षक ने आरोपों की जांच सीओ खागा को सौंपी है।
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वसूली में बाधा और पुलिस का गुस्सा

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले के पीछे ओवरलोड वाहनों की पासिंग का खेल है। उनका आरोप है कि पुलिस की मिलीभगत से एक सिंडीकेट चल रहा है। टास्क फोर्स की शिफ्ट बदलने के दौरान चौकी पुलिस का करीबी एक व्यक्ति चेक पोस्ट से पहले ही वाहनों को रोकवाता है। इन वाहनों से प्रति ट्रक 500 रुपये की वसूली की जाती है। कुछ चालक इस वसूली का विरोध करते हैं। विरोध करने वाले चालकों की जानकारी वह प्राइवेट व्यक्ति पुलिस को देता है। ऐसे चालकों को चेक पोस्ट पर रोककर उनसे अभद्रता की जाती है। साथ ही उन पर जुर्माना व सीज की कार्रवाई भी की जाती है।

टास्क फोर्स की कार्यप्रणाली पर सवाल

वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी डंपर पर डंडे बरसाते स्पष्ट दिख रहे हैं। हंगामे के दौरान विजयीपुर चौराहे पर पुलिसकर्मी चीखते-चिल्लाते नजर आए, मानो जान जोखिम में डाली हो। पुलिस को आशंका थी कि वीडियो बनने से उसका सारा भांडा फूट चुका है। पुलिस ने एक्स पर सफाई दी कि एक वाहन बैरियर गिराकर निकला और दूसरा निकलने की कोशिश कर रहा था। पुलिस ने दूसरे वाहन को पकड़ा। लेकिन एक मिनट 27 सेकंड के वायरल वीडियो में चेक पोस्ट से ही 17 ओवरलोड वाहन फर्राटा भरते दिखे। यह वीडियो सुबह के वक्त चौकी पुलिस और टास्क फोर्स की कार्रवाई को उजागर कर रहा है। टास्क फोर्स और भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद ओवरलोड वाहन निकल गए और पुलिस उन्हें आगे नहीं पकड़ सकी।

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इनसेट

पुलिस कार्यशैली पर उठ रहे सवाल

- पुलिस पर सवाल खड़े हो रहे कि जब वह सही हैं तो मोबाइल क्यों छीना। दूसरा सवाल खुद बैरियर लेकर डंपर के आगे सिपाही ने रखा,जबकि वाहन बैरियर से 10 फीट पर पहले ही रुका खड़ा था। तीसरा सवाल वायरल वीडियो में डंपर के भीड़ वाले स्थान से निकलते समय सिपाही आराम से किनारे खड़ा है और ओवरलोड डंपर निकल रहे हैं। ये कई जगह फुटेज में है। चौथा सवाल पुलिस चौकी से ही चौराहे के कैमरे चलते हैं। इन कैमरों की तारें एक माह से क्यों हटी हैं जबकि कैमरे दुरुस्त रखने के सख्त निर्देश हैं।

कोट्स

राजस्व व पुलिस की संयुक्त टीम वाहनों को रोक रही थी। वाहन नहीं रुकने पर टीम ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। हालांकि मोबाइल छीनने की जरूरत नहीं थी। इसकी जांच सीओ खागा को दी गई है। संयुक्त टीम को वाहनों की रोकने के लिए अभी तक सिपाही लगे थे। अब संयुक्त टीम में दरोगा की भी तैनाती की गई है। पुलिस कर्मियों की वसूली की नीयत पर प्रथमदृष्ट्या संदेह नहीं पाया जा रहा है। - अभिमन्यु मांगलिक, एसपी

फोटो-19-युवक पर धौंस जमाते दरोगा व सिपाही। स्रोत: वीडियो ग्रैब

फोटो-19-युवक पर धौंस जमाते दरोगा व सिपाही। स्रोत: वीडियो ग्रैब

फोटो-19-युवक पर धौंस जमाते दरोगा व सिपाही। स्रोत: वीडियो ग्रैब

फोटो-19-युवक पर धौंस जमाते दरोगा व सिपाही। स्रोत: वीडियो ग्रैब

फोटो-19-युवक पर धौंस जमाते दरोगा व सिपाही। स्रोत: वीडियो ग्रैब

फोटो-19-युवक पर धौंस जमाते दरोगा व सिपाही। स्रोत: वीडियो ग्रैब

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