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Fatehpur News: कोचिंग सेंटर, नर्सिंग होम व होटलों में मानक ताक पर
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
Updated Wed, 24 Jun 2026 01:23 AM IST
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फोटो-10-बिंदकी के ललौली रोड में प्रथम तल में संचालित कोचिंग का भवन। संवाद
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फतेहपुर। जिले में सैकड़ों कोचिंग सेंटर, नर्सिंग होम और भोजनालय बिना अग्नि सुरक्षा मानकों के संचालित हो रहे हैं। इनमें से अधिकांश प्रतिष्ठानों के पास फायर विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं है। करीब 350 भोजनालय और होटल में से केवल आठ के पास ही एनओसी है, जिससे बड़े हादसे का खतरा बना हुआ है।
जिले में सैकड़ों कोचिंग सेंटर चल रहे हैं, जिनमें से केवल 11 पंजीकृत हैं। इनमें से मात्र पांच कोचिंग सेंटरों के पास ही फायर एनओसी है। कई कोचिंग सेंटर दो मंजिलों या तहखानों में संचालित हैं, जहां आपातकालीन निकास की उचित व्यवस्था नहीं है। सोमवार को लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग में आग की घटना के बाद भी जिम्मेदार सुध नहीं ले रहे हैं।
बिना फायर एनओसी चल रहे कोचिंग सेंटर
बिंदकी कस्बे में वर्तमान समय में करीब 10 से अधिक छोटे और बड़े कोचिंग संस्थान संचालित हैं। इनमें से अधिकांश कोचिंग संस्थानों के पास फायर विभाग की एनओसी नहीं है। देखा जाए तो बड़े कोचिंग संस्थान में एक बैच में लगभग 50 से 80 बच्चे तक शामिल होते हैं। ललौली सड़क में कुछ संस्थान प्रथम तल पर संचालित हैं। वहां आने-जाने के लिए मात्र एक संकरा जीना ही है, जो लोहे की ग्रिल से बनाकर अलग से लगवाया गया है। किसी प्रकार का हादसा होने की स्थिति में परिणाम घातक हो सकते है।
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बेसमेंट चल रहे नर्सिंग होम
बेसमेंट में नर्सिंगहोम का संचालन पूरी तरह से अवैध है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक कई निजी अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक और पैथोलॉजी लैब बिना पंजीकरण या आवश्यक मानकों के बिना चल रहे हैं। बेसमेंट में अस्पताल का संचालन नियमों के खिलाफ है और शासन द्वारा प्रतिबंधित है। बेसमेंट में वेंटिलेशन और आपातकालीन निकास नहीं होने के कारण आग लगने पर भगदड़ और दम घुटने से बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बाद भी शहर सहित अन्य क्षेत्रों में बेसमेंट में नर्सिंग होम का संचालन बेरोकटोक जारी है।
350 होटल-रेस्टोरेंट में मात्र आठ के पास फायर एनओसी
दिल्ली के एक रेस्टोरेंट में विगत माह आग लगने से 21 लोगों के जिंदा जलने की घटना के बाद जिले में संचालित होटल, रेस्टोरेंट और मैरिज हॉल की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। नियमों की अनदेखी के बाद भी अधिकारी बेपरवाह बने हुए हैं। विभाग की मानें तो मात्र आठ प्रतिष्ठानों ने फायर एनओसी ले रखी है। अग्निशमन विभाग की अनदेखी के चलते जिले में करीब 350 से अधिक होटल, गेस्ट हाउस और मैरिज हॉल बिना फायर एनओसी के चल रहे हैं। प्रशासन और अग्निशमन विभाग की जानकारी के बाद भी उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। विभाग की ओर से उन्हें नोटिस जारी करने की खानापूर्ति की जा रही है।
नहीं पूरा कर रहे एनबीसी के मानक
भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता (नेशनल बिल्डिंग कोड) में अग्नि सुरक्षा के लिए सख्त मानक निर्धारित हैं ताकि आपात स्थिति में भारी दमकल वाहन बिना बाधा के इमारतों के चारों ओर संचालित हो सकें। जिले के बिंदकी, खागा और शहर के कई पुराने रिहायशी इलाकों तथा बाजारों में रास्ते बेहद संकरे हैं। ऐसे में आग जैसी आपात स्थितियों में दमकल वाहनों का घटनास्थल तक पहुंचना चुनौती बन जाता है।
ये हैं मानक
15 मीटर तक ऊंची इमारतों के लिए मार्ग की न्यूनतम चौड़ाई छह मीटर और इससे अधिक ऊंचाई वाली इमारतों के लिए 7.5 मीटर होनी चाहिए। दमकल की बड़ी गाड़ियों के आने-जाने के लिए पर्याप्त जगह जरूरी है। बड़े प्रतिष्ठानों में प्रवेश द्वार की चौड़ाई कम से कम पांच मीटर और ऊंचाई छह मीटर तक होनी चाहिए। इससे सीढ़ी वाली दमकल गाड़ियां भी आसानी से अंदर जा सकें। रास्तों और मोड़ पर न्यूनतम नौ मीटर का टर्निंग रेडियस होना चाहिए, ताकि वाहन आसानी से मुड़ सकें। प्रतिष्ठानों के चारों ओर खुले स्थान और रास्ते हमेशा साफ एवं अवरोध मुक्त रहने चाहिए।
इन स्थानों पर रहता है खतरा
शहर के राधानगर, कलक्टरगंज, ज्वालागंज, पक्का तालाब, लखनऊ बाईपास, सिविल लाइंस, आईटीआई सड़क, कानपुर-प्रयागराज हाईवे सहित खागा व बिंदकी तहसील क्षेत्र के साथ ही और ग्रामीण इलाकों तक फैले इन प्रतिष्ठानों में से अधिकांश के पास आपातकालीन निकास की व्यवस्था नहीं है। आग बुझाने के उपकरण हैं भी तो सिर्फ दिखावे के लिए। इसके साथ ही आपदा आने पर इन उपकरणों को चलाने के लिए कोई प्रशिक्षित कर्मचारी भी मौजूद नहीं है। अनहोनी के दौरान भगदड़ के कारण खतरा और बढ़ेगा।
वर्जन
बिना फायर एनओसी चल रहे करीब 70 होटल संचालकों को नोटिस दिया जा चुका है। अभियान लगातार जारी है। कोचिंग सेंटर सहित नर्सिंग होम संचालकों की जांच कर नोटिस जारी की जाएगी। -जसबीर सिंह, मुख्य अग्निशमन अधिकारी।
जिले में सैकड़ों कोचिंग सेंटर चल रहे हैं, जिनमें से केवल 11 पंजीकृत हैं। इनमें से मात्र पांच कोचिंग सेंटरों के पास ही फायर एनओसी है। कई कोचिंग सेंटर दो मंजिलों या तहखानों में संचालित हैं, जहां आपातकालीन निकास की उचित व्यवस्था नहीं है। सोमवार को लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग में आग की घटना के बाद भी जिम्मेदार सुध नहीं ले रहे हैं।
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बिना फायर एनओसी चल रहे कोचिंग सेंटर
बिंदकी कस्बे में वर्तमान समय में करीब 10 से अधिक छोटे और बड़े कोचिंग संस्थान संचालित हैं। इनमें से अधिकांश कोचिंग संस्थानों के पास फायर विभाग की एनओसी नहीं है। देखा जाए तो बड़े कोचिंग संस्थान में एक बैच में लगभग 50 से 80 बच्चे तक शामिल होते हैं। ललौली सड़क में कुछ संस्थान प्रथम तल पर संचालित हैं। वहां आने-जाने के लिए मात्र एक संकरा जीना ही है, जो लोहे की ग्रिल से बनाकर अलग से लगवाया गया है। किसी प्रकार का हादसा होने की स्थिति में परिणाम घातक हो सकते है।
बेसमेंट चल रहे नर्सिंग होम
बेसमेंट में नर्सिंगहोम का संचालन पूरी तरह से अवैध है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक कई निजी अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक और पैथोलॉजी लैब बिना पंजीकरण या आवश्यक मानकों के बिना चल रहे हैं। बेसमेंट में अस्पताल का संचालन नियमों के खिलाफ है और शासन द्वारा प्रतिबंधित है। बेसमेंट में वेंटिलेशन और आपातकालीन निकास नहीं होने के कारण आग लगने पर भगदड़ और दम घुटने से बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बाद भी शहर सहित अन्य क्षेत्रों में बेसमेंट में नर्सिंग होम का संचालन बेरोकटोक जारी है।
350 होटल-रेस्टोरेंट में मात्र आठ के पास फायर एनओसी
दिल्ली के एक रेस्टोरेंट में विगत माह आग लगने से 21 लोगों के जिंदा जलने की घटना के बाद जिले में संचालित होटल, रेस्टोरेंट और मैरिज हॉल की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। नियमों की अनदेखी के बाद भी अधिकारी बेपरवाह बने हुए हैं। विभाग की मानें तो मात्र आठ प्रतिष्ठानों ने फायर एनओसी ले रखी है। अग्निशमन विभाग की अनदेखी के चलते जिले में करीब 350 से अधिक होटल, गेस्ट हाउस और मैरिज हॉल बिना फायर एनओसी के चल रहे हैं। प्रशासन और अग्निशमन विभाग की जानकारी के बाद भी उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। विभाग की ओर से उन्हें नोटिस जारी करने की खानापूर्ति की जा रही है।
नहीं पूरा कर रहे एनबीसी के मानक
भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता (नेशनल बिल्डिंग कोड) में अग्नि सुरक्षा के लिए सख्त मानक निर्धारित हैं ताकि आपात स्थिति में भारी दमकल वाहन बिना बाधा के इमारतों के चारों ओर संचालित हो सकें। जिले के बिंदकी, खागा और शहर के कई पुराने रिहायशी इलाकों तथा बाजारों में रास्ते बेहद संकरे हैं। ऐसे में आग जैसी आपात स्थितियों में दमकल वाहनों का घटनास्थल तक पहुंचना चुनौती बन जाता है।
ये हैं मानक
15 मीटर तक ऊंची इमारतों के लिए मार्ग की न्यूनतम चौड़ाई छह मीटर और इससे अधिक ऊंचाई वाली इमारतों के लिए 7.5 मीटर होनी चाहिए। दमकल की बड़ी गाड़ियों के आने-जाने के लिए पर्याप्त जगह जरूरी है। बड़े प्रतिष्ठानों में प्रवेश द्वार की चौड़ाई कम से कम पांच मीटर और ऊंचाई छह मीटर तक होनी चाहिए। इससे सीढ़ी वाली दमकल गाड़ियां भी आसानी से अंदर जा सकें। रास्तों और मोड़ पर न्यूनतम नौ मीटर का टर्निंग रेडियस होना चाहिए, ताकि वाहन आसानी से मुड़ सकें। प्रतिष्ठानों के चारों ओर खुले स्थान और रास्ते हमेशा साफ एवं अवरोध मुक्त रहने चाहिए।
इन स्थानों पर रहता है खतरा
शहर के राधानगर, कलक्टरगंज, ज्वालागंज, पक्का तालाब, लखनऊ बाईपास, सिविल लाइंस, आईटीआई सड़क, कानपुर-प्रयागराज हाईवे सहित खागा व बिंदकी तहसील क्षेत्र के साथ ही और ग्रामीण इलाकों तक फैले इन प्रतिष्ठानों में से अधिकांश के पास आपातकालीन निकास की व्यवस्था नहीं है। आग बुझाने के उपकरण हैं भी तो सिर्फ दिखावे के लिए। इसके साथ ही आपदा आने पर इन उपकरणों को चलाने के लिए कोई प्रशिक्षित कर्मचारी भी मौजूद नहीं है। अनहोनी के दौरान भगदड़ के कारण खतरा और बढ़ेगा।
वर्जन
बिना फायर एनओसी चल रहे करीब 70 होटल संचालकों को नोटिस दिया जा चुका है। अभियान लगातार जारी है। कोचिंग सेंटर सहित नर्सिंग होम संचालकों की जांच कर नोटिस जारी की जाएगी। -जसबीर सिंह, मुख्य अग्निशमन अधिकारी।

फोटो-10-बिंदकी के ललौली रोड में प्रथम तल में संचालित कोचिंग का भवन। संवाद

फोटो-10-बिंदकी के ललौली रोड में प्रथम तल में संचालित कोचिंग का भवन। संवाद

फोटो-10-बिंदकी के ललौली रोड में प्रथम तल में संचालित कोचिंग का भवन। संवाद

फोटो-10-बिंदकी के ललौली रोड में प्रथम तल में संचालित कोचिंग का भवन। संवाद