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Fatehpur News: ग्रामीणों के बयानों में उलझी जांच, कई बिंदुओं पर तफ्तीश जारी
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जाफरगंज। थाना क्षेत्र के अंगदपुर गांव में 18 बिस्वा जमीन के विवाद में तक्कीलाल की हत्या के चार दिन बाद भी पुलिस किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। ग्रामीणों के अलग-अलग बयानों से जांच उलझ गई है। पुलिस अब मवेशी चोरी के विरोध में हत्या की आशंका भी जता रही है। हिरासत में लिए गए आरोपी राम खेलावन से लंबी पूछताछ के बाद भी कोई अहम सुराग नहीं मिला है।
अंगदपुर गांव के तक्कीलाल की 10 जून की रात हत्या कर दी गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण कोमा में जाना बताया गया है। परिजन का कहना है कि सुबह तक लोगों ने तक्कीलाल को अंतिम सांस लेते देखा था।
जमीन विवाद की रंजिश के चलते रामखेलावन पक्ष पर संदेह गहराया लेकिन पूछताछ में उससे कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई। वहीं, आरोपी पक्ष का दावा है कि उन्हें रंजिशन फंसाया जा रहा है। आरोपी चचेरे भाई बरमबली का परिवार शहर में रहता है और उसका बेटा रेलवे में एसआई की तैयारी कर रहा है। इससे घटना की रात उनकी अलग-अलग लोकेशन भी सामने आई है।
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गांव के ग्रामीण दो खेमों में बंटे हुए हैं। कुछ लोग रामखेलावन पक्ष के समर्थन में हैं तो कुछ तक्कीलाल पक्ष के। इसी विरोधाभास के चलते पुलिस अब तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है और मामला और पेचीदा होता जा रहा है।
जांच में अब मवेशी चोरों की भूमिका की भी संभावना जताई जा रही है। पुलिस का मानना है कि चूंकि तक्कीलाल मवेशी पालक था इसलिए मवेशी चोरी के विरोध में हत्या की गई हो सकती है। गांव में एहतियात के तौर पर पुलिस बल तैनात है और लगातार निगरानी रखी जा रही है।
परिजन आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और खुलासे की मांग कर रहे हैं। प्रभारी निरीक्षक प्रमोद शुक्ला ने बताया कि मामले की कई पहलुओं से जांच की जा रही है और जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
भूख-प्यास से रामखेलावन की पड़िया की मौत
हत्याकांड के बाद से आरोपी रामखेलावन समेत परिवार के अन्य सदस्य घर छोड़कर भाग गए हैं। घर में केवल उसकी मां चंद्रकली (85) रह गई हैं जो ज्यादा उम्र के कारण चलने-फिरने और देखभाल करने में असमर्थ हैं। देखभाल न होने के कारण दरवाजे पर बंधी रामखेलावन की पड़िया चार दिनों तक भूख-प्यास से तड़पती रही और उसकी मौत हो गई।
अंगदपुर गांव के तक्कीलाल की 10 जून की रात हत्या कर दी गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण कोमा में जाना बताया गया है। परिजन का कहना है कि सुबह तक लोगों ने तक्कीलाल को अंतिम सांस लेते देखा था।
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जमीन विवाद की रंजिश के चलते रामखेलावन पक्ष पर संदेह गहराया लेकिन पूछताछ में उससे कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई। वहीं, आरोपी पक्ष का दावा है कि उन्हें रंजिशन फंसाया जा रहा है। आरोपी चचेरे भाई बरमबली का परिवार शहर में रहता है और उसका बेटा रेलवे में एसआई की तैयारी कर रहा है। इससे घटना की रात उनकी अलग-अलग लोकेशन भी सामने आई है।
गांव के ग्रामीण दो खेमों में बंटे हुए हैं। कुछ लोग रामखेलावन पक्ष के समर्थन में हैं तो कुछ तक्कीलाल पक्ष के। इसी विरोधाभास के चलते पुलिस अब तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है और मामला और पेचीदा होता जा रहा है।
जांच में अब मवेशी चोरों की भूमिका की भी संभावना जताई जा रही है। पुलिस का मानना है कि चूंकि तक्कीलाल मवेशी पालक था इसलिए मवेशी चोरी के विरोध में हत्या की गई हो सकती है। गांव में एहतियात के तौर पर पुलिस बल तैनात है और लगातार निगरानी रखी जा रही है।
परिजन आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और खुलासे की मांग कर रहे हैं। प्रभारी निरीक्षक प्रमोद शुक्ला ने बताया कि मामले की कई पहलुओं से जांच की जा रही है और जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
भूख-प्यास से रामखेलावन की पड़िया की मौत
हत्याकांड के बाद से आरोपी रामखेलावन समेत परिवार के अन्य सदस्य घर छोड़कर भाग गए हैं। घर में केवल उसकी मां चंद्रकली (85) रह गई हैं जो ज्यादा उम्र के कारण चलने-फिरने और देखभाल करने में असमर्थ हैं। देखभाल न होने के कारण दरवाजे पर बंधी रामखेलावन की पड़िया चार दिनों तक भूख-प्यास से तड़पती रही और उसकी मौत हो गई।