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UP: अग्निवीर सूरज यादव की अंतिम विदाई पर हंगामा, एंबुलेंस से शव आने पर भड़के परिजन; जमकर हुआ हंगामा
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 10 Jan 2026 09:33 AM IST
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सार
पश्चिम बंगाल के पानागढ़ में तैनात अग्निवीर सूरज यादव का निधन हो गया। उनका पार्थिव शरीर एंबुलेंस से लाए जाने पर परिजन भड़क गए। इस दौरान जमकर हंगामा हुआ।
अग्निवीर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
पश्चिम बंगाल के पानागढ़ में तैनात लाइनपार थाना क्षेत्र के गुदाऊ ठार दंगल के अग्निवीर सूरज यादव (23) का पार्थिव शरीर शुक्रवार को आया। शव निजी एंबुलेंस से भेजे जाने पर परिजन और रिश्तेदार, ग्रामीण भड़क गए। जरौली कट पर एंबुलेंस को रोक लिया और मार्ग पर जाम लगा दिया।
सूचना पर सिटी मजिस्ट्रेट, तहसीलदार टूंडला, सीओ टूंडला, एसडीएम सदर, थाना टूंडला, रजावली, नारखी, लाइनपार थाने की पुलिस पहुंच गई। स्थिति को संभालते हुए परिजन को समझाया। इसके बाद आगरा से सेना का फूलमाला से सजा ट्रक आया। तब जाकर परिजन उसमें शव गांव लेकर गए। गांव में चचेरे भाई ने मुखाग्नि दी। पूरे गांव में शोक का माहौल हो गया।
मृत सूरज यादव के पिता गंगा सिंह ने बताया कि बेटा अप्रैल 2024 में अग्निवीर के तौर पर सेना में भर्ती हुआ था। वर्तमान में पश्चिम बंगाल के पानागढ़ में तैनात था। 6 जनवरी को उसकी देर रात तबीयत बिगड़ गई थी और मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम आदि की प्रक्रिया के बाद शुक्रवार सुबह शव गांव में आया था। बेटे सूरज यादव का शव एक निजी एंबुलेंस से लाया गया था। इसी बात पर ग्रामीण, रिश्तेदार और परिजन भड़के थे। जरौली कट पर एंबुलेंस को रोककर करीब आधा घंटे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई की मांग पर अड़े रहे। पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के आने के बाद उन्होंने सूचना आगरा दी। आगरा आर्मी कैंप से उसके बाद शव गांव तक ले जाने के लिए सेना का ट्रक भेजा गया था।
नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई
जैसे ही सेना का वाहन शव लेकर गांव पहुंचा, वहां कोहराम मच गया। सूरज के पिता गंगा सिंह और भाइयों का रो-रोकर बुरा हाल था। अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। सूरज को उनके चचेरे भाई आदित्य यादव ने मुखाग्नि दी। सूरज अपने तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। उनकी बहन ललिता भी वर्तमान में एयरफोर्स में तैनात हैं।
परिजनों ने रखीं तीन प्रमुख मांगें
- शहीद सूरज यादव की स्मृति में गांव के बाहर एक भव्य विजय द्वार बनवाया जाए।
- सूरज का गांव में स्मारक स्थापित किया जाए, जिसके लिए जमीन की व्यवस्था न होने पर परिवार ने खुद की जमीन देने की बात कही, बशर्ते फंड की व्यवस्था हो।
- परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग रखी गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को सेना तक पहुंचा दिया जाएगा। तब जाकर परिजन शांत हुए।
नेताओं और अधिकारियों का भी रहा जमावड़ा
सूरज की अंतिम विदाई के दौरान सदर विधायक मनीष असीजा, शिकोहाबाद विधायक मुकेश वर्मा, पूर्व एमएलसी दिलीप यादव सहित तमाम राजनीतिक दलों के नेता और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। पुलिस बल ने व्यवस्था संभाले रखी और शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर के साथ विदा किया गया। सिटी मजिस्ट्रेट विनोद कुमार ने बताया कि परिजनों को समझा-बुझाकर सूरज को अंतिम विदाई राजकीय सम्मान के साथ दी गई। परिवार की जो भी मांग है, उनको सेना तक भेजने का भी आश्वासन दिया गया।
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सूचना पर सिटी मजिस्ट्रेट, तहसीलदार टूंडला, सीओ टूंडला, एसडीएम सदर, थाना टूंडला, रजावली, नारखी, लाइनपार थाने की पुलिस पहुंच गई। स्थिति को संभालते हुए परिजन को समझाया। इसके बाद आगरा से सेना का फूलमाला से सजा ट्रक आया। तब जाकर परिजन उसमें शव गांव लेकर गए। गांव में चचेरे भाई ने मुखाग्नि दी। पूरे गांव में शोक का माहौल हो गया।
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मृत सूरज यादव के पिता गंगा सिंह ने बताया कि बेटा अप्रैल 2024 में अग्निवीर के तौर पर सेना में भर्ती हुआ था। वर्तमान में पश्चिम बंगाल के पानागढ़ में तैनात था। 6 जनवरी को उसकी देर रात तबीयत बिगड़ गई थी और मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम आदि की प्रक्रिया के बाद शुक्रवार सुबह शव गांव में आया था। बेटे सूरज यादव का शव एक निजी एंबुलेंस से लाया गया था। इसी बात पर ग्रामीण, रिश्तेदार और परिजन भड़के थे। जरौली कट पर एंबुलेंस को रोककर करीब आधा घंटे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई की मांग पर अड़े रहे। पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के आने के बाद उन्होंने सूचना आगरा दी। आगरा आर्मी कैंप से उसके बाद शव गांव तक ले जाने के लिए सेना का ट्रक भेजा गया था।
नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई
जैसे ही सेना का वाहन शव लेकर गांव पहुंचा, वहां कोहराम मच गया। सूरज के पिता गंगा सिंह और भाइयों का रो-रोकर बुरा हाल था। अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। सूरज को उनके चचेरे भाई आदित्य यादव ने मुखाग्नि दी। सूरज अपने तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। उनकी बहन ललिता भी वर्तमान में एयरफोर्स में तैनात हैं।
परिजनों ने रखीं तीन प्रमुख मांगें
- शहीद सूरज यादव की स्मृति में गांव के बाहर एक भव्य विजय द्वार बनवाया जाए।
- सूरज का गांव में स्मारक स्थापित किया जाए, जिसके लिए जमीन की व्यवस्था न होने पर परिवार ने खुद की जमीन देने की बात कही, बशर्ते फंड की व्यवस्था हो।
- परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग रखी गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को सेना तक पहुंचा दिया जाएगा। तब जाकर परिजन शांत हुए।
नेताओं और अधिकारियों का भी रहा जमावड़ा
सूरज की अंतिम विदाई के दौरान सदर विधायक मनीष असीजा, शिकोहाबाद विधायक मुकेश वर्मा, पूर्व एमएलसी दिलीप यादव सहित तमाम राजनीतिक दलों के नेता और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। पुलिस बल ने व्यवस्था संभाले रखी और शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर के साथ विदा किया गया। सिटी मजिस्ट्रेट विनोद कुमार ने बताया कि परिजनों को समझा-बुझाकर सूरज को अंतिम विदाई राजकीय सम्मान के साथ दी गई। परिवार की जो भी मांग है, उनको सेना तक भेजने का भी आश्वासन दिया गया।