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Firozabad News: आलू ः लागत निकालना भी हुआ मुश्किल, कंपनियों ने फेरा मुंह
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फोटो-21 खेतों में खुदाई के बाद आलू की छांटते श्रमिक। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। जिले में इस बार आलू का रकबा बढ़ा और मौसम की मेहरबानी से पैदावार भी शानदार रही, लेकिन सब्जियों के राजा की चमक बाजार में फीकी पड़ गई है। वैश्विक बाजार की चुनौतियों और खरीदारों की बेरुखी के चलते किसानों को अपनी फसल का उचित दाम नहीं मिल रहा है। हालात यह हैं कि मंडियों में आलू की गिरती कीमतों ने किसानों की कमर तोड़ दी है।
आलू उत्पादन का हब माने जाने वाले फिरोजाबाद में इस बार चिप्स बनाने वाली बड़ी कंपनियों और बाहरी राज्यों (दिल्ली, मुंबई, गुजरात, भोपाल) के व्यापारियों ने रुचि नहीं दिखाई है।
पिछले वर्षों में खुदाई शुरू होते ही इन कंपनियों के प्रतिनिधि सक्रिय हो जाते थे, इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा रहती थी और भाव अच्छे मिलते थे।
इस बार किसान कंपनियों का इंतजार ही करते रह गए। उसायनी निवासी किसान ने बताया कि पिछले साल जो कट्टा 500-600 रुपये में बिका था, वह आज 200-250 रुपये में भी मुश्किल से बिक रहा है। अगर यही हाल रहा तो कोल्ड स्टोरेज का किराया देना भी भारी पड़ेगा।
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फिरोजाबाद। जिले में इस बार आलू का रकबा बढ़ा और मौसम की मेहरबानी से पैदावार भी शानदार रही, लेकिन सब्जियों के राजा की चमक बाजार में फीकी पड़ गई है। वैश्विक बाजार की चुनौतियों और खरीदारों की बेरुखी के चलते किसानों को अपनी फसल का उचित दाम नहीं मिल रहा है। हालात यह हैं कि मंडियों में आलू की गिरती कीमतों ने किसानों की कमर तोड़ दी है।
आलू उत्पादन का हब माने जाने वाले फिरोजाबाद में इस बार चिप्स बनाने वाली बड़ी कंपनियों और बाहरी राज्यों (दिल्ली, मुंबई, गुजरात, भोपाल) के व्यापारियों ने रुचि नहीं दिखाई है।
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पिछले वर्षों में खुदाई शुरू होते ही इन कंपनियों के प्रतिनिधि सक्रिय हो जाते थे, इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा रहती थी और भाव अच्छे मिलते थे।
इस बार किसान कंपनियों का इंतजार ही करते रह गए। उसायनी निवासी किसान ने बताया कि पिछले साल जो कट्टा 500-600 रुपये में बिका था, वह आज 200-250 रुपये में भी मुश्किल से बिक रहा है। अगर यही हाल रहा तो कोल्ड स्टोरेज का किराया देना भी भारी पड़ेगा।