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Firozabad News: चूड़ी की 80 इकाइयों में उत्पादन ठप, 50 हजार श्रमिकों के सामने रोजी-रोटी पर संकट
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Tue, 24 Mar 2026 12:32 AM IST
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काम बंदी के बाद शहर की एक कांच चूड़ी इकाई में पसरा सन्नाटा। संवाद
- फोटो : काम बंदी के बाद शहर की एक कांच चूड़ी इकाई में पसरा सन्नाटा। संवाद
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फिरोजाबाद। युद्ध के बीच बढ़ते तनाव का असर कांच उद्योग पर पड़ने लगा है। शहर की 80 चूड़ी इकाइयों में उत्पादन ठप होने का दावा उद्यमी कर रहे हैं। इसके पीछे गेल गैस कंपनी की ओर से गैस खपत में 35 प्रतिशत की कटौती के फरमान को कारण बता रहे हैं।
सोमवार की सुबह जब हजारों कामगार नगला भाऊ, स्टेशन रोड, बंदर वाली पुलिया और करबला स्थित फैक्ट्रियों में पहुंचे, तो वहां का सन्नाटा देख उनके होश उड़ गए। श्रमिक संगठन के नेता भूरी सिंह यादव के अनुसार 50 हजार से अधिक दैनिक कामगारों को काम नहीं मिला। उत्पादन ठप होने से न केवल कारखाना श्रमिक, बल्कि चूड़ी जुड़ाई, सदाई और पकाई अड्डों पर काम करने वाले लाखों परिवारों पर भी आजीविका का संकट मंडराने लगा है। सामान्य दिनों में शहर में प्रतिदिन औसतन 3 लाख तोड़ा चूड़ी का उत्पादन होता है, लेकिन वर्तमान संकट के चलते यह घटकर महज 30 हजार तोड़ा रह गया है।
गैस खपत की दैनिक समीक्षा और आरएलएनजी में 35 प्रतिशत की कटौती के साथ पॉट फर्नेस चलाना असंभव है। यही कारण है कि शहर की 80 इकाइयां बंद हो चुकी हैं। यदि आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो उद्योग पूरी तरह चरमरा जाएगा।
- हनुमान प्रसाद गर्ग, चेयरमैन, द ग्लास सिंडिकेट
गैस की कमी के कारण कोई इकाई बंद नहीं हुई। कंपनी ने सिर्फ कोटा लागू किया है। हां, यह जरूर है कि अब खपत में सामान्य की अपेक्षा करीब 15 फीसदी तक की गिरावट आई है।
- मनमोहन, क्षेत्रीय प्रबंधक गेल फिरोजाबाद
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सोमवार की सुबह जब हजारों कामगार नगला भाऊ, स्टेशन रोड, बंदर वाली पुलिया और करबला स्थित फैक्ट्रियों में पहुंचे, तो वहां का सन्नाटा देख उनके होश उड़ गए। श्रमिक संगठन के नेता भूरी सिंह यादव के अनुसार 50 हजार से अधिक दैनिक कामगारों को काम नहीं मिला। उत्पादन ठप होने से न केवल कारखाना श्रमिक, बल्कि चूड़ी जुड़ाई, सदाई और पकाई अड्डों पर काम करने वाले लाखों परिवारों पर भी आजीविका का संकट मंडराने लगा है। सामान्य दिनों में शहर में प्रतिदिन औसतन 3 लाख तोड़ा चूड़ी का उत्पादन होता है, लेकिन वर्तमान संकट के चलते यह घटकर महज 30 हजार तोड़ा रह गया है।
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गैस खपत की दैनिक समीक्षा और आरएलएनजी में 35 प्रतिशत की कटौती के साथ पॉट फर्नेस चलाना असंभव है। यही कारण है कि शहर की 80 इकाइयां बंद हो चुकी हैं। यदि आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो उद्योग पूरी तरह चरमरा जाएगा।
- हनुमान प्रसाद गर्ग, चेयरमैन, द ग्लास सिंडिकेट
गैस की कमी के कारण कोई इकाई बंद नहीं हुई। कंपनी ने सिर्फ कोटा लागू किया है। हां, यह जरूर है कि अब खपत में सामान्य की अपेक्षा करीब 15 फीसदी तक की गिरावट आई है।
- मनमोहन, क्षेत्रीय प्रबंधक गेल फिरोजाबाद