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चैत्र नवरात्रि: जय माता दी के उद्घोष से गुंजायमान हुए देवी मंदिर
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फोटो-07- मां राज राजेश्वरी कैलादेवी मंदिर पर मंगलादर्शन करने को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़। संवा
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फिरोजाबाद। चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व के प्रथम दिन बृहस्पतिवार को समूचा जनपद भक्ति के रंग में सराबोर हो गया। घर-घर में विधि-विधान से कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की गई। तड़के चार बजे मंदिरों के पट खुलते ही माता के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने लंबी कतारों में लगकर माता रानी के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की मनौतियां मांगी।
हनुमानगढ़ स्थित मां राज-राजेश्वरी कैलादेवी भवन पर मंगला दर्शन के लिए तड़के तीन बजे से ही श्रद्धालुओं की टोलियां पहुंचनी शुरू हो गई थीं। सुबह चार से पांच बजे के बीच ही हजारों भक्तों ने माता के दरबार में हाजिरी लगाई। इसके साथ ही नौ दिवसीय व्रत का अनुष्ठान भी प्रारंभ हो गया। शहर के प्रमुख मंदिरों जैसे माता वाला बाग स्थित बड़ी माता मंदिर, चंद्रवार गेट स्थित पथवारी मंदिर, लेबर कॉलोनी दुर्गा मंदिर और जलेसर रोड स्थित काली मंदिर में भी देर रात तक भक्तों का तांता लगा रहा। दोपहर बाद महिला श्रद्धालुओं ने देवी गीतों पर नृत्य कर माता को रिझाया। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस बल भी मुस्तैद दिखाई दिया।
उसायनी और बीहड़ वाली माता मंदिर में उमड़ा आस्था का रेला
मां वैष्णोदेवी धाम उसायनी में नवरात्रि के पहले दिन से ही ध्वजा (नेजा) चढ़ाने का क्रम शुरू हो गया है। श्रद्धालु माता के दर्शन कर नारियल भेंट कर रहे हैं और मंदिर परिसर में धागा बांधकर व सतिया (स्वास्तिक) बनाकर मनौतियां मांग रहे हैं। वहीं, मटसेना क्षेत्र स्थित प्राचीन बीहड़ वाली माता मंदिर पर भी ग्रामीण अंचल से बड़ी संख्या में श्रद्धालु ट्रैक्टर-ट्रॉली और निजी वाहनों से माता के दर्शन करने पहुंचे।
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फोटो 9 और 10
इतिहासः
150 वर्ष पुराना है माता वाला बाग का पथवारी मंदिर
- बाबा ऐदल सिंह ने शुरू की थी सेवा
फिरोजाबाद। शहर के माता वाला बाग स्थित पथवारी माता (बड़ी माता) मंदिर की महिमा निराली है। मंदिर के 82 वर्षीय महंत रासबिहारी लाल कटारा बताते हैं कि यह मंदिर 150 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है। उनके बाबा ऐदल सिंह और पिता नाथूराम कटारा के बाद अब वे मंदिर की सेवा कर रहे हैं। कैलादेवी भवन की स्थापना से पूर्व पूरे शहर की आस्था का केंद्र यही मंदिर था। आज भी मान्यता है कि किसी भी तीर्थयात्रा पर जाने से पूर्व यहां हाजिरी लगाना अनिवार्य है। श्रद्धालु यहां मुंडन संस्कार कराने और नेजा चढ़ाने दूर-दूर से आते हैं।
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हनुमानगढ़ स्थित मां राज-राजेश्वरी कैलादेवी भवन पर मंगला दर्शन के लिए तड़के तीन बजे से ही श्रद्धालुओं की टोलियां पहुंचनी शुरू हो गई थीं। सुबह चार से पांच बजे के बीच ही हजारों भक्तों ने माता के दरबार में हाजिरी लगाई। इसके साथ ही नौ दिवसीय व्रत का अनुष्ठान भी प्रारंभ हो गया। शहर के प्रमुख मंदिरों जैसे माता वाला बाग स्थित बड़ी माता मंदिर, चंद्रवार गेट स्थित पथवारी मंदिर, लेबर कॉलोनी दुर्गा मंदिर और जलेसर रोड स्थित काली मंदिर में भी देर रात तक भक्तों का तांता लगा रहा। दोपहर बाद महिला श्रद्धालुओं ने देवी गीतों पर नृत्य कर माता को रिझाया। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस बल भी मुस्तैद दिखाई दिया।
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उसायनी और बीहड़ वाली माता मंदिर में उमड़ा आस्था का रेला
मां वैष्णोदेवी धाम उसायनी में नवरात्रि के पहले दिन से ही ध्वजा (नेजा) चढ़ाने का क्रम शुरू हो गया है। श्रद्धालु माता के दर्शन कर नारियल भेंट कर रहे हैं और मंदिर परिसर में धागा बांधकर व सतिया (स्वास्तिक) बनाकर मनौतियां मांग रहे हैं। वहीं, मटसेना क्षेत्र स्थित प्राचीन बीहड़ वाली माता मंदिर पर भी ग्रामीण अंचल से बड़ी संख्या में श्रद्धालु ट्रैक्टर-ट्रॉली और निजी वाहनों से माता के दर्शन करने पहुंचे।
फोटो 9 और 10
इतिहासः
150 वर्ष पुराना है माता वाला बाग का पथवारी मंदिर
- बाबा ऐदल सिंह ने शुरू की थी सेवा
फिरोजाबाद। शहर के माता वाला बाग स्थित पथवारी माता (बड़ी माता) मंदिर की महिमा निराली है। मंदिर के 82 वर्षीय महंत रासबिहारी लाल कटारा बताते हैं कि यह मंदिर 150 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है। उनके बाबा ऐदल सिंह और पिता नाथूराम कटारा के बाद अब वे मंदिर की सेवा कर रहे हैं। कैलादेवी भवन की स्थापना से पूर्व पूरे शहर की आस्था का केंद्र यही मंदिर था। आज भी मान्यता है कि किसी भी तीर्थयात्रा पर जाने से पूर्व यहां हाजिरी लगाना अनिवार्य है। श्रद्धालु यहां मुंडन संस्कार कराने और नेजा चढ़ाने दूर-दूर से आते हैं।

फोटो-07- मां राज राजेश्वरी कैलादेवी मंदिर पर मंगलादर्शन करने को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़। संवा