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UP: सिपाही पर दर्ज हुआ था दुष्कर्म का केस, अब सीबीआई करेगी जांच; 33 पुलिसकर्मियों की बढ़ेगी मुश्किल
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Published by: अरुन पाराशर
Updated Sun, 01 Feb 2026 11:59 AM IST
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सार
सिपाही दीपेंद्र ने मथुरा के होटल में भाई के साथ मिलकर किशोरी के साथ संबंध बनाए थे। वहां से वह उसे आगरा ले आया और आगरा दीवानी में सुमित के साथ उसकी कोर्ट मैरिज करवा रहा था। इस दाैरान किशोरी वहां से भाग निकली थी।
कोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
फिरोजाबाद के रसूलपुर थाना क्षेत्र से 24 मार्च 2022 को किशोरी को अगवा कर दुष्कर्म करने और आगरा में तैनात सिपाही दीपेंद्र व उसके परिजन पर दर्ज 6 मुकदमों की जांच अब सीबीआई करेगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट से इस संबंध में पुनर्विचार याचिका पर आदेश हुआ है। इन मुकदमों से संबंधित 33 पुलिसकर्मियों के सीबीआई बयान लेगी और उनकी भूमिका की जांच करेगी।
मामला उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही के पद पर तैनात बिरजापुर, हाईवे, (मथुरा) निवासी दीपेंद्र सिंह और उसके परिजन पर दर्ज मुकदमों से जुड़ा है। दीपेंद्र वर्ष 2022 में आगरा जीआरपी में तैनात था। उसी दौरान उसकी मुलाकात एक ट्रेन में रामगढ़ इलाके में रहने वाली एक किशोरी से हुई थी।
रसूलपुर थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, 16 वर्षीय किशोरी की मां को बेटी के पास से एक मोबाइल मिला था। पूछताछ में बेटी ने बताया था कि उससे दोस्ती कर दीपेंद्र ने बातचीत के लिए उसे फोन दिया था। 24 मार्च 2022 को किशोरी अपनी मां के साथ रसूलपुर क्षेत्र में बाजार गई थी। वहां से वह लापता हो गई।
रसूलपुर पुलिस ने 29 मार्च 2022 को किशोरी को आगरा के हरीपर्वत थाना क्षेत्र में ढूंढ लिया था। किशोरी ने पुलिस को बताया था कि सिपाही दीपेंद्र उसे भगाकर लाया था। मथुरा के होटल में उसने और उसके भाई सुमित ने उससे संबंध बनाए। वहां से वह उसे आगरा ले आया और आगरा दीवानी में सुमित के साथ उसकी कोर्ट मैरिज करवा रहा था, वहां से वह भाग निकली।
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मामला उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही के पद पर तैनात बिरजापुर, हाईवे, (मथुरा) निवासी दीपेंद्र सिंह और उसके परिजन पर दर्ज मुकदमों से जुड़ा है। दीपेंद्र वर्ष 2022 में आगरा जीआरपी में तैनात था। उसी दौरान उसकी मुलाकात एक ट्रेन में रामगढ़ इलाके में रहने वाली एक किशोरी से हुई थी।
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रसूलपुर थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, 16 वर्षीय किशोरी की मां को बेटी के पास से एक मोबाइल मिला था। पूछताछ में बेटी ने बताया था कि उससे दोस्ती कर दीपेंद्र ने बातचीत के लिए उसे फोन दिया था। 24 मार्च 2022 को किशोरी अपनी मां के साथ रसूलपुर क्षेत्र में बाजार गई थी। वहां से वह लापता हो गई।
रसूलपुर पुलिस ने 29 मार्च 2022 को किशोरी को आगरा के हरीपर्वत थाना क्षेत्र में ढूंढ लिया था। किशोरी ने पुलिस को बताया था कि सिपाही दीपेंद्र उसे भगाकर लाया था। मथुरा के होटल में उसने और उसके भाई सुमित ने उससे संबंध बनाए। वहां से वह उसे आगरा ले आया और आगरा दीवानी में सुमित के साथ उसकी कोर्ट मैरिज करवा रहा था, वहां से वह भाग निकली।
मामला दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में तरमीम किया गया। इसमें दीपेंद्र के अलावा सुमित की मां माया देवी को भी नामजद किया गया। आरोपियों की तलाश में पुलिस ने दबिश दी लेकिन वे हाथ नहीं आए। उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी होने के साथ सुमित व दीपेंद्र पर 10-10 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया।
इस दौरान किशोरी व उसके परिवार ने रसूलपुर पुलिस पर असहयोग का आरोप लगाते हुए गांधी पार्क में धरना दे दिया। इस पर मुकदमे की विवेचना आगरा क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर हो गई थी। इसी दौरान आरोपी पक्ष हाईकोर्ट चला गया और आरोप लगाया कि उसके परिवार को षड्यंत्र के तहत पुलिस ने ही इस मामले में फंसाया है।
हाईकोर्ट में लगाए ये आरोप
हाईकोर्ट में आरोपी पक्ष की ओर से दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया कि उसके भाई पुनीत को 2018 में एसओजी टीम ने उठाया था और गोविंद नगर पुलिस ने दो दिन बाद उसे छिनैती और बाइक चोरी के आरोप में एक अन्य अभियुक्त चेतन के साथ जेल भेज दिया था। यह मामला फर्जी था। इसकी शिकायत एससी-एसटी आयोग में की गई। वहां से हुए आदेश पर लखनऊ की एक विशेष पुलिस टीम ने जांच की तो उसमें 33 पुलिसकर्मियों को दोषी पाया गया था। उसी खुन्नस में उसके भाई की फर्जी गिरफ्तारी की गई थी। इसके अलावा इस याचिका में 2013 व 2016 में परिजन पर दर्ज मारपीट, बिजली चोरी आदि के मुकदमों के भी फर्जी होने का उल्लेख किया था। इस मामले में हाईकोर्ट ने वर्ष 2022 में हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट गई थी राज्य सरकार
राज्य सरकार हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में ही पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की कहते हुए सुनवाई नहीं की थी। इसके बाद फिर से मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में हुई। राज्य सरकार ने यहां बताया कि जिन 33 पुलिसकर्मियों को लखनऊ की विशेष जांच टीम ने दोषी पाया, उनमें से काफी पुलिसकर्मी 2018 में मथुरा जिले में ही तैनात नहीं थे। एक अन्य जांच में सिर्फ 6 पुलिसकर्मियों को दोषी पाया गया था। इन सभी बिंदुओं को सुनते हुए हाईकोर्ट ने पिछले दिनों फिर से आदेश दिया कि सिपाही दीपेंद्र व उसके परिजन के खिलाफ दर्ज सभी (करीब छह) मुकदमों की जांच सीबीआई से कराई जाए। इनमें एक मुकदमा किशोरी के अपहरण, दुष्कर्म का रसूलपुर थाना (फिरोजाबाद), मथुरा के हाईवे थाने में दर्ज मारपीट व अन्य मुकदमे, गोविंद नगर थाने में दर्ज छिनैती व अन्य मुकदमे, मथुरा शहर कोतवाली में दर्ज बाइक चोरी का मुकदमा आदि शामिल हैं। इन सभी की जांच अब सीबीआई द्वारा की जाएगी।
फिरोजाबाद में दीपेंद्र व उसके परिजन पर रसूलपुर थाने में एक मुकदमा दर्ज था, जो बाद में विवेचना के लिए क्राइम ब्रांच आगरा ट्रांसफर हो गया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद केस डायरी आगरा क्राइम ब्रांच के पास होने संबंधी पत्राचार शासन को कर दिया गया है। आगरा और मथुरा से केस डायरी सीबीआई को जाएगी। -सौरभ दीक्षित, एसएसपी फिरोजाबाद
इस दौरान किशोरी व उसके परिवार ने रसूलपुर पुलिस पर असहयोग का आरोप लगाते हुए गांधी पार्क में धरना दे दिया। इस पर मुकदमे की विवेचना आगरा क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर हो गई थी। इसी दौरान आरोपी पक्ष हाईकोर्ट चला गया और आरोप लगाया कि उसके परिवार को षड्यंत्र के तहत पुलिस ने ही इस मामले में फंसाया है।
हाईकोर्ट में लगाए ये आरोप
हाईकोर्ट में आरोपी पक्ष की ओर से दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया कि उसके भाई पुनीत को 2018 में एसओजी टीम ने उठाया था और गोविंद नगर पुलिस ने दो दिन बाद उसे छिनैती और बाइक चोरी के आरोप में एक अन्य अभियुक्त चेतन के साथ जेल भेज दिया था। यह मामला फर्जी था। इसकी शिकायत एससी-एसटी आयोग में की गई। वहां से हुए आदेश पर लखनऊ की एक विशेष पुलिस टीम ने जांच की तो उसमें 33 पुलिसकर्मियों को दोषी पाया गया था। उसी खुन्नस में उसके भाई की फर्जी गिरफ्तारी की गई थी। इसके अलावा इस याचिका में 2013 व 2016 में परिजन पर दर्ज मारपीट, बिजली चोरी आदि के मुकदमों के भी फर्जी होने का उल्लेख किया था। इस मामले में हाईकोर्ट ने वर्ष 2022 में हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट गई थी राज्य सरकार
राज्य सरकार हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में ही पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की कहते हुए सुनवाई नहीं की थी। इसके बाद फिर से मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में हुई। राज्य सरकार ने यहां बताया कि जिन 33 पुलिसकर्मियों को लखनऊ की विशेष जांच टीम ने दोषी पाया, उनमें से काफी पुलिसकर्मी 2018 में मथुरा जिले में ही तैनात नहीं थे। एक अन्य जांच में सिर्फ 6 पुलिसकर्मियों को दोषी पाया गया था। इन सभी बिंदुओं को सुनते हुए हाईकोर्ट ने पिछले दिनों फिर से आदेश दिया कि सिपाही दीपेंद्र व उसके परिजन के खिलाफ दर्ज सभी (करीब छह) मुकदमों की जांच सीबीआई से कराई जाए। इनमें एक मुकदमा किशोरी के अपहरण, दुष्कर्म का रसूलपुर थाना (फिरोजाबाद), मथुरा के हाईवे थाने में दर्ज मारपीट व अन्य मुकदमे, गोविंद नगर थाने में दर्ज छिनैती व अन्य मुकदमे, मथुरा शहर कोतवाली में दर्ज बाइक चोरी का मुकदमा आदि शामिल हैं। इन सभी की जांच अब सीबीआई द्वारा की जाएगी।
फिरोजाबाद में दीपेंद्र व उसके परिजन पर रसूलपुर थाने में एक मुकदमा दर्ज था, जो बाद में विवेचना के लिए क्राइम ब्रांच आगरा ट्रांसफर हो गया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद केस डायरी आगरा क्राइम ब्रांच के पास होने संबंधी पत्राचार शासन को कर दिया गया है। आगरा और मथुरा से केस डायरी सीबीआई को जाएगी। -सौरभ दीक्षित, एसएसपी फिरोजाबाद
