{"_id":"6a3981c9ef758cbf04060db4","slug":"shadow-of-death-looms-over-coaching-centers-only-15-have-fire-nocs-the-rest-are-left-to-fate-firozabad-news-c-169-1-mt11005-177909-2026-06-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Firozabad News: कोचिंग सेंटरों पर मंडरा रहा मौत का साया, सिर्फ 15 के पास फायर एनओसी, बाकी राम भरोसे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Firozabad News: कोचिंग सेंटरों पर मंडरा रहा मौत का साया, सिर्फ 15 के पास फायर एनओसी, बाकी राम भरोसे
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Tue, 23 Jun 2026 12:11 AM IST
विज्ञापन
स्टेशन रोड पर संचालित एक कोचिंग सेंटर। संवाद
- फोटो : स्टेशन रोड पर संचालित एक कोचिंग सेंटर। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
फिरोजाबाद। राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में भीषण आग लगने से 15 छात्र-छात्राओं की दर्दनाक मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे के बाद सुहागनगरी के कोचिंग सेंटरों में पढ़ रहे हजारों बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले में चल रहे अधिकांश कोचिंग संस्थान नियमों को ताक पर रखकर संचालित किया जा रहा है। यहां किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम तक नहीं हैं।
अग्निशमन (फायर) विभाग के अनुसार जिले में खुले सैकड़ों कोचिंग सेंटरों में से सिर्फ करीब 15 संचालकों ने ही नियमानुसार फायर एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) ले रखी है। शेष अधिकांश संस्थान बिना किसी वैध एनओसी और सुरक्षा उपकरणों के धड़ल्ले से व्यावसायिक रूप से संचालित हो रहे हैं। अग्निशमन अधिकारी शहर दुर्गेश कुमार का कहना है कि बिना एनओसी चल रहे ऐसे सभी डिफाल्टर सेंटरों को चिन्हित किया जा रहा है और इनके खिलाफ जल्द ही एक सघन जांच व सीलिंग अभियान चलाया जाएगा।
मौत को दावत दे रहीं ये दो बड़ी लापरवाहियां
1. नियमों और मानकों के पूरी तरह विपरीत जाकर शहर के कई नामी कोचिंग सेंटर बेसमेंट (तहखानों) में संचालित हो रहे हैं। बेसमेंट में वेंटिलेशन न के बराबर होता है और धुआं भरने की स्थिति में बच्चों का दम घुटना तय है।
विज्ञापन
2. कई सेंटरों के एंट्री (प्रवेश) और एग्जिट (निकास) मार्ग इतने ज्यादा संकरे हैं कि दो लोग भी एक साथ ठीक से नहीं निकल सकते। हद तो यह है कि दर्जनों केंद्रों में आने और जाने के लिए केवल एक ही मुख्य द्वार है। यदि मुख्य द्वार के पास शॉर्ट-सर्किट होता है, तो बच्चों के पास बाहर भागने का कोई दूसरा रास्ता नहीं बचेगा।
अग्निशमन (फायर) विभाग के अनुसार जिले में खुले सैकड़ों कोचिंग सेंटरों में से सिर्फ करीब 15 संचालकों ने ही नियमानुसार फायर एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) ले रखी है। शेष अधिकांश संस्थान बिना किसी वैध एनओसी और सुरक्षा उपकरणों के धड़ल्ले से व्यावसायिक रूप से संचालित हो रहे हैं। अग्निशमन अधिकारी शहर दुर्गेश कुमार का कहना है कि बिना एनओसी चल रहे ऐसे सभी डिफाल्टर सेंटरों को चिन्हित किया जा रहा है और इनके खिलाफ जल्द ही एक सघन जांच व सीलिंग अभियान चलाया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
मौत को दावत दे रहीं ये दो बड़ी लापरवाहियां
1. नियमों और मानकों के पूरी तरह विपरीत जाकर शहर के कई नामी कोचिंग सेंटर बेसमेंट (तहखानों) में संचालित हो रहे हैं। बेसमेंट में वेंटिलेशन न के बराबर होता है और धुआं भरने की स्थिति में बच्चों का दम घुटना तय है।
2. कई सेंटरों के एंट्री (प्रवेश) और एग्जिट (निकास) मार्ग इतने ज्यादा संकरे हैं कि दो लोग भी एक साथ ठीक से नहीं निकल सकते। हद तो यह है कि दर्जनों केंद्रों में आने और जाने के लिए केवल एक ही मुख्य द्वार है। यदि मुख्य द्वार के पास शॉर्ट-सर्किट होता है, तो बच्चों के पास बाहर भागने का कोई दूसरा रास्ता नहीं बचेगा।