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UP: छोटा परिवार, सुखी परिवार...इस जिले के लोगों से लें ये सीख, पांच साल में दिखा क्रांतिकारी बदलाव
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 11 Jul 2025 09:09 AM IST
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सार
जनसंख्या नियंत्रण को लेकर तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार ने तमाम तरह की योजनाएं भी चलाई हैं। ऐसे में हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले की, जहां पांच साल में बड़ा बदलाव नजर आया है।
विश्व जनसंख्या दिवस
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
जहां देश भर में जनसंख्या वृद्धि को लेकर चिंता जताई जाती रही है, वहीं सुहागनगरी से विश्व जनसंख्या दिवस पर एक सुखद और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। जिले में बीते पांच वर्षों के दौरान बच्चों के जन्म में करीब 8 हजार की गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़े इस ओर इशारा कर रहे हैं कि अब लोग ‘छोटा परिवार, सुखी परिवार’ की नीति को गंभीरता से लेने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2019 में जिले में कुल 72,765 बच्चों का जन्म हुआ था, जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 63,182 रह गई। इन आंकड़ों से साफ है कि परिवारों में अब समझदारी बढ़ी है और वे अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि के खतरे को भलीभांति समझने लगे हैं। विश्व जनसंख्या दिवस पर प्रस्तुत हैं रिपोर्ट...
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यह बदलाव केवल संख्या में नहीं है, बल्कि सोच में आया बड़ा परिवर्तन है। जहां पहले बड़े परिवार को सामाजिक मजबूती का प्रतीक माना जाता था, अब लोग कम संतान को बेहतर परवरिश और भविष्य की कुंजी मान रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और जागरूकता अभियानों ने इस सोच को मजबूती दी है। एसीएमओ डा. पवन कुमार ने बताया कि अब लोग खुद स्वास्थ्य केंद्रों पर आकर परामर्श ले रहे हैं और संतान की संख्या को सीमित रखने के विकल्पों को अपनाने में झिझक नहीं रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में भी जागरूकता बढ़ी है, जो पहले एक बड़ी चुनौती मानी जाती थी। महिलाओं में भी जागरुकता आई है।
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परिवार नियोजन के लिए हुए सजग
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह गिरावट केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि लोग अब परिवार नियोजन को लेकर सजग हो रहे हैं। गर्भनिरोधक साधनों की उपलब्धता, आशा कार्यकर्ताओं की मेहनत और सरकार द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों का असर अब साफ दिखने लगा है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह गिरावट केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि लोग अब परिवार नियोजन को लेकर सजग हो रहे हैं। गर्भनिरोधक साधनों की उपलब्धता, आशा कार्यकर्ताओं की मेहनत और सरकार द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों का असर अब साफ दिखने लगा है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. पूनम अग्रवाल ने बताया कि पहले महिलाएं परिवार नियोजन के बारे में बात करने से भी झिझकती थीं, लेकिन अब वो खुद पूछती हैं कि कौन सा विकल्प उनके लिए बेहतर रहेगा। खासतौर से दो बच्चों के बाद अधिकांश महिलाएं गर्भनिरोधक उपायों को अपनाने लगी हैं। जो मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होती है। अधिक गर्भधारण महिलाओं के शरीर पर असर डालता है, जिससे जटिलताएं बढ़ती हैं।
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वर्ष------पैदा हुए बच्चे
2024---- 63182
2023---- 69200
2022---- 62352
2021---- 71809
2020----73222
2019----72765
2024---- 63182
2023---- 69200
2022---- 62352
2021---- 71809
2020----73222
2019----72765
