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Firozabad News: मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में मध्यरात्रि चेकिंग पर हंगामा, धरने पर बैठे इंटर्न

Wed, 19 Aug 2026 12:01 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Updated Wed, 19 Aug 2026 12:01 AM IST
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Uproar over midnight inspection at medical college hostel; interns stage sit-in protest.
फिरोजाबाद। स्वायत्तशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) के हॉस्टल में सोमवार मध्यरात्रि हुई चेकिंग के बाद मंगलवार को 2021 बैच के एमबीबीएस इंटर्न छात्र-छात्राएं धरने पर बैठ गए। महिला इंटर्न ने चेकिंग के दौरान सुरक्षाकर्मियों पर अभद्रता करने का आरोप लगाया है। छात्रों ने आरोपी गार्डों को हटाने और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए प्रशासनिक भवन के बाहर जमकर प्रदर्शन किया। प्राचार्य के खिलाफ भी नारेबाजी की। नगर मजिस्ट्रेट के आश्वासन पर 12 घंटे बाद रात 9:30 बजे छात्रों ने धरना समाप्त कर दिया।
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मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि अत्यधिक बिजली लोड के कारण आए दिन हो रहे तकनीकी फॉल्ट को देखते हुए आंतरिक कमेटी ने सोमवार रात हॉस्टल में औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान कई कमरों में अनधिकृत रूप से एसी और इंडक्शन चलते पाए गए। इसके बाद कमेटी ने 16 इंडक्शन नष्ट करवा दिए। इस कार्रवाई के दौरान बॉयज हॉस्टल में एक महिला इंटर्न मौजूद मिली। महिला इंटर्न का कहना है कि वह अपने साथी छात्र से स्टेथोस्कोप (आला) लेने गई थी। उसी दौरान चेकिंग करने पहुंचे गार्डों ने उसके साथ अभद्र व्यवहार किया। रात में ही 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी। मंगलवार सुबह से ही आक्रोशित इंटर्न धरने पर बैठ गए। उन्होंने हॉस्टल की अन्य समस्याओं जैसे महिला हॉस्टल में पुरुष गार्डों से जांच कराना, मेस के खाने की घटिया गुणवत्ता और इमरजेंसी के समय जनरेटर न चलाने का आरोप लगाया। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने आरोप को खारिज करते हुए बताया कि महिला हॉस्टल के कमरों में महिला डॉक्टर गई थीं जो मेडिकल कॉलेज की कमेटी में शामिल थीं।
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प्राचार्य की अपील बेअसर, रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई

धरनास्थल पर पहुंचे प्राचार्य डॉ. योगेश गोयल ने आंदोलनकारी छात्रों को समझाने काम पर लौटने की अपील की लेकिन छात्र आरोपी गार्डों की तत्काल बर्खास्तगी की मांग पर अड़े रहे। देर शाम तक छात्रों का धरना जारी रहा। रात 9:30 बजे नगर मजिस्ट्रेट के आश्वासन पर धरना समाप्त हुआ।
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अत्यधिक विद्युत भार बढ़ने से कॉलेज में बड़े फॉल्ट हो रहे थे। 12 अगस्त को नोटिस जारी कर और 15 अगस्त को छात्रों को भारी विद्युत उपकरण न चलाने के निर्देश दिए गए थे। सोमवार रात चेकिंग के दौरान अनधिकृत एसी, इंडक्शन और कुछ आपत्तिजनक स्थितियां मिली हैं। पूरे मामले में कमेटी से जांच रिपोर्ट मांगी गई है, जिसके आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।

- डॉ. योगेश गोयल, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज


नगर मजिस्ट्रेट और विभागाध्यक्षों ने छात्रों को समझाया
धरने के बीच देर शाम नगर मजिस्ट्रेट विनोद कुमार पांडेय और मेडिकल कॉलेज के विभिन्न विभागाध्यक्षों ने छात्रों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। विभागाध्यक्षों ने छात्रों से कहा कि जब वे खुद पढ़ते थे, तब भी हॉस्टल में इस तरह के नियम लागू थे। छात्रों से कहा गया कि वे दूसरे मेडिकल कॉलेजों के हॉस्टल में भी नियमों की जानकारी कर सकते हैं। अधिकारियों ने छात्रों से धरना समाप्त करने की अपील की।



इंडक्शन तोड़े, इसलिए बढ़ा आक्रोश
चेकिंग के दौरान मिले इंडक्शन तोड़े जाने पर छात्रों में आक्रोश बढ़ गया। छात्रों का कहना था कि उपकरण तोड़ना उचित नहीं है। वहीं मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि अधिक लोड वाले उपकरणों का प्रयोग नहीं करने के लिए कई बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं। दोबारा इनका प्रयोग न हो सके इसलिए इंडक्शन नष्ट कराए गए।

इंटर्न का आरोप, हॉस्टल से निकालने की धमकियां दीं

इंटर्न का आरोप है कि चेकिंग के दौरान करीब 12 से 15 पुरुष सुरक्षा गार्ड, तीन क्लर्क और एक कैमरामैन उनके कमरे तक पहुंचे। बिना अनुमति फोटो-वीडियो लेने की कोशिश की गई। धक्कामुक्की कर बाहर जाने से रोका गया। घबराकर उन्होंने कमरे की कुंडी अंदर से लगा ली, जिसके बाद महिला वार्डन के पहुंचने पर स्थिति संभली। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि उन्हें हॉस्टल से निकालने और इंटर्नशिप प्रभावित करने की धमकियां दी गईं। मामले में महिला आयोग और नेशनल मेडिकल कमीशन का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है।




स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ा असर
मेडिकल कॉलेज में इंटर्न के हड़ताल पर रहने का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ा। इंटर्न की ड्यूटी वार्डों में लगाई जाती है। प्रशिक्षण के साथ उनसे मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं में भी सहयोग लिया जाता है। मंगलवार को देर शाम तक इंटर्न धरने पर बैठे रहे। इसके चलते वार्डों में जेआर और एसआर के राउंड बढ़ाए गए। मरीजों की व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त निगरानी करनी पड़ी।
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