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विश्व साइकिल दिवस: 83 की उम्र में भी रोज पैडल मार रहे डॉ. शर्मा, 70 के उद्योगपति भी फिटनेस में युवाओं पर भारी

संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Published by: Dhirendra Singh Updated Wed, 03 Jun 2026 01:55 PM IST
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सार

विश्व साइकिल दिवस पर जिले के 70 से 83 वर्ष के बुजुर्गों ने साबित किया कि फिटनेस उम्र की नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति की मोहताज होती है। रोजाना कई किलोमीटर साइकिल चलाकर ये वरिष्ठ नागरिक न केवल खुद को स्वस्थ रख रहे हैं, बल्कि युवाओं को भी सक्रिय जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा दे रहे हैं।

World Bicycle Day Senior Citizens Inspire Youth with Their Fitness and Determination
World Bicycle Day - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

उम्र बढ़ने के साथ लोग अक्सर आराम और सुस्त जीवनशैली की तरफ कदम बढ़ा लेते हैं, लेकिन जिले के कुछ वरिष्ठ नागरिकों ने 70 से 80 वर्ष की उम्र पार करने के बावजूद रोजाना कई किलोमीटर साइकिल चलाकर न केवल खुद को पूरी तरह फिट रखा हुआ हैं, बल्कि आज की सुस्त लाइफस्टाइल जीने वाले युवाओं के लिए भी एक बड़ी मिसाल पेश कर रहे हैं। आज विश्व साइकिल दिवस है। इन बुजुर्गों की प्रेरक कहानी सेहत और इच्छाशक्ति का एक बेहतरीन संदेश दे रही है।


83 की उम्र, 68 साल का साथ: रोज 5 किलोमीटर पैडल मारते हैं डॉ. गणेश शर्मा
83 वर्षीय डॉ. गणेश शर्मा की सुबह आज भी साइकिल के पैडल की आवाज के साथ होती है। उन्होंने महज 15 वर्ष की उम्र में साइकिल चलाना शुरू किया था और यह सफर पिछले 68 वर्षों से लगातार जारी है। डॉ. शर्मा प्रतिदिन सुबह 4 से 5 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं। वे पुरानी यादें ताजा करते हुए बताते हैं कि एक दौर वह भी था जब वह डॉक्टरों की बड़ी बैठकों में भी शान से अपनी साइकिल से ही पहुंचते थे। उनका मानना है कि इस उम्र में भी अगर उन्हें किसी गंभीर बीमारी ने नहीं घेरा है, तो इसका पूरा श्रेय नियमित साइकिलिंग और सक्रिय जीवनशैली को जाता है।
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70 की उम्र में भी फिटनेस का गुप्ता मंत्र: सफर में भी साइकिल नहीं छोड़ते उद्योगपति प्रदीप गुप्ता
शहर के 70 वर्षीय जाने-माने उद्योगपति प्रदीप गुप्ता भी फिटनेस के मामले में युवाओं को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। प्रदीप गुप्ता रोजाना 5 से 6 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं। इससे पहले वे नियमित रूप से बैडमिंटन भी खेलते रहे हैं, जिसने उन्हें हमेशा फिट रखा। उनका कहना है कि साइकिलिंग केवल शारीरिक सेहत ही नहीं, बल्कि मानसिक सक्रियता के लिए भी रामबाण है। वे शहर में तो रोज साइकिल चलाते ही हैं, बल्कि जब कभी बाहर यात्रा पर भी जाते हैं, तो अपनी इस आदत को टूटने नहीं देते।
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पैडल से स्टाइल तक: जरूरत से स्टेटस सिंबल बनी साइकिल
समय के साथ साइकिल की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल चुकी हैं। कभी आम आदमी की जरूरत और साधारण परिवहन का साधन मानी जाने वाली साइकिल अब एक प्रीमियम फिटनेस टूल और स्टेटस सिंबल बन चुकी है। साइकिल विक्रेता प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि अब बाजार में ग्राहकों की पसंद के हिसाब से बेहतरीन तकनीक वाले मॉडल आ चुके हैं। उनके शोरूम पर 30 हजार रुपये तक की प्रीमियम साइकिलें उपलब्ध हैं। आजकल बाजार में माउंटेन बाइक व गियर साइकिल की काफी मांग है। ऊबड़-खाबड़ रास्तों और लंबी दूरी के सफर के लिए युवाओं की पहली पसंद हैं। वहीं इलेक्ट्रिक साइकिल भी पसंद आ रही हैं। यह बैटरी से संचालित होती है, जिससे लंबी दूरी तय करने में कम मेहनत लगती है और लोग इसे फिटनेस व कम्यूटिंग दोनों के लिए खरीद रहे हैं। हाइब्रिड व रोड बाइक भी बाजार में हैं। पेशेवर साइकिल चालकों और सुबह फिटनेस राइड पर निकलने वाले लोगों के बीच इसकी काफी डिमांड है।
 
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