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सारी समस्याएं गैर कांग्रेसी सरकारों की देन
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 21 Sep 2016 02:38 AM IST
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किसानों के सवालों के जवाब देने के दौरान राहुल गांधी
- फोटो : अमर उजाला
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टीम पीके ने राहुल गांधी से सीधे बात करके सवाल पूछने के लिए किसानों का भी चयन किया। ताकि कोई अटपटा सवाल न सामने आ जाए। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने किसानों के नाम पते पढ़कर उन्हें पुकारा। इसके बाद टीम पीके ने किसानों तक माइक पहुंचाया।
रटे-रटाए अंदाज में ज्यादातर किसानों ने सवाल पूछने के दौरान अलग-अलग मुद्दों को उठाया। साथ ही कांग्रेस का गुणगान भी किया। लगे हाथ कांग्रेस को वोट देकर सरकार बनाने के लिए सियासी अंदाज भी दिखा दिया।
किसान शिवसहाय ने बताया कि उसके ऊपर 50 हजार रुपये का कर्ज है। पिछली बार कांग्रेस ने 38 हजार कर्ज माफ किया था। अब बिजली आती नहीं है। ऐसे में फसलें नष्ट हो जाती हैं। ऐसे में परिवार का पेट कैसे भरे ?
रसूलाबाद के लालू गांव निवासी कृष्णकांत ने पूछा कि उसके पास 10 बीघा जमीन है। खेती की दशा खराब है। ऐसे में यूपी में फैक्ट्रियां लगवाएं। राहुल ने उससे उलटा सवाल पूछा कि फैक्ट्री क्यों नहीं लग रही है तो वह बोला उसे नहीं पता। तब उन्होंने कारण बताते हुए कहा कि यूपी में गुंडागर्दी से डरकर उद्यमी नहीं आना चाहते।
फतेहपुर के वसीम खान ने कहा कि पट्टे पर इंदिरा गांधी के जमाने में जमीन मिली पर समतलीकरण नहीं हुआ। कांग्रेस ने मजदूर से किसान बनाया था पर अब फिर मजदूर बन गया है। आगे क्या करे ? राहुल बोले, मोदी को विवश करें कि वे उद्यमियों के बजाय किसानों का कर्ज माफ करें। ऐसा न करें तो कांग्रेस की सरकार बनाएं।
अमरौधा के रोहित सविता ने कहा बीज महंगा मिलता है। मंडी जाने पर फसल के दाम कम मिलते हैं। अन्न का वाजिब दाम पाने को क्या करे ? जवाब में राहुल बोले कि मोदी सरकार खाट ले जाने पर किसानों को चोर कहती है पर हजारों करोड़ डकारने वालों की मदद करती है। ऐसी सरकार को आने सजा दें। कांग्रेस ऐसी सरकार को नहीं चलने देगी।
निनाया के किसान दशरथ सिंह ने कहा कि फसल नष्ट हो गई पर बीमा का पैसा नहीं मिला। मैनेजर अब कर्ज माफी की कांग्रेस की घोषणा के बाद कर्ज अदायगी का दबाव डाल रहा है। अब वह क्या करे ?
जवाब में राहुल सुझाव देते हुए बोले कि कांग्रेस कार्यकर्ता घर घर जाकर कर्ज माफी फार्म भरा रहे हैं। इसे भरें व सरकार पर दबाव बनाएं। यदि यूपी में किसानों की नहीं सुनी जाएगी तो वह कांग्रेस सरकार बनने पर कर्ज माफ करेंगे। इसकी गारंटी एक किसान से हाथ मिलाकर उन्होंने दी। महिला किसान शबाना ने कहा कि उसके पिता की मौत हो चुकी है।
खेती करने के लिए लिया गया दो लाख का कर्ज कैसे दे ? जवाब में बदलाव का नारा देकर कांग्रेस का साथ देने को कहा गया। बैरीकेटिंग के बाहर खडे़ कई किसानों ने सवाल पूछने के लिए आवाज दी पर उन्हें मौका नहीं मिला।
ओलावृष्टि का मुद्दा नहीं उठा- पुखरायां। करीब 45 मिनट तक राहुल गांधी से किसानों ने सवाल-जवाब किए पर बीते वर्ष ओलावृष्टि से बर्बाद हुए किसानों को मुआवजा न मिलने का मुद्दा नहीं उठा। नहरों में पानी न आने की समस्या सामने आई पर गांवों में बंद पड़े सरकारी ट्यूबवेल की समस्या भी गोल हो गई।
मालूम हो कि बीते वर्ष करीब चार लाख किसानों की फसलें ओलावृष्टि से नष्ट हुईं। इनमें से 2 लाख 35 हजार किसान पात्र होते हुए भी मुआवजे से वंचित हैं। जबकि जिला प्रशासन व प्रदेश सरकार इन किसानों को मुआवजे का हकदार मान चुकी है।
ओलावृष्टि का मुआवजा न मिलने की समस्या राहुल के जरिये देश-प्रदेश स्तर तक पहुंच सकती थी पर खाट पंचायत में पहुंचे किसान यह बात क्यों भूल गए, इसका जवाब पूछने पर कांग्रेसी चुप्पी साध गए।
माचिसें फिंकवाई गईं- पुखरांया। गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने तलाशी लेने के बाद ही लोगों को अंदर जाने दिया। इस दौरान तमाम लोगों की जेब में माचिस निकली, जिसे सभा स्थल के बाहर फिंकवा दिया गया।
वहीं तमाम छात्र स्कूल की छुट्टी होने के बाद बैग में कापी-किताबें लेकर पहुंच गए। उन्हें भी अंदर नहीं घुसने दिया गया। हालांकि मौका मिलते ही कई छात्र सुरक्षा कर्मियों को चकमा देकर बैग समेत सभास्थल पर चुपके से पहुंच भी गए। वहीं एक नौजवान 27 साल यूपी बेहाल का नारा अपने शरीर पर पेंट कराकर पहुंचा।
सवाल-जवाब के दौरान सिर्फ एक महिला को मिला मौका- पुखरायां। राहुल से प्रश्न पूछने के लिए सिर्फ एक महिला किसान को मौका मिला, जबकि करीब आधा दर्जन युवाओं, अधेड़ व बुजुर्ग किसानों के नाम पुकारे गए। किसानों का चयन करने वालों ने महिलाओं को सवाल पूछने का अवसर देने में कंजूसी की, जिससे खाट सभा में पीछे साइड में बैठी महिलाओं में मायूसी भी दिखी।
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रटे-रटाए अंदाज में ज्यादातर किसानों ने सवाल पूछने के दौरान अलग-अलग मुद्दों को उठाया। साथ ही कांग्रेस का गुणगान भी किया। लगे हाथ कांग्रेस को वोट देकर सरकार बनाने के लिए सियासी अंदाज भी दिखा दिया।
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किसान शिवसहाय ने बताया कि उसके ऊपर 50 हजार रुपये का कर्ज है। पिछली बार कांग्रेस ने 38 हजार कर्ज माफ किया था। अब बिजली आती नहीं है। ऐसे में फसलें नष्ट हो जाती हैं। ऐसे में परिवार का पेट कैसे भरे ?
रसूलाबाद के लालू गांव निवासी कृष्णकांत ने पूछा कि उसके पास 10 बीघा जमीन है। खेती की दशा खराब है। ऐसे में यूपी में फैक्ट्रियां लगवाएं। राहुल ने उससे उलटा सवाल पूछा कि फैक्ट्री क्यों नहीं लग रही है तो वह बोला उसे नहीं पता। तब उन्होंने कारण बताते हुए कहा कि यूपी में गुंडागर्दी से डरकर उद्यमी नहीं आना चाहते।
फतेहपुर के वसीम खान ने कहा कि पट्टे पर इंदिरा गांधी के जमाने में जमीन मिली पर समतलीकरण नहीं हुआ। कांग्रेस ने मजदूर से किसान बनाया था पर अब फिर मजदूर बन गया है। आगे क्या करे ? राहुल बोले, मोदी को विवश करें कि वे उद्यमियों के बजाय किसानों का कर्ज माफ करें। ऐसा न करें तो कांग्रेस की सरकार बनाएं।
अमरौधा के रोहित सविता ने कहा बीज महंगा मिलता है। मंडी जाने पर फसल के दाम कम मिलते हैं। अन्न का वाजिब दाम पाने को क्या करे ? जवाब में राहुल बोले कि मोदी सरकार खाट ले जाने पर किसानों को चोर कहती है पर हजारों करोड़ डकारने वालों की मदद करती है। ऐसी सरकार को आने सजा दें। कांग्रेस ऐसी सरकार को नहीं चलने देगी।
निनाया के किसान दशरथ सिंह ने कहा कि फसल नष्ट हो गई पर बीमा का पैसा नहीं मिला। मैनेजर अब कर्ज माफी की कांग्रेस की घोषणा के बाद कर्ज अदायगी का दबाव डाल रहा है। अब वह क्या करे ?
जवाब में राहुल सुझाव देते हुए बोले कि कांग्रेस कार्यकर्ता घर घर जाकर कर्ज माफी फार्म भरा रहे हैं। इसे भरें व सरकार पर दबाव बनाएं। यदि यूपी में किसानों की नहीं सुनी जाएगी तो वह कांग्रेस सरकार बनने पर कर्ज माफ करेंगे। इसकी गारंटी एक किसान से हाथ मिलाकर उन्होंने दी। महिला किसान शबाना ने कहा कि उसके पिता की मौत हो चुकी है।
खेती करने के लिए लिया गया दो लाख का कर्ज कैसे दे ? जवाब में बदलाव का नारा देकर कांग्रेस का साथ देने को कहा गया। बैरीकेटिंग के बाहर खडे़ कई किसानों ने सवाल पूछने के लिए आवाज दी पर उन्हें मौका नहीं मिला।
ओलावृष्टि का मुद्दा नहीं उठा- पुखरायां। करीब 45 मिनट तक राहुल गांधी से किसानों ने सवाल-जवाब किए पर बीते वर्ष ओलावृष्टि से बर्बाद हुए किसानों को मुआवजा न मिलने का मुद्दा नहीं उठा। नहरों में पानी न आने की समस्या सामने आई पर गांवों में बंद पड़े सरकारी ट्यूबवेल की समस्या भी गोल हो गई।
मालूम हो कि बीते वर्ष करीब चार लाख किसानों की फसलें ओलावृष्टि से नष्ट हुईं। इनमें से 2 लाख 35 हजार किसान पात्र होते हुए भी मुआवजे से वंचित हैं। जबकि जिला प्रशासन व प्रदेश सरकार इन किसानों को मुआवजे का हकदार मान चुकी है।
ओलावृष्टि का मुआवजा न मिलने की समस्या राहुल के जरिये देश-प्रदेश स्तर तक पहुंच सकती थी पर खाट पंचायत में पहुंचे किसान यह बात क्यों भूल गए, इसका जवाब पूछने पर कांग्रेसी चुप्पी साध गए।
माचिसें फिंकवाई गईं- पुखरांया। गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने तलाशी लेने के बाद ही लोगों को अंदर जाने दिया। इस दौरान तमाम लोगों की जेब में माचिस निकली, जिसे सभा स्थल के बाहर फिंकवा दिया गया।
वहीं तमाम छात्र स्कूल की छुट्टी होने के बाद बैग में कापी-किताबें लेकर पहुंच गए। उन्हें भी अंदर नहीं घुसने दिया गया। हालांकि मौका मिलते ही कई छात्र सुरक्षा कर्मियों को चकमा देकर बैग समेत सभास्थल पर चुपके से पहुंच भी गए। वहीं एक नौजवान 27 साल यूपी बेहाल का नारा अपने शरीर पर पेंट कराकर पहुंचा।
सवाल-जवाब के दौरान सिर्फ एक महिला को मिला मौका- पुखरायां। राहुल से प्रश्न पूछने के लिए सिर्फ एक महिला किसान को मौका मिला, जबकि करीब आधा दर्जन युवाओं, अधेड़ व बुजुर्ग किसानों के नाम पुकारे गए। किसानों का चयन करने वालों ने महिलाओं को सवाल पूछने का अवसर देने में कंजूसी की, जिससे खाट सभा में पीछे साइड में बैठी महिलाओं में मायूसी भी दिखी।

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