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गाजीपुर कांड: बयानबाजी पर गरमाई सियासत, पीड़िता की पहचान उजागर करने पर जताई गई आपत्ति

अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर। Published by: Pragati Chand Updated Mon, 04 May 2026 06:49 PM IST
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सार

Ghazipur News: गाजीपुर जिले में कटारिया गांव में किशोरी की मौत के मामले में बयानबाजी पर सियासत गरमा गई है। पीड़िता की पहचान उजागर करने पर ब्राह्मण जन सेवा मंच ने आपत्ति जताई है। 

Brahmin Jan Seva Manch raised objections to disclosure of victim identity in Ghazipur incident
पीड़िता के परिवार से मिले ब्राह्मण जन सेवा मंच के लोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

गाजीपुर जिले के करंडा थाना क्षेत्र के कटारिया गांव में किशोरी की मौत के मामले में चल रही बयानबाजी के बीच ब्राह्मण जन सेवा मंच ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। संगठन ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर हरिओम और अभिषेक पांडेय के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों पर सवाल उठ रहे हैं, हालांकि अंतिम निर्णय न्यायालय के ट्रायल के बाद ही होगा।

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मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को न्यायालय के निर्णय से पहले हत्यारा या बलात्कारी कहना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों व संगठनों द्वारा पीड़िता का नाम पोस्टर, बैनर और सार्वजनिक भाषणों में लिया जा रहा है, जो कानूनन गलत है। ऐसे कृत्यों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।
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संगठन ने कहा कि वह पीड़िता को अपनी बेटी के समान मानते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का समर्थन करता है, लेकिन बिना न्यायिक प्रक्रिया के किसी को दोषी ठहराना न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। इसी क्रम में ब्राह्मण जन सेवा मंच का एक प्रतिनिधिमंडल कटारिया गांव पहुंचा और अभिषेक पांडेय के परिवार से मुलाकात की। संगठन के अनुसार, परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है। अभिषेक पांडेय की पत्नी गर्भवती है और बच्चे नाबालिग हैं, जबकि परिवार में माता-पिता भी नहीं हैं। ऐसे में परिवार के भरण-पोषण में कठिनाई हो रही है। 

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मंच के संरक्षक सदस्य विजय प्रकाश दुबे (तमिलनाडु) के निर्देशन में भेजे गए प्रतिनिधिमंडल में ब्लॉक संयोजक शिवम उपाध्याय, पप्पू पांडेय, सुधाकर पांडेय, विक्की पांडेय, सिंटू पाठक, अंशु पांडेय, नीतीश दुबे, राजू उपाध्याय, संरक्षक वीरेंद्र नाथ तिवारी और मनोज बाबा शामिल रहे। 

प्रतिनिधिमंडल ने परिवार को आर्थिक सहयोग के रूप में 15-15 हजार रुपये प्रदान किए। मंच ने चेतावनी दी कि यदि बिना प्रमाण किसी को अपराधी बताकर उसकी छवि धूमिल करने का सिलसिला जारी रहा तो संगठन न्यायालय की शरण लेगा। साथ ही पीड़िता की पहचान उजागर करने वालों के खिलाफ भी विधिक कार्रवाई की बात कही है।

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